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बचाने वालों के हौसले बुलंद, पर धैर्य खो रहे फंसे लोग

Thu, 27 Jun 2013 03:25 PM IST
बदरीनाथ/सुधाकर भट्ट
बदरीनाथ/सुधाकर भट्ट Updated Thu, 27 Jun 2013 03:25 PM IST
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Eight thousand people are still stranded at Badrinath Dham

बचाने वालों के हौसले बुलंद हैं, पर फंसे लोग धैर्य खो रहे हैं। उनके लिए हर बीतता लम्हा भारी पड़ता जा रहा है। बदरीनाथ धाम में अब भी लगभग आठ हजार लोग फंसे हैं। इनमें पांच हजार तीर्थयात्री हैं।

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खराब मौसम जवानों के धैर्य की परीक्षा ले रहा है। मानवीय रिश्तों के कई रंग, कई पहलू दिखाई दे रहे हैं। कुछ खीझ रहे हैं। कुछ दूसरे पर नाराज हो रहा है तो कई दूसरों को मुसीबत का मारा समझकर उसका सहारा भी बन रहे हैं।
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पता नहीं अपना कब नंबर आएगा

तीर्थयात्री इस बात से बेचैन हैं कि लोगों को निकालने की रफ्तार काफी धीमी है। प्रतीक्षा अंतहीन लग रही है। न जाने कब उनका नंबर आएगा।

बुधवार को प्रशासन ने फंसे लोगों को टोकन बांटे। लगभग आठ-नौ सौ टोकन बांटे गए। एक टोकन पर पांच से 15 लोग हैं।

भंडारे चल रहे, राशन खत्म होने वाला
बदरी-केदार मंदिर समिति और बामणी, माणा, पंडा पंचायत की ओर से भंडारे चलाए जा रहे हैं। लेकिन खाने को लेकर शिकायतें भी हैं। सवाल अच्छे-बुरे का भी है।

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अब यहां रसद न पहुंची तो खाने-पीने का संकट भी खड़ा हो जाएगा। राशन खत्म हो रहा है। राशन खत्म होने के बाद तो यहां के होटल पहले ही बंद हो चुके हैं।

बदरीनाथ धाम बिलकुल सुरक्षित
अलकनंदा के उफान से धाम में कोई नुकसान नहीं है। मंदिर में पूजा-अर्चना लगातार चल रही है। प्रतिदिन पट खुल रहे हैं। दवा और प्रसाद की दुकानें अब भी खुली हैं। धाम में रहने की सुविधा है।


ज्यादातर जगहों पर फंसे लोगों से लोग कोई पैसा नहीं ले रहे। आईटीबीपी की कड़ी मेहनत से आपदा के पांच दिन बाद यहां बिजली भी आ गई थी।

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हाथ में टोकन और हेलीकाप्टर का इंतजार
बुधवार को प्रशासन ने ऐलान किया कि जो चलने में सक्षम हैं, वे पैदल चलें। लामबगड़ में अलकनंदा पर पुल बन गया है। लेकिन धाम से 13 किलोमीटर तक चलने की हिम्मत कम ही लोगों में है।

बीमार, बुजुर्ग और बच्चों को छोड़कर जवान लोग जाएं भी तो कैसे। जो अकेले हैं वे पैदल निकल रहे हैं।

बुधवार को लगभग आठ सौ लोग पैदल ही निकल पड़े। बाकी टोकन हाथ में लेकर हेलीकॉप्टर के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। पुल बन गया है इस बात पर कम ही लोगों को भरोसा है।

दिल्ली निवासी प्रभात गुप्ता कहते हैं, पैसे खत्म हो रहे हैं। परिवार के साथ आए हैं। बेटा विकलांग हैं। दो बेटियां और पत्नी साथ में हैं। पैदल कैसे निकल सकते हैं। घर कब जाएंगे पता नहीं।

मौसम का बिगड़ा मिजाज
मौसम के बिगड़े मिजाज ने वहां फंसे लोगों के दिल फिर धड़का दिए हैं। ढाई बजे के बाद घने काले बादलों ने यहां के आसमान पर डेरा डाल दिया है। बूंदाबांदी होने लगी है।

तेज बारिश के आसार हैं। अगर ऐसा हुआ तो ठंड भी सताने लगेगी। मैदानी लोगों के लिए मौसम यहां खासी चुनौती पेश कर रहा है।

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