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450 फीसदी अधिक बारिश से तबाह हुआ उत्तराखंड

Fri, 21 Jun 2013 10:49 AM IST
देहरादून/नई दिल्ली/ब्यूरो
देहरादून/नई दिल्ली/ब्यूरो Updated Fri, 21 Jun 2013 10:49 AM IST
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expert blames global warming for uttarakhand flood

उत्तराखंड में आसमान से बरसी आफत ने सैकडो लोगों की जान ले ली, वहीं अभी भी हजारों लोगों का कुछ पता नहीं है। आखिर इतनी बड़ी तबाही कैसे और क्यूं हुई? मौसम विभाग ने इस पर से परदा उठाया है।

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भारतीय मौसम विभाग के अनुसार उत्तराखंड में सामान्य बारिश 71.3 मिलीमीटर होती है।

अचानक सामान्य से साढ़े चार सौ फीसदी ज्यादा हुई बारिश (385.1 मिलीमीटर) ही प्रदेश में तबाही की असल वजह बन गया। अचानक सामान्य से साढ़े चार सौ फीसदी ज्यादा हुई बारिश से उत्तराखंड में तबाही मच गई है।
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उत्तराखंड की तबाही पर संपूर्ण कवरेज देखने के लिए क्लिक करें
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मौसम विभाग के अनुसार सामान्य से 440 फीसदी ज्यादा बारिश होने के चलते उत्तराखंड में सुनामी आ गई है। गृह मंत्रालय ने उत्तराखंड के हालात पर जारी अपडेट में मौसम विभाग के इस आंकड़े को राज्य में अचानक हुई भारी तबाही की वजह बताया है।

तस्वीरों में: तबाही के बाद राहत का इंतजार


एक जून से 18 जून के बीच दक्षिणी-पश्चिमी मानसून के दौरान उत्तराखंड में सामान्य तौर पर 71 मिलीमीटर बारिश होती है। मगर पिछले दिनों हुई बारिश ने वर्षों के रिकॉर्ड तोड़ दिए।

कितने लोग मरे? जितने मुंह, उतनी बातें

दरअसल, उत्तराखंड में भारी तबाही के बाद यह सवाल उठने लगे हैं कि प्रदेश सरकार और केंद्र की ओर से आपदा प्रबंधन को लेकर पर्याप्त उपाय नहीं किए गए थे।

जिंदा बचे लोगों की आपबीती

यह भी कहा जा रहा है कि मौसम विभाग ने पहले ही तेज और भारी बारिश होने की सूचना दी थी। इसके बावजूद कदम नहीं उठाए गए। जबकि केंद्र सरकार का कहना है कि तमाम उपाय किए गए थे। मगर कुदरत का प्रकोप इतना ज्यादा था कि सभी उपाय नाकाम हो गए।

खुद मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगर कुछ दिनों में 440 फीसदी से ज्यादा बारिश हो जाए तो हालात को सामान्य बनाना बड़ी चुनौती तो बन ही जाती है।

तस्वीरों में: आसमान से बरसी आफत

कांग्रेस ने भी कहा है कि यह समय राजनीति करने का नहीं बल्कि फंसे लोगों को बचाने का है।

सूचना और प्रसारण मंत्री मनीष तिवारी ने कहा कि अभी सरकार के लिए राहत और बचाव कार्य पहली प्राथमिकता है। बाकी बातों का पोस्टमार्टम बाद में किया जा सकता है।

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