मरहम लगाने की जगह जख्म हरे कर रही मित्र पुलिस
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देहरादून में हुई नितेश जोशी की मौत मामले में पुलिस परिजनों के जख्मों पर मरहम लगाने के बजाय उन्हें हरा करने के आरोप में फंस गई है। पहले दिन से परिजन पुलिस पर उदासीनता का आरोप लगा रहे थे, जो आखिरकार सच भी साबित हुआ।
नितेश मामले में प्रेमनगर, रायपुर और शहर कोतवाली पुलिस में आपसी समन्वय की कमी ही पूरे पुलिस विभाग की फजीहत की वजह बनी। अब इस मामले में दोषी पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की जगह लापरवाही पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।
नितेश की मौत के मामले में एक नहीं तीन थानों की पुलिस उलझी रही। रायपुर थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई गई तो प्रेमनगर क्षेत्र में वह अचेत अवस्था में पाया गया। शहर कोतवाली की दून अस्पताल पुलिस चौकी की देख रेख में उसका उपचार और मौत के बाद उसके पंचायतनामा भरा गया।
इस बीच न तो गुमशुदगी की जांच कर रहे दारोगा को शव की पहचान कराने की सुध आई और न प्रेमनगर और कोतवाली पुलिस ने उसकी पहचान में कोई गंभीरता दिखाई। कागजी कार्रवाई पूरी कर तीनों थानों की पुलिस ने अपना पल्ला झाड़ लिया। अगर तीनों थानों की पुलिस ने गंभीरता दिखाई होती तो परिजनों के प्रयास से बेहतर इलाज मिलने पर उसकी जान बच सकती थी।
मालूम हो कि गुमशुदगी का मामला मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद भी तीनों थानों की पुलिस ने एक बार भी आपस में बात करने की जहमत नहीं उठाई। निसंदेह आखिरी दिनों में पुलिस ने नितेश को बरामद करने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी, लेकिन इस लापरवाही ने पुलिस के सब किए धरे पर पानी फेर दिया है।
ऐसे हुई नितेश की पहचान
पुलिस ने लावारिस शव का फोटो खिंचवाने के बाद उसके पंफलेट तैयार कराए थे, लेकिन तस्वीर धुंधली होने से परिजन भी नितेश को नहीं पहचान सके।
एसपी सिटी अजय सिंह की माने तो शुक्रवार को नितेश के मामा और भाई को शक हुआ तो विवेचक को साथ लेकर पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर और 108 के कर्मियों को नितेश की फोटो दिखाई गई। सब मिलता-जुलता बताते रहे। विवेचक परिजनों को लेकर सीधे डीसीआरबी आफिस पहुंचे, जहां नितेश की फोटो उन्होंने पहचान ली।
विसरा किया संरक्षित
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में नितेश की मौत की वजह साफ नहीं हो सकी है। उसका विसरा संरक्षित कर जांच के लिए भेजा गया है। उसके मुंह से झाग निकलने के कारण जहरीले पदार्थ का सेवन किए जाने की आशंका जताई जा रही थी।
प्रेमिका से बोला, अब नहीं होगी बात
एसपी सिटी की माने तो नितेश की प्रेमिका से पूछताछ में अनहोनी की आशंका जताई जा रही थी, क्याेंकि उसने प्रेमिका को फोन पर अब कभी किसी से बातचीत न होने की बात कही थी। फिर भी तमाम संभावनाओं पर पुलिस काम करती रही।
तीन डॉक्टरों और दारोगा के खिलाफ तहरीर
नितेश जोशी की मौत के मामले में परिजनों ने दून अस्पताल के तीन डॉक्टरों और पुलिस चौकी प्रभारी के खिलाफ तहरीर दी है। उनका आरोप है कि तीन थानों की पुलिस की लापरवाही से जोशी के अंतिम दर्शन भी नहीं हो सके। उन्हाेंने नितेश के साथ अनहोनी की आशंका जताई है।
दून अस्पताल में हंगामे के बाद पीड़ित परिवार ने अधिवक्ता से मंत्रणा कर तहरीर तैयार कराई है। नितेश के रिश्तेदार गजेंद्र का आरोप है कि नितेश के साथ कोई अनहोनी हुई है। आठ से लेकर 10 मार्च वह लगातार नितेश के बारे में जानकारी लेने दून अस्पताल गए, लेकिन हर बार उन्हें नितेश के हुलिए से संबंधित किसी युवक के भर्ती होने से इंकार किया गया।
यदि डॉक्टर लापरवाही नहीं बरतते तो नितेश उन्हें जीवित मिलता। कोतवाली में दून अस्पताल के तीन डॉक्टरों और दून पुलिस चौकी प्रभारी के खिलाफ तहरीर दी जा रही है। प्रेमनगर और रायपुर पुलिस की भूमिका भी संदेह के घेरे में है। दोषियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज अविलंब कार्रवाई की जाए। पिता अर्जुन दत्त जोशी ने भी पुलिस को कटघरे में खड़ा किया है।