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स्रोतों में 60 फीसदी तक गिरा पानी
ब्यूराे/अमर उजाला, चंपावत
Updated Sun, 03 Apr 2016 10:39 PM IST
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गर्मी के साथ ही नगर और ग्रामीण क्षेत्रों जल संकट भी बढ़ने लगा है। नगर के लोगों को अब भी हर चौथे दिन पानी बांटा जा रहा है। पेयजल स्रोतों के पानी में 60 फीसदी तक गिरावट आ गई है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोग पेयजल के लिए नौलों और गधेरों पर ही निर्भर होते जा रहे हैं।
पुलहिंडोला क्षेत्र में पेयजल के लिए हाहाकार मचा है। लोग पानी के लिए रतजगा भी कर रहे हैं। छह में से तीन हैंडपंप खराब पड़े हैं, जबकि बाकी बचे तीन में से दो हैंडपंप से लाल पानी आ रहा है। जल निगम द्वारा लगाए जा रहे ट्यूबवेल के लिए फिलहाल खुदाई की जा रही है। काम की धीमी गति पर ग्रामीणों ने रोष जताया है। बनगांव के लिए निर्मित पेयजल योजना पूरी तरह सूख चुकी है। पेयजल संकट से निपटने के लिए लोग गांवों में कुआं खुदवाने लगे हैं। रायनगर चौड़ी की बनगांव पेयजल योजना का जलस्तर भी कम हो गया है। कलीगांव के सेरीगैर मोहल्ले, खूनाबोरा, फोर्ती आदि स्थानों पर भी संकट बढ़ गया है।
चंपावत। जिला मुख्यालय में भी पानी की किल्लत ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ दी है। चंपावत में 31 मार्च से एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति की जा रही है। वहीं संकटग्रस्त इलाकों में टैंकरों से पानी दिया जा रहा है। जल संस्थान चंपावत के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि जल स्रोतों में गिरावट लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि 14.8 लाख लीटर के स्थान पर अब करीब महज चार लाख लीटर पानी ही मिल रहा है। मांडेक्स हैंडपंप में भी पानी कम हो रहा है।
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पुलहिंडोला क्षेत्र में पेयजल के लिए हाहाकार मचा है। लोग पानी के लिए रतजगा भी कर रहे हैं। छह में से तीन हैंडपंप खराब पड़े हैं, जबकि बाकी बचे तीन में से दो हैंडपंप से लाल पानी आ रहा है। जल निगम द्वारा लगाए जा रहे ट्यूबवेल के लिए फिलहाल खुदाई की जा रही है। काम की धीमी गति पर ग्रामीणों ने रोष जताया है। बनगांव के लिए निर्मित पेयजल योजना पूरी तरह सूख चुकी है। पेयजल संकट से निपटने के लिए लोग गांवों में कुआं खुदवाने लगे हैं। रायनगर चौड़ी की बनगांव पेयजल योजना का जलस्तर भी कम हो गया है। कलीगांव के सेरीगैर मोहल्ले, खूनाबोरा, फोर्ती आदि स्थानों पर भी संकट बढ़ गया है।
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पेयजल ने बिगाड़ दी दिनचर्या
चंपावत। जिला मुख्यालय में भी पानी की किल्लत ने लोगों की दिनचर्या बिगाड़ दी है। चंपावत में 31 मार्च से एक दिन छोड़कर पेयजल आपूर्ति की जा रही है। वहीं संकटग्रस्त इलाकों में टैंकरों से पानी दिया जा रहा है। जल संस्थान चंपावत के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि जल स्रोतों में गिरावट लगातार बढ़ रही है। उनका कहना है कि 14.8 लाख लीटर के स्थान पर अब करीब महज चार लाख लीटर पानी ही मिल रहा है। मांडेक्स हैंडपंप में भी पानी कम हो रहा है।
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