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शंकराचार्य से मिलने पहुंचे हरीश रावत, बोले पश्चाताप यात्रा निकाले भाजपा 

Sun, 17 Apr 2016 06:55 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार
ब्यूरो/अमर उजाला, हरिद्वार Updated Sun, 17 Apr 2016 06:55 PM IST
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EX-CM harish rawat in haridwar.
स्वरूपानंद के साथ पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत

उत्तराखंड के निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि भाजपा ने दलबदल की गलत परंपरा डालकर लोकतांत्रिक सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लागू करने का जो नासूर उत्तराखंड को दिया है जनता उसके लिए भाजपा को माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा को अपनी शुद्धि के लिए राज्य में पश्चाताप यात्रा निकालकर सभी तीर्थों के पवित्र जल से खुद को शुद्ध करना चाहिए।

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रविवार को हरीश रावत, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष किशोर उपाध्याय के साथ कनखल स्थित श्री शंकराचार्य मठ पहुंचे और जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी स्वरूपानंद सरस्वती से मुलाकात की। उसके बाद पत्रकारों से वार्ता में निवर्तमान मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड के इतिहास में भाजपा ने काला अध्याय लिखा है। जनता द्वारा चुनी सरकार अच्छी तरह काम रही थी लेकिन भाजपा ने दल-बदल की गलत परंपरा डालकर विकास बाधित किया।
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उन्होंने कहा कि भाजपा को यह याद रखना चाहिए कि ऐसे कृत्यों की सजा देने के लिए जनता तैयार बैठी है। शंकराचार्य से मुलाकात के बारे में उन्होंने कहा कि यह केवल शिष्टाचार मुलाकात थी। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष किशोर उपाध्याय ने भी भाजपा पर हमला बोला।
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हरिद्वार पहुंचने पर दोनों नेताओं का पूर्व विधायक अंबरीष कुमार, पूर्व ओएसडी पुरुषोत्तम शर्मा, महानगर कांग्रेस अध्यक्ष अंशुल श्रीकुंज, डा.संतोष चौहान, विमला पांडेय, अशोक शर्मा, ओपी चौहान, विभाष मिश्रा, अभिषेक दुबे, धर्मेंद्र प्रधान, वरुण वालियान, सचिन बेनीवाल, नीरव साहू, तरुण नैयर, महेंद्र अरोड़ा, बीना कपूर, महिला कांग्रेस की ग्रामीण जिला अध्यक्ष मोनिका जैन, किरण सिंह, ठाकुर रतन सिंह, आशीष चौधरी आदि कांग्रेसियों ने स्वागत किया।

शराब बंदी पर संतुलन जरूरी
शंकराचार्य मठ में निवर्तमान मुख्यमंत्री हरीश रावत ने कहा कि प्रदेश में पूर्णत: शराब बंदी लागू करने का वह विरोध तो नहीं करते लेकिन राज्य चलाने के लिए राजस्व और संसाधनों की जरूरत होती है। इसलिए इस मुद्दे पर संतुलन बनाना जरूरी है।


ब्रह्मचारी ने शनिवार को ही प्रदेश में शराबबंदी पर पूर्णत: रोक लगाने की मांग की थी। इसके बारे में उन्होंने राज्यपाल से मिलने की भी बात कही थी। हरीश रावत के तर्क पर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी का कहना था कि प्रदेश के लिए संसाधन बेहद जरूरी है। लेकिन देवभूमि की पवित्रता पर आंच नहीं आने देनी चाहिए।

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