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आंखों के सामने गुम हुआ 12 साल का बेटा
देहरादून/ब्यूरो
Updated Wed, 26 Jun 2013 09:59 AM IST
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15 जून को बारिश के बावजूद हम रात को केदार बाबा के दर्शन के लिए पहुंचे। अंधेरा ज्यादा था इसलिए नजदीक के ही हिमालयन गेस्ट हाउस में ठहर गए। हेलीकाप्टर सेवा बंद और घोड़े-खच्चर वालों की हड़ताल होने से पैदल लौटे। रविवार
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सुबह चले लेकिन यह नहीं पता था कि एक प्रलय से बचने के बाद दूसरी तबाही उनका इंतजार कर रही है।
उत्तराखंड आपदा की विशेष कवरेज
आपदा से बचने के बावजूद उनका 12 साल का बेटा कहीं गुम हो गया। मंगलवार को दून पहुंचे लुधियाना निवासी संदीप सलवान की आंखों में आंसू और दिल में बेटे के खो जाने की कसक है।
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संदीप सलवान अपनी पत्नी मीनाक्षी सलवान, बड़ी बेटी मानवी सलवान और बेटे सर्वेश सलवान के साथ केदारनाथ की यात्रा पर गए थे। 16 जून की सुबह वह केदारनाथ से वापस चले। बारिश तेज थी इसलिए रामबाड़ा में ही रुक गए। दिल नहीं माना तो नीचे की ओर चलने लगे लेकिन गौरीकुंड से करीब चार किलोमीटर पहले एक तेज बहता झरना उनके लिए मुसीबत बन गया।
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झरना आसानी से पार हो जाएगा
झरने का बहाव इतना तेज था कि उन्हें वहीं रुकना पड़ा। रात तो कट गई। सुबह किसी ने बताया कि पहाड़ के ऊपर से जाओगे तो झरना आसानी से पार हो जाएगा। सुबकते हुए संदीप सलवान बताते हैं कि यही उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी भूल थी। उनका बेटा झरना पार करने के चक्कर में कहीं गुम हो गया। जब आगे पहुंचे तो बेटा साथ नहीं था। आसपास खोजा लेकिन कहीं पता नहीं चला।
जिस पहाड़ के पास खड़े होते वही गिर जाता
सुनील ने बताया कि बारिश इतनी तेज थी कि जिस पहाड़ के पास भी वह बचने को खड़े होते थे, वही दरक जाता था। शेल्टर भी टूटकर गिर गया था इसलिए सड़क पर भीगते और जागते हुए ही पूरे परिवार ने रात काटी।
भिखारियों जैसी हो गई थी हालत
झरना पार करने से लेकर जंगलचट्टी में पड़े रहने और भूख में सिलवान परिवार का हाल भिखारियों जैसा हो गया। प्राइवेट हेलीकाप्टर आते थे लेकिन कोई नहीं पूछता था। बाद में आर्मी और एनडीआरएफ के जवान आए। सुनील ने बताया कि अगर वह न होते तो हम भी न होते।