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Champawat News: पहले सूखा फिर बारिश ने फसल को किया बर्बाद

Tue, 04 Apr 2023 11:27 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत Updated Tue, 04 Apr 2023 11:27 PM IST
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weather hit farmers
बनबसा के फागपुर के किसान मदन सामंत काली पड़ गई गेहूं की फसल को देखते। संवाद

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चंपावत/टनकपुर/बनबसा। नवंबर से फरवरी तक सूखे की स्थिति और फिर मार्च से हुई बारिश ने खेती को नुकसान पहुंचाया है। खासकर गेहूं की फसल को भारी नुकसान होने का अंदेशा है लेकिन अभी नुकसान का सर्वे पूरा नहीं हो सका है।


चंपावत जिले में 4657 हेक्टेयर में गेहूं की खेती की गई है। पहाड़ में गेहूं की बुवाई देर से होने से फसल अभी पकी नहीं है जबकि जिले की 80 प्रतिशत गेहूं की पैदावार मैदानी क्षेत्र में होती है। यहां फसल तैयार है लेकिन 20 मार्च से अब तक हुई 35 मिलीमीटर बारिश ने गेहूं पर अधिक मार की है।
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काश्तकारों की पीड़ा:
किसानों का कहना है कि बारिश की वजह से गेहूं की फसल को भारी नुकसान का अंदेशा है। किसान सर्वे के साथ ही मुआवजे की मांग कर रहे हैं। ज्ञानखेड़ा की सुशीला देवी कहती हैं कि चार बीघा में गेहूं की फसल लगाई थी। पहली बारिश में आधी फसल जमीन पर गिरने के साथ काली पड़ गई है। खराब मौसम से कटाई भी नहीं हो पा रही है। अभी तक विभाग की ओर से कोई सर्वे भी नहीं किया गया है। फागपुर के किसान मदन सामंत का कहना है कि बारिश से गेहूं की बालियां गिर गई हैं, जो बची हैं वह काली पड़ गई है जिससे किसानों को तगड़ा झटका लगा है। ऐसे ही हाल ढेरों अन्य किसानों के भी हैं।
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सर्वे रिपोर्ट के बाद होगी नुकसान की भरपाई: सीएओ
चंपावत। मुख्य कृषि अधिकारी गोपाल सिंह भंडारी का कहना है कि मैदानी क्षेत्र में गेहूं की फसल को नुकसान हुआ है। कितना नुकसान हुआ है, इसका सर्वे कराया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट के बाद नुकसान की भरपाई के लिए कदम उठाए जाएंगे।


बेमौसमी बारिश ने गेहूं की पकी फसल को कटने नहीं दिया। फसल कटने के बाद तीन दिन सुखाने के लिए तेज धूप चाहिए। थ्रेसर लगाने के लिए गेहूं सूखा होना जरूरी है।
- सुंदर सिंह, थ्वालखेड़ा।

गहरी जमीन में बोए गेहूं को काफी नुकसान हुआ है। 20 से 25 प्रतिशत तक फसल बर्बाद हो चुकी है। आगे क्या होगा इंद्रदेव के मिजाज पर निर्भर करेगा।
- कैप्टन वीरेंद्र रजवाड़, देशी फार्म, बनबसा
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