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उत्तराखंड के इन सौ गांवों में नहीं मनाई जाती होली

Tue, 29 Mar 2016 05:16 PM IST
संजू पंत/अमर उजाला,डीडीहाट (पिथौरागढ़)
संजू पंत/अमर उजाला,डीडीहाट (पिथौरागढ़) Updated Tue, 29 Mar 2016 05:16 PM IST
सार

गांव में मिथक प्रचलित है। 
घाटी में लोग होली के संगीत और साहित्य के बारे में कुछ नहीं जानते
रंग और अबीर से खेलने करते हैं से करते है परहेज 
 

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Didihat 100  villages not celebrate Holi.
होली - फोटो : demo

विस्तार

इस तहसील के लगभग 100 गांवों में होली नहीं मनाई जाती। दूनाकोट घाटी, आटाबीसी और बाराबीसी पट्टी के इन गांवों में लोग सिर्फ आठूं का पर्व मनाते हैं। इन गांवों में यह मिथक प्रचलित है कि जिन गांवों में आठूं मनाई जाती है वहां पर होली नहीं मनाई जाती। 
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होली के त्योहार के समय अन्य गांवों में गीत, नृत्य की धूम रहती है, लेकिन इन गांवों में सन्नाटा पसरा रहता है। चीर बंधन, होली गायन से इन गांवों के लोग काफी दूर रहते हैं। रंग और अबीर से खेलने में भी परहेज करते हैं।
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दूनाकोट घाटी में लोग होली के संगीत और साहित्य के बारे में कुछ नहीं जानते। जौरासी से लेकर चर्मा तक और उस तरफ लखतीगांव, सौगांव तक के गांवों में होली को लेकर लोगों में कोई उत्साह, उमंग नहीं दिखती।
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यहां के लोगों का कहना है कि आठूं का पर्व धूमधाम से मनाते हैं। आठूं इन गांवों में एक माह तक भी मनाई जाती है।

होली के बदले मनाते है आंठू का पर्व

हाटथर्प, धौलेत और सिटोली गांव में जितने उल्लास से होली मनाई जाती है उतने ही उल्लास से आठूं का पर्व भी मनाया जाता है। यहां के लोगों का कहना है कि यह सिर्फ मिथक बनाया गया है। 

किसी पर्व को मनाने और किसी को न मनाने के पीछे दिए जाने वाले तर्क समझ में नहीं आते। लोगों को हर पर्व और त्योहार का समान रूप से सम्मान करना चाहिए। हाटथर्प गांव में इन दिनों होली की धूम मची है और सितंबर में आठूं की मस्ती में लोग डूब जाएंगे।

कुछ लोग चाहते है कि बदले गावों की यह परंपरा

Didihat 100  villages not celebrate Holi.
मं‌द‌िर मेें खेला गया रंग

हाटथर्प गांव के धन सिंह कफलिया का कहना है कि यदि किसी पर्व को लेकर कोई मिथक चला आ रहा हो तो उसे बदला भी जा सकता है। 

वह कहते हैं कि जिन गांवों के लोग होली नहीं मनाते उनको होली मनाने की परंपरा शुरू कर देनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हाटथर्प के लोग होली और आठूं समान रूप से मनाते हैं।

अपशकुन के डर से नहीं मनाते होली
बोरागांव के नैन सिंह बोरा का कहना है कि गांव के लोगों ने एक बार होली मनाने का प्रयास किया, लेकिन अपशकुन हो गया। होली की चीर मथुरा से लाई गई, लेकिन वह चोरी हो गई। 

उसके बाद किसी ने भी होली मनाने का प्रयास नहीं किया। वह कहते हैं कि उन्होंने अपने जीवन में कभी होली नहीं खेली।

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