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घमासान के बाद फूंक-फूंक कर कदम रख रही कांग्रेस
ब्यूरो/अमर उजाला, देहरादून
Updated Tue, 22 Mar 2016 10:19 PM IST
सार
समर्थक पर कार्रवाई से पार्टी कमजोर होने की चिंता
खुलकर बागियों से सहानुभूति जताने वाले ही निशाने पर
साकेत को पार्टी से बाहर निकालने में लगाए पूरे तीन दिन किशोर उपाध्याय और हरीश रावत
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किशोर उपाध्याय और हरीश रावत
- फोटो : file photo
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विस्तार
18 मार्च को हुए सियासी घमासान के बाद कांग्रेस हर कदम फूंक-फूंक कर रख रही है। सावधानी का आलम यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे साकेत को पार्टी ने बाहर का रास्ता दिखाने में पूरे तीन दिन का समय लिया।
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बागियों के हर समर्थक को निशाने पर लेने से पार्टी के कमजोर होने का अंदेशा पार्टी को सता रहा है। इस स्थिति को देखते हुए बागी विधायकों के प्रति खुलकर सहानुभूति जता रहे उनके समर्थकों को ही निशाने पर लिया जा रहा है। इस काम को भी अनुशासन समिति को सौंपा गया है।
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कांग्रेस अपनी तरफ से बागी नौ विधायकों के निर्वाचन क्षेत्रों में कांग्रेस की सभी इकाइयों को भंग कर चुकी है। इतना होने पर भी संगठन जिलाध्यक्षों, विधानसभा प्रभारियों, सह प्रभारियों को नहीं छेड़ा गया है।
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पार्टी के एक वरिष्ठ नेता के मुताबिक इस मामले को लेकर पार्टी बदले की भावना के तहत काम करती हुई नहीं दिखना चाहती। साथ ही यह संकेत देना भी जरूरी है कि पार्टी के खिलाफ कदम उठाने वाले हर कांग्रेसी को बख्शा नहीं जाएगा।
चुप रहकर पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों का हो रहा चिह्नीकरण
किशोर उपाध्याय और हरीश रावत
- फोटो : file photo
ऐसे में 18 मार्च के बाद अनुशासन के मामले को लेकर कड़ा रुख अपना लिया गया है। तय किया गया है कि बागी विधायकों का खुलकर समर्थन करने वालों के खिलाफ ही कार्रवाई की जाएगी। चुप रहकर पार्टी को नुकसान पहुंचाने वालों को भी चिह्नित किया जा रहा है।
यह काम अनुशासन समिति को सौंपा गया है और समिति को कहा गया है कि बिना पुख्ता आधार के कार्रवाई न की जाए।
इसके पीछे चिंता यह भी है कि बागी विधायकों के क्षेत्रों में कहीं एक तरफा कार्रवाई से पार्टी को ही नुकसान न हो जाए। कांग्रेस देर सवेर चुनाव में उतरना तय मान रही है।
पार्टी के कायदे कानूनों के तहत ही कार्रवाई को दिया जाएगा अंजाम
इस स्थिति को देखते हुए हर कदम फूंक-फूंक कर उठाया जा रहा है। हाल यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे और कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य साकेत बहुगुणा को पार्टी से निकालने में तीन दिन का समय लगा दिया गया।
पहले साकेत के राजभवन से लेकर बागी विधायकों के साथ शामिल होने के पूरे साक्ष्य जुटाए गए और इसके बाद अगला कदम उठाया गया।
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट के मुताबिक यह स्पष्ट निर्देश हैं कि पूरी कार्रवाई को पार्टी के कायदे कानूनों के तहत ही अंजाम दिया जाए। सियासी घमासान के बाद पार्टी के साथ खड़े कांग्रेसियों को किसी भी रूप में परेशान न करने को कहा गया है।
यह काम अनुशासन समिति को सौंपा गया है और समिति को कहा गया है कि बिना पुख्ता आधार के कार्रवाई न की जाए।
इसके पीछे चिंता यह भी है कि बागी विधायकों के क्षेत्रों में कहीं एक तरफा कार्रवाई से पार्टी को ही नुकसान न हो जाए। कांग्रेस देर सवेर चुनाव में उतरना तय मान रही है।
पार्टी के कायदे कानूनों के तहत ही कार्रवाई को दिया जाएगा अंजाम
इस स्थिति को देखते हुए हर कदम फूंक-फूंक कर उठाया जा रहा है। हाल यह है कि पूर्व मुख्यमंत्री विजय बहुगुणा के बेटे और कांग्रेस कार्यकारिणी के सदस्य साकेत बहुगुणा को पार्टी से निकालने में तीन दिन का समय लगा दिया गया।
पहले साकेत के राजभवन से लेकर बागी विधायकों के साथ शामिल होने के पूरे साक्ष्य जुटाए गए और इसके बाद अगला कदम उठाया गया।
कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष जोत सिंह बिष्ट के मुताबिक यह स्पष्ट निर्देश हैं कि पूरी कार्रवाई को पार्टी के कायदे कानूनों के तहत ही अंजाम दिया जाए। सियासी घमासान के बाद पार्टी के साथ खड़े कांग्रेसियों को किसी भी रूप में परेशान न करने को कहा गया है।