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...और फुटबाल बन गई मिनरल वाटर की बोतलें

Sun, 07 Jul 2013 10:37 AM IST
गुप्तकाशी/विनय बहुगुणा
गुप्तकाशी/विनय बहुगुणा Updated Sun, 07 Jul 2013 10:37 AM IST
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Football became more bottles of mineral water

जीआईसी इंटर कालेज में राहत सामग्री स्टोर केंद्र में सामग्री की बर्बादी हो रही है। आलू की बोरियां जहां सड़ रही हैं। वहीं पानी की बोतलों के साथ बच्चे फुटबॉल खेल रहे हैं। लेकिन हैरत यह है कि यहां पूछने वाला कोई नहीं है। जबकि कई लोगों का कहना है कि उन्हें अभी तक राहत सामग्री नहीं मिल पाई है। भले अधिकारी इसे नकार रहे हैं।

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बृहस्पतिवार को मैं साढ़े दस बजे यहां जीआईसी पहुंचा। यहां पर आपदा प्रभावित केदारघाटी के गांवों के लिए आपदा सामग्री पहुंचाने का मुख्य स्टोर केद्र बनाया गया है। इस केंद्र से जहां गौरीकुं ड में हेलीकॉप्टर से राहत भेजी जा रही है। वहीं अन्य गांवों के लिए वाहन की व्यवस्था है। लेकिन सुरक्षा की दृष्टि से मामला संवेदनशील है।
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बदबू मारने लगा है पानी
जीआईसी के प्रवेश द्वार पर ही कीचड़ का अंबार लगा है। जबकि ठीक सामने दो कमरों के भवनों पर पानी की बोतलों का अंबार लगा है। हैरत यह है कि अब प्लास्टिक की बोतलों में बंद यह पानी भी बदबू मारने लगा है। वहीं बाहर बरामदे में रखी छ: आलू की बोरियों में आलू सड़ रहा है।
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इस दौरान वहां मौजूद कुछ अधिकारियों से पूछा भी। लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसी दौरान मुझे यहां मैदान में नारायणकोटी गांव की सावित्री देवी, मंजू देवी, फेगू गांव की भागा देवी ने बताया कि उन्हें अभी तक प्रशासन की ओर राहत सामग्री नहीं मिल पाई है। वे लगातार केंद्र में पहुंच रहे हैं। लेकिन उन्हें अनदेखा किया जा रहा है।

ग्रामीणों ने भी जताई नाराजगी
गुप्काशी से लगे गांवों के ग्रामीणों ने भी जीआईसी से वितरित की जा रही राहत सामग्री को लेकर नाराजगी जताई है। ग्रामीणों का कहना है कि पानी की बोतलें, बिस्कुट और कुरकुरे तो दिए गए हैं। जबकि अभी तक चावल उपलब्ध नहीं हो पाया है। रुद्रपुर के ग्राम प्रधान कल्पेश्वरी देवी ने बताया कि 148 परिवारों वाले ग्राम को सात कुंतल ही राहत सामग्री मिली है।

ब्यूखी के पंचम सिंह ने बताया कि उन्हें हेलीकॉप्टर से दस दिन पूर्व दस किमी चावल, आटा, दाल और खाने का तेल भेजा गया था। लेकिन उसके बाद से कोई सुध लेने वाला भी नहीं है। ग्रामीणों का कहना है कि स्वयंसेवी संगठनों के द्वारा बेहतर तरीके से सामग्री दी जा रही है।

मानने के बाद भी नहीं हो रही कार्रवाई
अधिकारी मान भी रहे हैं कि राहत सामग्री पात्र प्रभावित तक कम पहुंच रही है। कई स्थानों पर संपन्न लोग भी राहत सामग्री अपने घरों में स्टोर करने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। बावजूद प्रशासन और संबंधित अधिकारी कोई कार्रवाई नहीं कर पा रहे हैं।


इनका कहना है
35 गांवों में राहत सामग्री भेजी जा चुकी है। कई गांवों में हेलीकॉप्टर से सामग्री भेजी गई। जबकि कुछ जगह ट्रक से भेजी गई है। कुछ समस्याएं आ रही हैं। लेकिन उनका निस्तारण करने का प्रयास किया जा रहा है।
संजय डबराल सप्लाई इंस्पेक्टर मुख्य केंद्र जीआईसी गुप्तकाशी

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