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एफआर को लेकर आमने-सामने आए दो दारोगा
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Fri, 11 Mar 2016 07:40 PM IST
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मुकदमा
- फोटो : demo pic
प्रेमनगर क्षेत्र में 2011 में फर्जी रजिस्ट्रेशन पर ट्रक पकड़ने के मामले में लगाई फाइनल रिपोर्ट (एफआर) को दूसरे दारोगा ने कोर्ट में चुनौती दी है।
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विवेचक का कहना है कि ट्रक चोरी की कोई रिपोर्ट नहीं है, इसलिए कोई मामला नहीं बनता है, जबकि दूसरे दारोगा ने उसे धोखाधड़ी का मामला बताया है। इस मामले में सुनवाई के लिए अब 22 मार्च की तिथि मुकर्रर की गई है।
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प्रेमनगर पुलिस ने अक्तूबर 2011 में दो नंबर लिखे ट्रक को पकड़ा था। एक प्लेट पर उत्तराखंड और दूसरी पर हरियाणा का नंबर दर्ज था। इस मामले में दारोगा ने अपनी तरफ से जालसाजी की धारा में मुकदमा दर्ज कर दो लोगों को जेल भेज दिया।
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जांच में एनओसी फर्जी पाई गई:
पहले बताया गया कि ट्रक हरियाणा का है, जो एनओसी के आधार पर देहरादून के आरटीओ आफिस में पंजीकृत किया गया। बाद में जांच में एनओसी फर्जी पाई गई तो उसका रजिस्ट्रेशन रद्द कर दिया गया। चेसिज नंबर भी फर्जी पाया। यह मामला हाईकोर्ट तक गया, लेकिन आरोपी पक्ष को राहत नहीं मिल सकी।
इसी बीच दूसरे विवेचक ने इस मुकदमे पर एफआर लगा दी। तर्क दिया कि इस ट्रक के बारे में चोरी का कोई मुकदमा दर्ज नहीं है, ऐसे में कोई मामला नहीं बनता।
2011 में अभियोग पंजीकृत कराने वाले दारोगा ने एफआर को कोर्ट में चुनौती दी है। बृहस्पतिवार को इस मामले में सुनवाई हुई। एफआर पर आपत्ति दर्ज कराने वाले दारोगा के अधिवक्ता एसपी सिंह ने बताया कि इस मामले में अब 22 मार्च को सुनवाई होगी।