{"_id":"75edc7bd41029b4be0e4915a10a96055","slug":"closure-of-the-law-to-bear-on-the-british-government-period","type":"story","status":"publish","title_hn":"'गंगा' और 'हरकी पैड़ी' दोनों हैं ब्रिटिश की गुलाम!","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
'गंगा' और 'हरकी पैड़ी' दोनों हैं ब्रिटिश की गुलाम!
अमर उजाला, हरिद्वार
Updated Fri, 18 Oct 2013 05:25 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
21वीं शताब्दी के स्वतंत्र भारत में भी ब्रिटिश काल के कानून ढोए जा रहे हैं। जन विरोध के बावजूद दशकों पुरानी लकीर पिट रही है और दासता काल में अंग्रेजों द्वारा थोपा गया क्लोजर का कानून आज भी बरकरार है।
विज्ञापन
इस क्लोजर को केवल इन्हीं 20 दिनों के पर्व काल में ढोते रहना विवशता बन गया है। महामना के नेतृत्व में हुए आंदोलन में ब्रिटिश सरकार हारी और हरिद्वार के पुरोहित जीते, बांध न बन पाया।
विज्ञापन
तस्वीरों में देखें...हर की पैड़ी से क्यों 'रूठ' गई गंगा मैय्या?
विज्ञापन
परचम सारी दुनियां में लहराया
वर्ष 1926 के कुंभ मेले में महामना के नेतृत्व में फिर से हरकी पैड़ी पर अधिकारियों और पुलिस द्वारा चमड़े की बेल्ट लगाकर जाने का विरोध किया गया, जिसमें अंग्रेजों की दूसरी हार हुई।
वर्ष 1935 में जब ब्रिटिश सरकार ने गंगा घाटों पर चल रही कथा पर प्रतिबंध लगाना चाहा, तब फिर पुरोहितों और महामना ने आंदोलन कर उस ब्रिटिश सत्ता को परास्त किया, जिसका परचम सारी दुनियां में लहराता था।
पढें, 'मोदी की आंधी में उखड़ जाएगा कांग्रेस का तंबू'
कुपित अंग्रेजों ने 1938 के कुंभ के बाद पहली बार दशहरे और दीपावली के बीच गंगा क्लोजर करने की घोषणा की। हरिद्वार में गंगा से नहर 1856 में प्रारंभ हुई थी। उसके बाद से नहर की सफाई जनवरी-फरवरी में होती आई थी।
ब्रिटिश ने पर्व काल में क्लोजर घोषित किया
जनता से बार-बार हारने का दंड देने के लिए ब्रिटिश सल्तनत ने पर्व काल में क्लोजर घोषित किया। अपनी लाज बचाने को एक शर्त अवश्य रख दी कि क्लोजर से पूर्व गंगा सभा की अनुमति अवश्य ली जाएगी।
आजादी के बाद इसका अर्थ समाप्त हो गया है, अलबत्ता अनुमति आज भी ली जाती है। ब्रिटिश काल का वह क्लोजर स्वतंत्र भारत में आज भी यथावत पर्व काल में कायम है। जनविरोध का कोई असर उत्तर प्रदेश की सत्ता पर कभी नहीं पड़ा।
पढें, साथ चल रहे हैं राहू और शनि, बढेंगी आपदा की घटनाएं
इनकी भी सुनिएः
ब्रिटिश हुकूमत को हरिद्वार के पुरोहितों से सदैव मात खानी पड़ी है। पर्व काल का क्लोजर गुलामी के दौर की देन है। स्वतंत्रता मिलने के बाद वह होना चाहिए जो जनता चाहती है। समय की मांग है कि गंगा क्लोजर दीपावली के बाद किया जाए।
- गांधीवादी पुरुषोत्तम शर्मा, कार्यकारी अध्यक्ष गंगा सभा
उत्तराखंड में जब भाजपा की सरकार थी, तब सरकार ने इस क्लोजर का कड़ा विरोध किया था। सचिव स्तर की बैठकें आयोजित कर निर्णय कराया था कि हरकी पैड़ी पर संपूर्ण स्नान योग्य जल बना रहेगा। भाजपा के शासन में ऐसा होता भी रहा। दुर्भाग्य का विषय है कि नई सत्ता इस दिशा में कुछ भी न करा पाई।
- मदन कौशिक, विधायक एवं पूर्व मंत्री