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आपदा के विज्ञापन पर सरकार ने झोंके 23 करोड़
अमर उजाला, देहरादून
Updated Thu, 10 Oct 2013 12:29 PM IST
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उत्तराखंड सरकार ने आपदा के बाद अपनी पीठ थपथपाने में करोडों रुपए खर्च कर दिए। सरकार चाहती तो आपदा प्रभावितों के लिए करीब 350 प्री फेब्रीकेटिड मकान बना सकती थी।
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पैसे को प्रचार प्रसार में झोंक दिया
लेकिन ऐसा करने की बजाए वर्ल्डबैंक से पैसा लेना मंजूर किया गया और अपने पैसे को प्रचार प्रसार में झोंक दिया गया। यह हाल केदारनाथ की आपदा के बाद का है।
सरकार ने आपदा राहत के तहत प्रचार प्रसार में ही एक माह के अंदर 23 करोड़ रुपये झोंक दिए।
हाल यह है कि एक एफएम चैनल को ही एक करोड़ से अधिक का भुगतान किया गया। प्रदेश के सूचना विभाग का तोहफा इलेक्ट्रॉनिक माध्यमों को खूब मिला।
आरटीआई के तहत किए गए आवेदन के जवाब मे यह जानकारी खुद सरकारी विभागों ने उपलब्ध कराई है।
एक्टिवस्टि ने मांगी सूचना
हल्द्वानी के आरटीआई एक्टिवस्टि ने सूचना विभाग से पूछा था कि आपदा के बाद किसको और कितना विज्ञापन दिया गया। पता लगा कि इस पर सरकार ने करीब 23 करोड़ रुपए खर्च किए।
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छवि को बनाए रखने के लिए यह कीमत तब अदा की गई जब सरकार प्री फेब्रीकेटिड मकान बनाने केलिए वर्ल्ड बैंक से उसकी शर्तों पर पैसे ले रही है।
सरकार की ओर से बनाए जा रहे इन मकानों की कीमत करीब छह लाख रुपये आंकी जा रही है। साफ है कि 23 करोड़ में सरकार करीब 350 परिवारों को आशियाना उपलब्ध करवा सकती थी। करीब दो हजार मकान बनाने का लक्ष्य रखा गया है।
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1600 मकानों के लिए पैसे जुटाने होते
इसका मतलब यह भी हुआ कि सरकार को तब 1600 मकानों के लिए पैसे जुटाने होते। वर्ल्ड बैंक की शर्त है कि पैसा किस्तों में मिलेगा और लोगों को यह पसंद नही आ रहा है।
कम से कम अपने पैसे से सरकार प्रभावितों को एकमुश्त भुगतान करने में सक्षम होती। केदारनाथ की आपदा के तीन दिन बाद सरकार हरकत में आ पाई थी।
फिर केदारनाथ की आपदा से बड़ी संख्या में यात्रियों को भी काल के ग्रास में समाना पड़ा। ऐसे में सरकार पर कुछ तुरंत करने का ही नहीं बल्कि किए हुए को दिखाने का दबाव भी रहा।
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