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गंगा की बदली धारा से गांवों को बचाने की कवायद शुरु
Updated Wed, 25 Apr 2018 12:09 AM IST
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हरिद्वार/रुड़की।
पिछले कुछ सालों से गंगा और सहयोगी नदियों की धारा का रुख बदलने से जिन गांवों और जमीन को खतरा पैदा हो गया था उन्हें बचाने के लिए शासन ने नई नीति बनाई है। इसके तहत जहां-जहां सिल्ट जमा होने से नदियों ने रख बदला है शासन उस सिल्ट को ही साफ कराएगा। ऐसे सिल्ट वाली जगह का ड्रॉन कैमरे की मदद से पहले सर्वे करवाया जाएगा उसके बाद उसके छोटेे-छोटे लॉट बनाकर साफ कराए जाएंगे। इसके लिए सरकारी विभागों के अलावा निजी संस्थाओं और व्यक्तिगत आधार पर लोगों से आवेदन मांगे जाएंगे। शासन की इस कवायद से कलसिया समेत क्षेत्र के कई गांवों को लाभ मिलेगा।
प्रशासन का दावा है कि जन सहयोग से गांवों को बचाया जा सकता है। जिले में पथरी से लेकर खानपुर तक के करीब 50 से ज्यादा गांवों में हर बरसात में गंगा और उसकी सहयोगी नदियां कहर बरपाती हैं। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों के घरों में जलभराव तो होता ही है खेत-खलिहानों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। गंगा की धारा के रुख बदलने से हजारों बीघा कृषि भूमि हर साल बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी कई-कई दिन तक नहीं उतरता। इस समय भी खानपुर क्षेत्र के कई गांवों के लोग इस बात को लेकर भयभीत हैं कि इस बरसात में उनके गांवों को गंगा की बाढ़ बहाकर ले जा सकती है। कलसिया और उसके आसपास के गांवों के सामने गंगा में सिल्ट के ऊंचे-ऊंचे टीले बनने के कारण भयभीत ग्रामीण कई बार प्रशासन से गंगा से सिल्ट हटवाने की मांग कर चुके हैं।
इस समस्या को देखते ह़ुए शासन ने इस बार नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत गंगा की धारा में जमा सिल्ट साफ करवा कर रुख बदल रही धारा को उसके मूल मुख्य स्थान पर लाने के लिए सफाई की जिम्मेदारी छोटे-छोटे स्तर पर कराई जाएगी। खनन की तर्ज पर बड़े-बड़े ठेके देने की बजाय निजी स्तर पर काम करने वाले लोगों अथवा ऐसी कुछ संस्थाओं से प्रशासन आवेदन मांगेगा जो सिल्ट उठाकर गंगा की सफाई करने में योगदान कर सकते हैं। जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि इच्छुुक संस्थाओं का चयन करने के लिए सभी तहसीलस्तर पर समिति का गठन कर लिया गया है। यह समिति ही अधिकृत व्यक्ति का आवेदन स्वीकार करेगी।
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खनन माफिया का दखल करेंगे दूर
प्रशासन की मंशा यह है कि गंगा की धारा में जमी सिल्ट साफ करने के नाम पर हर साल बड़े पैमाने पर होने वाले अवैध खनन की इस बार पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में जहां तहसील स्तर पर गठित की जाने वाली समिति में वन विभाग के प्रतिनिधि, सिंचाई विभाग, भू वैज्ञानिक और खनन अधिकारी शामिल रहेंगे। इससे पहले सीधे जिले स्तर पर आवेदन करने पर ही जांच के बाद खनन का पट्टा अलॉट कर दिया जाता था।
