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वार मेमोरियल के भूमि पूजन पर कांग्रेस नदारद
अरुणेश पठानिया/ अमर उजाला, देहरादून
Updated Sun, 01 May 2016 01:23 PM IST
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किशोर उपाध्याय
- फोटो : AmarUjala
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उत्तराखंड के शहीद सैनिकों के सम्मान में बनने वाला वार मेमोरियल पर भाजपा की सियासी चतुराई के आगे आखिरकार कांग्रेस चित हो गई।
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रक्षा मंत्री मनोहर परिकर ने शनिवार को भाजपा के मैगा शो के बीच वार मेमोरियल की नींव उसी भूमि पर रखी, जिसे दिमाग में रखकर वर्ष 2009 में इसकी परिकल्पना हुई थी। चुनावी साल में भाजपा ने वर्षों से अटके मेमोरियल का सपना पूरा करके फौजियों के बीच अपना कद बढ़ाया है। वहीं कांग्रेस की चार वर्षों से चल रही कोशिशों पर पानी फेर दिया। शौर्य स्थल को भले सियासत से जोड़ने को सियासतदां उचित नहीं मानते, लेकिन सात बरसों में जो कुछ भी घटा उसमें सियासत ही सियासत नजर आई।
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सरकारों में मेमोरियल के लिए रही प्रतिस्पर्धा के भले कई कारण हैं पर इनमें प्रमुख दस लाख का वोट बैंक है जो सीधे तौर पर सैन्य परिवारों से जुड़ा है। स्टेट वार मेमोरियल के निर्माण के लिए भूमि की तलाश वर्ष 2009 में तत्कालीन भाजपा सरकार के समय से शुरू हुई थी। चीड़ बाग में मेमोरियल बनाने से हुई शुरूआत तीन बरस में कई बार बदली। वर्ष 2012 में जब कांग्रेस को सत्ता मिली तो उन्होंने भाजपा से एक कदम आगे बढ़कर इसके निर्माण का बेड़ा उठाया।
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पर कांग्रेस की राह का रोड़ा भूमि बन गई। तीन वर्ष तक इस मामले में प्रगति नहीं होने पर प्रदेश में दोनों पार्टियां इस मामले पर बराबरी में थीं। लेकिन पासा तब पलटा जब भाजपा सांसद तरुण विजय ने मुद्दा रक्षा मंत्रालय के समक्ष रखा। केंद्र की भाजपा ने बेहद चतुराई से मौके को लपका और चीड़ बाग स्थित जिस भूमि के लिए भाजपा-कांग्रेस कई बार प्रयास करती रही उसे रक्षा मंत्रालय सांसद की पहल पर देने को तैयार हो गया।
उधर, हरीश रावत सरकार ने 26 जुलाई को भूमि चिह्निकरण के लिए तीन सदस्यीय कमेटी बना दी। सैन्य भूमि हस्तांतरण के लिए लगने वाला लंबा समय कुछ महीनों में ही निपटा दिया गया। कांग्रेस पहले बैकफुट पर आई पर बाद उन्होंने अपने स्तर पर वार मेमोरियल निर्माण का नया वादा कर दिया। दो वॉर मेमोरियल बनाने तक की खींचतान चली, लेकिन आखिरकार चीड़ बाग में बनने वाले वार मेमोरियल पर भूमि फाइनल होने के बाद कांग्रेस बैकफुट पर आ गई। राज्य सरकार के भरसक प्रयासों के बीच केंद्र ने बाजी प्रदेश भाजपा के पाले में डाल दी। अब शौर्य स्थल की नींव रखी गई तो उसमें कांग्रेस नेताओं की गैर मौजूदगी ने सियासी चर्चाओं को और हवा दे दी है।
स्मारक निर्माण पर अब तक हुई कोशिश
- स्टेट वार मेमोरियल के लिए 2009 में सर्वप्रथम चीड़बाग सैन्य भूमि चयनित।
- रक्षा मंत्रालय से भूमि स्वीकृति का मामला दो वर्ष तक अधर में लटका रहा।
- वर्ष 2011 में सर्वे आफ इंडिया की चयनित 10.4 हेक्टेयर भूमि प्रस्ताव पर एनओसी नहीं मिली।
- वर्ष 2012 में ग्राम डांडा लखौड़ में 1.6 हैक्टेयर आवंटित भूमि उपयुक्त नहीं पाई गई।
- वर्ष 2013 में पुरानी जेल के पास चयनित भूमि का प्रस्ताव बाद में हुआ खारिज।
- वर्ष 2014 में गठित भूमि चयन समिति की सिफारिशों को किया खारिज।
- वर्ष 2015 में सीएम ने भूमि चयन के लिए नए सिरे से कमेटी बनाई।
- दिसंबर 2015 में चीड़ बाग में एक एकड़ भूमि छावनी परिषद को हस्तांतरित की गई।