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Champawat News: किसी भी थाने में करा सकते हैं जीरो एफआईआर
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टनकपुर कोतवाली में नए कानूनों को संबंध में पुलिस अधिकारियों की बैठक लेते सीओ शिवराज सिंह राणा
टनकपुर(चंपावत)। सीओ शिवराज सिंह राणा ने टनकपुर कोतवाली और बनबसा थाने के पुलिस अधिकारियों को नए कानूनों की जानकारी दी। उन्होंने विवेचकों से सभी पुलिस कर्मियों को नए कानूनों के प्रति जागरूक करने के निर्देश दिए। साथ ही आईओ एप के बारे में भी जानकारी दी।
रविवार को सीओ राणा ने बताया कि एक जुलाई से लागू नए कानून में बच्चों से अपराध करवाना और उन्हें आपराधिक कृत्यों में शामिल करना दंडनीय अपराध है। नाबालिग बच्चों की खरीद-फरोख्त के जघन्य अपराध में शामिल नाबालिग से दुष्कर्म के लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है।। अभिभावक की मौजूदगी में पीड़िता का बयान दर्ज किया जाएगा। महिलाओं के खिलाफ अपराध होने पर और सख्ती होगी। सामूहिक दुष्कर्म के लिए 20 साल की कैद, आजीवन कारावास, यौन संबंध के लिए झूठा वादा करना या पहचान छिपाना अब अपराध होगा। नए कानूनों में तलाशी और गिरफ्तारी के दौरान वीडियोग्राफी जरूरी है।
90 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को जांच रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य है। गिरफ्तार व्यक्ति के बारे में जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के तीन दिन बाद थाने जाकर हस्ताक्षर कर सकेंगे। 90 दिनों के भीतर आरोप दायर होने पर मामले के समापन के 45 दिनों के भीतर निर्णय। दस्तावेजों में डिजिटल और तकनीकी रिकॉर्ड शामिल है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालतों में पेशी संभव होगी। सिविल सेवकों के खिलाफ मामलों में 120 दिनों में निर्णय, छोटे और कम गंभीर मामलों के लिए समरी ट्रायल, पहली बार अपराध करने पर हिरासत अवधि कम, एक तिहाई सजा पूरी होने पर जमानत होगी।
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रविवार को सीओ राणा ने बताया कि एक जुलाई से लागू नए कानून में बच्चों से अपराध करवाना और उन्हें आपराधिक कृत्यों में शामिल करना दंडनीय अपराध है। नाबालिग बच्चों की खरीद-फरोख्त के जघन्य अपराध में शामिल नाबालिग से दुष्कर्म के लिए आजीवन कारावास या मृत्युदंड का प्रावधान है।। अभिभावक की मौजूदगी में पीड़िता का बयान दर्ज किया जाएगा। महिलाओं के खिलाफ अपराध होने पर और सख्ती होगी। सामूहिक दुष्कर्म के लिए 20 साल की कैद, आजीवन कारावास, यौन संबंध के लिए झूठा वादा करना या पहचान छिपाना अब अपराध होगा। नए कानूनों में तलाशी और गिरफ्तारी के दौरान वीडियोग्राफी जरूरी है।
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90 दिन के भीतर शिकायतकर्ता को जांच रिपोर्ट सौंपना अनिवार्य है। गिरफ्तार व्यक्ति के बारे में जानकारी सार्वजनिक करनी होगी। इलेक्ट्रॉनिक माध्यम से शिकायत दर्ज कराने के तीन दिन बाद थाने जाकर हस्ताक्षर कर सकेंगे। 90 दिनों के भीतर आरोप दायर होने पर मामले के समापन के 45 दिनों के भीतर निर्णय। दस्तावेजों में डिजिटल और तकनीकी रिकॉर्ड शामिल है। वीडियो कांफ्रेंसिंग के माध्यम से अदालतों में पेशी संभव होगी। सिविल सेवकों के खिलाफ मामलों में 120 दिनों में निर्णय, छोटे और कम गंभीर मामलों के लिए समरी ट्रायल, पहली बार अपराध करने पर हिरासत अवधि कम, एक तिहाई सजा पूरी होने पर जमानत होगी।
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