पिछले वर्ष बरसात में गंगा में अवैध खनन से धारा ने रुख बदल लिया था और क्षेत्र के किनारे की ओर बहना शुरू कर दिया था। गंगा के कटाव से नदी किनारे बने तटबंध में लगभग एक किलोमीटर तक तटबंध ध्वस्त हो गया था। इससे क्षेत्र के एक दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा गया था। गनीमत रही कि उसके बाद बरसात बंद हो गई। इससे गंगा का जलस्तर कम हो गया था। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। लगभग दो माह पहले कलसिया गांव के ग्राम प्रधानपति मुकेश की अगुवाई में दर्जनों ग्रामीणों ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा को गंगा के बालावाली घाट के सामने गंगा में जमी सिल्ट की साफ-सफाई और तटबंध की मरम्मत कराई जाने की बाबत ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी लक्सर ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा था। डीएम दीपक रावत ने पत्र का संज्ञान लेते हुए 22 मार्च को बालावाली घाट सहित बरसात के दिनों मे टूटे तटबंध का निरीक्षण किया था। इस दौरान खुद जिलाधिकारी ने माना था कि गंगा की धारा रुख बदल रही है। इससे क्षेत्र के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। डीएम ने गंगा की तलहटी में जमी सिल्ट की सफाई के लिए शासन से मंजूरी लेने की बात कही थी और सिंचाई विभाग को जल्दी तटबंध के मरम्मत के निर्देश दिए थे।
इन गांवों को बाढ़ का खतरा
बालावाली, कलसिया, डुमनपुरी, कुड़ी भगवानपुर, उत्तर प्रदेश का हिम्मतपुर बेला और रामसहायवाला, खानपुर क्षेत्र के पोडोवाली, डेरियो, मोहनावाला, बादशाहपुर, खानपुर, इदरीशपुर, शेरपुर बेला, चंद्रपुरी कला, चंद्रपुरी खुर्द और दल्लावाला गांव पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।
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पिछले कुछ सालों से गंगा और सहयोगी नदियों की धारा का रुख बदलने से जिन गांवों और जमीन को खतरा पैदा हो गया था उन्हें बचाने के लिए शासन ने नई नीति बनाई है। इसके तहत जहां-जहां सिल्ट जमा होने से नदियों ने रख बदला है शासन उस सिल्ट को ही साफ कराएगा। ऐसे सिल्ट वाली जगह का ड्रॉन कैमरे की मदद से पहले सर्वे करवाया जाएगा उसके बाद उसके छोटेे-छोटे लॉट बनाकर साफ कराए जाएंगे। इसके लिए सरकारी विभागों के अलावा निजी संस्थाओं और व्यक्तिगत आधार पर लोगों से आवेदन मांगे जाएंगे। शासन की इस कवायद से कलसिया समेत क्षेत्र के कई गांवों को लाभ मिलेगा।
प्रशासन का दावा है कि जन सहयोग से गांवों को बचाया जा सकता है। जिले में पथरी से लेकर खानपुर तक के करीब 50 से ज्यादा गांवों में हर बरसात में गंगा और उसकी सहयोगी नदियां कहर बरपाती हैं। ऐसे में इन गांवों के ग्रामीणों के घरों में जलभराव तो होता ही है खेत-खलिहानों को भी भारी नुकसान पहुंचता है। गंगा की धारा के रुख बदलने से हजारों बीघा कृषि भूमि हर साल बाढ़ की भेंट चढ़ जाती है। कई गांवों में घुसा बाढ़ का पानी कई-कई दिन तक नहीं उतरता। इस समय भी खानपुर क्षेत्र के कई गांवों के लोग इस बात को लेकर भयभीत हैं कि इस बरसात में उनके गांवों को गंगा की बाढ़ बहाकर ले जा सकती है। कलसिया और उसके आसपास के गांवों के सामने गंगा में सिल्ट के ऊंचे-ऊंचे टीले बनने के कारण भयभीत ग्रामीण कई बार प्रशासन से गंगा से सिल्ट हटवाने की मांग कर चुके हैं।
