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अपनी जड़ों से दूर होने की टीस के साथ कई परिवार दून शिफ्ट
दीपक बेंजवाल
Updated Sat, 03 Aug 2013 07:47 AM IST
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मरन त छेंछ एक ना एक दिन, पर अपणा मुलक मा मरदा त भग्यान होंदा (एक न एक दिन मरना है, लेकिन अपने गांव में मरता तो भाग्यशाली होता)। देहरादून जाने वाली मैक्स में बैठे चमराड़ा गांव के 95 वर्षीय भोलादत्त थपलियाल की आंखों में उम्र की लाचारी और बेबसी का दर्द साफ दिखाई दे रहा था।
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चमराड़ा गांव में जमीन लगातार धंसने से लोगों के घरों को खतरा हो गया है। ऐसे में कई लोगों को अपनी मातृ भूमि को छोड़ना पड़ा है। भोलादत्त कहते हैं कि बेटा अब अपनी धरती पर प्राण त्यागने की आखिरी इच्छा भी अधूरी रह जाएगी। जीवन में बहुत दुख देखा, लेकिन अब लगता है कि हम अनाथ हो गए हैं।
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पितरों की बसाई धरती हमसे रूठ गई है। भोलादत्त की तरह महेश प्रसाद, जगदंबा प्रसाद और देवी थपलियाल भी अपने पुरखों के बनाए मकान छोड़कर देहरादून चले गए। महेश प्रसाद कहते हैं कि भूस्खलन से मकान कभी भी गिर सकता है, इसलिए अब देहरादून शिफ्ट हो रहा हूं।
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पिता को देहरादून छोड़ने जा रहे देवी प्रसाद बताते हैं कि पिताजी की उम्र 95 वर्ष है। कई बार रात को पिताजी को पीठ पर लादकर जंगल की ओर भागना पड़ा। अब गांव की स्थिति और खराब हो रही है। देहरादून में छोटा भाई रहता है। पिताजी वहीं रहेंगे। नौकरी यही है इसलिए यहीं विजयनगर में कमरा ले लिया है। 15 परिवारों के इस गांव से चार अन्यत्र शिफ्ट कर गए हैं। सभी लोग गांव छोड़ने का मन बना चुके हैं।
यह है तस्वीर
चमराड़ा की अगस्त्यमुनि से दूरी 1.5 किलोमीटर है। विजयनगर झूला पुल बहने से ग्रामीणाें को पांच किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। तहसील ऊखीमठ से चमराड़ा की दूरी 30 किलोमीटर है। ब्लाक मुख्यालय अगस्त्यमुनि से वर्तमान में दूरी छह किलोमीटर है।
समीपवर्ती चाका गांव में भी 26 आवासीय भवन भूस्खलन से क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। जिससे वे भी गांव छोड़कर अन्यत्र चले गए हैं। चमराड़ा गांव के ऊपर स्थित अमरापुरी तोक से भी छह परिवार पलायन कर चुके हैं। इसके अलावा ल्वाण्या पाणी, तनकूली, सिल्ली, फरगला आदि गांवों में भूस्खलन से खतरा बना हुआ है।
बुनियादी सुविधाएं :
पेयजल : डांगी-चमराड़ा पेयजल योजना क्षतिग्रस्त हो चुकी है। गांव का प्राकृतिक स्रोत भी टूट चुका है। वर्तमान में गांव में पेयजल संकट बना हुआ है।
सड़क : चार किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई चढ़ने के बाद मयाली-गुप्तकाशी सड़क पर डडोली से जुड़ता है।
स्वास्थ्य : स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए छह किलोमीटर दूर ब्लाक मुख्यालय स्थित सीएचसी अगस्त्यमुनि में जाना पड़ता है। एएनएम सेंटर सात किमी दूर पठालीधार में स्थित है।
शिक्षा : प्राथमिक विद्यालय नहीं है। बच्चे पढ़ाई के लिए फलई या फिर अगस्त्यमुनि जाते हैं।
विस्थापन : वर्तमान में गांव को प्रशासन ने विस्थापन की श्रेणी में लिया है।
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