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सरकार नहीं चाहती 'सेव द टाइगर्स'

Fri, 02 Aug 2013 08:37 PM IST
देहरादून/प्रेम प्रताप सिंह
देहरादून/प्रेम प्रताप सिंह Updated Fri, 02 Aug 2013 08:37 PM IST
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departmental idling heavily on the lives of tigers

एक ओर भारत में बाघों की सुरक्षा को लेकर जोर-शोर से नारे लग रहे हैं और केन्द्र सरकार 'सेव द टाइगर्स' का नारा उछाल चिल्ल पौं मचाए हुए है लेकिन इससे उलट उत्तराखंड में बाघों की चिंता किसी को नहीं है।

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दरअसल उत्तराखंड के कार्बेट टाइगर रिजर्व के सोना नदी वन्यजीव विहार से 181 वन गुज्जर परिवारों के विस्थापन को लेकर हाईकोर्ट के सख्त रुख के बावजूद वन विभाग की सुस्ती नहीं टूटी है।
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इन्हें विस्थापित करने के लिए काफी पहले हरिद्वार के सबलगढ़ में भूमि का चयन हो चुका है, लेकिन मामला भूमि के सीमांकन से आगे नहीं बढ़ पाया है। सोना नदी वन्यजीव विहार में गुज्जरों की उपस्थिति से बाघों के लिए खतरा बना हुआ है।
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बाघों के शिकार की बढ़ रही घटनाएं
अक्सर शिकार की घटनाएं सामने आती रही हैं। कारण यह है कि बाघ वन गुज्जरों के पशुओं को निवाला बनाते हैं। इसके बदले में बाघों को मौत के घाट उतार दिया जाता है।

इस संघर्ष को खत्म करने के लिए वन गुज्जरों को काफी पहले हरिद्वार वन प्रभाग के सबलगढ़ रेंज में विस्थापित करने का निर्णय लिया गया था, लेकिन जंगलात महकमे के अधिकारियों की लापरवाही से आज तक यह संभव नहीं हो पाया।

सोया हुआ है जंगलात महकमा
करीब 15 दिन पहले ही हाईकोर्ट ने भी इसको लेकर सख्त रुख अख्तियार किया था। कोर्ट ने दो माह के भीतर इन परिवारों को विस्थापित करने का निर्देश प्रदेश सरकार को दिया है। लेकिन अभी तक जंगलात महकमे में कोई सुगबुगाहट नहीं है।


इनकी भी सुनिए
हरिद्वार के सबलगढ़ में वन गुज्जरों को बसाने के लिए जमीन का सीमांकन किया जा चुका है। अब प्लाटिंग करके जमीन देने की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। कागजों में नक्शा तैयार है।

बारिश के कारण मौके पर गाजर घास की भरमार है, जिसके कारण काम रुका हुआ है। अक्टूबर तक हर हाल में गुर्ज्जरों का पुनर्वास कर दिया जाएगा।
- एसएस शर्मा, मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक/प्रमुख वन संरक्षक वन्यजीव

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