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कठुवापाती में सिडकुल से युवाओं के सपनों को लगेंगे पंख

Wed, 19 Jul 2017 11:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो टनकपुर/बनबसा (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो टनकपुर/बनबसा (चंपावत)। Updated Wed, 19 Jul 2017 11:24 PM IST
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Wings of young people from cadducal
बनबसा का गैरआबाद गांव कठुवापाती, जहां किया गया है प्लांटेशन। - फोटो : अमर उजाला

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विधायक कैलाश गहतोड़ी ने चुनाव से पहले और चुनाव के दौरान क्षेत्र के बेरोजगार युवाओं से जो वादा किया था, वह पूरा होने की उम्मीद जगी है। गहतोड़ी ने कहा था कि अगर वह चुनाव जीते और प्रदेश में भाजपा की सत्ता आई तो बनबसा के कठुवापाती स्थित सरकारी भूमि पर सिडकुल की स्थापना कराएंगे। मंगलवार को जिले के पहले दौरे पर आए मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत सिडकुल स्थापना की घोषणा कर विधायक के वादे पर मुहर लगा गए हैं।

औद्योगिक लिहाज से चंपावत जिला काफी पिछड़ा है। रोजगार के साधन न होने से युवा अन्य शहरों की ओर दौड़ते हैं, लेकिन मंगलवार को मुख्यमंत्री की सिडकुल स्थापना की घोषणा से लग रहा है कि अब परिस्थितियां बदलेगी। प्रदेश के औद्योगिक नक्शे में चंपावत जिले का भी नाम शामिल होगा। कठुवापाती की जिस भूमि पर सिडकुल स्थापित करने की घोषणा की गई है, वह बनबसा के पश्चिमी छोर में राजस्व गांव है जो वर्ष 1960 तक आबाद था और वर्ष 1965 के आसपास पूरी तरह से खाली हो गया। वर्तमान में यह गांव गैर आबाद है और यूकेलिप्टस का प्लांटेशन लगा है। जानकारों का मानना है कि इस भूमि पर करीब दस बड़े उद्योग स्थापित हो सकते हैं, जिनमें क्षेत्र के सैकड़ों युवाओं को रोजगार मुहैया होगा।
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वहीं, कठुवापाती में सिडकुल स्थापित करने को लेकर की गई घोषणा का बनबसा वासियों ने स्वागत किया है। जिला पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष और वर्ष 1982 में चंदनी के ग्रामप्रधान रहे बहादुर सिंह पाटनी बताते हैं कि कठुवापाती थारु जनजाति का गांव था। धीरे-धीरे वहां से उन्होंने पलायन करना शुरू कर दिया था। इस खाली पडे़ गांव की भूमि पर 70 के दशक में पूर्वी तराई वन प्रभाग ने यूकेलिप्टस का प्लांटेशन कर दिया। एसडीएम एके चन्याल के अनुसार कठुवापाती में करीब 700 बीघा भूमि है। इस पर सिडकुल स्थापित होने से चंदनी, आनंदपुर गांव के साथ ही क्षेत्र का विकास संभव होगा। पूर्व जिपं उपाध्यक्ष पाटनी समेत व्यवसायी पवन मित्तल, व्यापार मंडल अध्यक्ष संजय अग्रवाल, राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त से.नि. प्रधानाचार्य बंशीधर उपाध्याय, बीडीसी सदस्य पुष्कर कापड़ी, पूर्व सैनिक कल्याण समिति अध्यक्ष कै. भानी चंद आदि ने मुख्यमंत्री की बनबसा में सिडकुल स्थापित करने की घोषणा को सराहनीय बताया।
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बनबसा में सिडकुल बनाने से रोजगार मिलेगा
पिथौरागढ़। जिला सैनिक कल्याण परिषद के सदस्य एवं पूर्व सैन्य अधिकारी नरेंद्र चंद ने बनबसा में सिडकुल की स्थापना का स्वागत किया है। कहा कि इससे रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और पहाड़ के युवाओं को अपने घर के नजदीक ही रोजगार मिल जाएगा। मुख्यमंत्री ने मंगलवार को टनकपुर और बनबसा के दौरे के समय सिडकुल की स्थापना का ऐलान किया था, इसका व्यापक स्तर पर स्वागत हुआ है। उन्होंने कहा कि पहाड़ पर रोजगार के कोई साधन नहीं हैं। इस कारण यहां के युवा मुंबई, दिल्ली, कोलकाता, बंगलूरू, रुद्रपुर जाते हैं। बनबसा में सिडकुल बनने पर उसका फायदा चंपावत और पिथौरागढ़ जिले के लोगों को ज्यादा मिलेगा। उन्होंने यह भी कहा कि सेना प्रमुख द्वारा पूर्व सैनिकों के लिए होम स्टे योजना को लागू करना बहुत अच्छा कदम है। पहाड़ के कई पूर्व सैनिक होम स्टे योजना से जुड़ सकते हैं और रोजगार की दिशा में काम कर सकेंगे।
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