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बेमिसालः बिना डिग्री के इंजीनियर ने रोशन कर दिया गांव
हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Tue, 09 Jul 2013 01:07 PM IST
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थॉमस अल्वा एडीसन को शरारती बच्चा कहा जाता था, लेकिन उसकी बुद्धि ने जो काम किया उससे दुनिया रोशन हुई। ऐसा ही एक हिंदुस्तानी है जिसने दिल से चाहा, दिमाग लगाया और अब उसके जज्बे को आस-पड़ोस के लोग सलाम ठोकते हैं।
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उत्तराखंड के बैलपड़ाव गांव के अनपढ़ युवक कुबेर की बुद्धि के खजाने से कई घर रोशन हो रहे हैं। कुबेर अपने सालों पुराने घराट (पनचक्की) के बूते खुद और पड़ोस के कुछ घरों को बिजली दे रहे हैं।
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कुबेर सिंह डोगरा अपने दिमाग के दम पर पूरे गांव में बिना डिग्री के इंजीनियर कहलाते हैं। अब उसका घराट बिजली पैदा करता है और रोशनी भी देता है। अपने घर के साथ गांव के आधा दर्जन घर उसकी बिजली से ही रोशन हैं।
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लगभग समाप्त होने की कगार पर रामनगर के चार जीवित घराटों में शामिल है कुबेर का घराट। 32 साल का कुबेर एक साल से इसी की मदद से बिजली पैदा कर रहा है।
बिजली उत्पादन के बाद उसे स्टोर करना आसान नहीं हो पाता, फिर भी 21वीं सदी का ये ‘थॉमस एडीसन’ घरेलू इस्तेमाल के लिए ज्यादातर घराट से पैदा होने वाली बिजली से ही काम चलाता है, न कि पावर कॉरपोरेशन से मिलने वाली बिजली से।
आठवीं तक पढ़े कुबेर को घराट विरासत में मिला है। आज भी इस घराट में आसपास के कई घरों के धान और गेहूं की पिसाई होती है। एक साल पहले इस युवक के भीतर बिजली पैदा करने का जुनून जागा तो उसे सच बनाने में जुट गया। गांव का इंजीनियर बनने की राह में आई बाधाओं को इस जुनून के आगे झुकना पड़ा और मेहनत के बूते सफलता कुबेर के घराट तक पहुंची।
जब भी कुबेर का घराट चलता है तो उसके घर में सभी उपकरण इसी बिजली से चलते हैं। उरेडा से खरीदा गया अल्टरनेटर (जेनरेटर की तरह का उपकरण) और छोटी टरबाइन घराट से बिजली बनाते हैं।
तीन किलोवाट के अल्टरनेटर को घराट के पट्टों से जोड़ा गया है और जब पट्टे घूमते हैं तो घराट को घुमाने वाले पानी से लगा अल्टरनेटर, टरबाइन भी तेज गति से घूम बिजली पैदा करता है। टरबाइन अल्टरनेटर को चलाती है।
कुबेर की आर्थिकी इसी घराट पर निर्भर है। हालांकि पैदा की बिजली को वह बेचते नहीं और अपने आसपास के आधा दर्जन अन्य घरों को भी मुफ्त में बिजली देते हैं।
इस युवक के जुनून ने पहाड़ में खत्म होने के कगार पर पहुंचे घराटों से उम्मीद की किरण दिखाई है तो साथ में इतिहास की इस विरासत के 21वीं सदी में फायदे भी। ये बात अलग है कि उनका आविष्कार आज तक सिर्फ बैलपड़ाव और उसके आसपास के घरों तक ही रोशनी देता रहा है।
कुबेर बताते हैं कि बिजली बनाने का सारा खेल पानी से है। जब जलस्तर कम रहता है तब कम बिजली पैदा हो पाती है। वह अधिकतम तीन किलोवाट बिजली घराट से निकालते हैं। उनका कहना है कि अब उरेडा को इस फायदे के बारे में बताकर कम से कम सात किलोवाट का अल्टरनेटर घराट से जोड़ेंगे।