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इस समस्या को देखते ह़ुए शासन ने इस बार नई व्यवस्था लागू की है। इसके तहत गंगा की धारा में जमा सिल्ट साफ करवा कर रुख बदल रही धारा को उसके मूल मुख्य स्थान पर लाने के लिए सफाई की जिम्मेदारी छोटे-छोटे स्तर पर कराई जाएगी। खनन की तर्ज पर बड़े-बड़े ठेके देने की बजाय निजी स्तर पर काम करने वाले लोगों अथवा ऐसी कुछ संस्थाओं से प्रशासन आवेदन मांगेगा जो सिल्ट उठाकर गंगा की सफाई करने में योगदान कर सकते हैं। जिलाधिकारी दीपक रावत ने बताया कि इच्छुुक संस्थाओं का चयन करने के लिए सभी तहसीलस्तर पर समिति का गठन कर लिया गया है। यह समिति ही अधिकृत व्यक्ति का आवेदन स्वीकार करेगी।
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खनन माफिया का दखल करेंगे दूर
प्रशासन की मंशा यह है कि गंगा की धारा में जमी सिल्ट साफ करने के नाम पर हर साल बड़े पैमाने पर होने वाले अवैध खनन की इस बार पुनरावृत्ति न हो। इसके लिए उपजिलाधिकारी की अध्यक्षता में जहां तहसील स्तर पर गठित की जाने वाली समिति में वन विभाग के प्रतिनिधि, सिंचाई विभाग, भू वैज्ञानिक और खनन अधिकारी शामिल रहेंगे। इससे पहले सीधे जिले स्तर पर आवेदन करने पर ही जांच के बाद खनन का पट्टा अलॉट कर दिया जाता था।
पिछले वर्ष बरसात में गंगा में अवैध खनन से धारा ने रुख बदल लिया था और क्षेत्र के किनारे की ओर बहना शुरू कर दिया था। गंगा के कटाव से नदी किनारे बने तटबंध में लगभग एक किलोमीटर तक तटबंध ध्वस्त हो गया था। इससे क्षेत्र के एक दर्जन गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा गया था। गनीमत रही कि उसके बाद बरसात बंद हो गई। इससे गंगा का जलस्तर कम हो गया था। इससे क्षेत्र के ग्रामीणों ने राहत की सांस ली थी। लगभग दो माह पहले कलसिया गांव के ग्राम प्रधानपति मुकेश की अगुवाई में दर्जनों ग्रामीणों ने तहसील मुख्यालय पहुंचकर उपजिलाधिकारी कौस्तुभ मिश्रा को गंगा के बालावाली घाट के सामने गंगा में जमी सिल्ट की साफ-सफाई और तटबंध की मरम्मत कराई जाने की बाबत ज्ञापन सौंपा था। इस ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए उपजिलाधिकारी लक्सर ने जिलाधिकारी को पत्र भेजा था। डीएम दीपक रावत ने पत्र का संज्ञान लेते हुए 22 मार्च को बालावाली घाट सहित बरसात के दिनों मे टूटे तटबंध का निरीक्षण किया था। इस दौरान खुद जिलाधिकारी ने माना था कि गंगा की धारा रुख बदल रही है। इससे क्षेत्र के कई गांवों पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है। डीएम ने गंगा की तलहटी में जमी सिल्ट की सफाई के लिए शासन से मंजूरी लेने की बात कही थी और सिंचाई विभाग को जल्दी तटबंध के मरम्मत के निर्देश दिए थे।
इन गांवों को बाढ़ का खतरा
बालावाली, कलसिया, डुमनपुरी, कुड़ी भगवानपुर, उत्तर प्रदेश का हिम्मतपुर बेला और रामसहायवाला, खानपुर क्षेत्र के पोडोवाली, डेरियो, मोहनावाला, बादशाहपुर, खानपुर, इदरीशपुर, शेरपुर बेला, चंद्रपुरी कला, चंद्रपुरी खुर्द और दल्लावाला गांव पर बाढ़ का खतरा मंडरा रहा है।