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अब बिजली के काम में सुस्ताई से पंपिंग योजना में देरी
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चंपावत। नगर और आसपास के क्षेत्रों के लोगों की पेयजल किल्लत से निजात दिलाने वाली क्वैराला पेयजल योजना में बिजली के काम में सुस्ती भारी पड़ रही है।
योजना समय पर पूरा होना तो दूर, बल्कि काम पूरा होने का वक्त लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। अब योजना को इस साल जून तक यानी 51 दिन बाद पूरा करने की बात कही जा रही है।
चंपावत क्षेत्र को 30 वर्ष तक पेयजल देने के लिए 2015 में मंजूर 30.88 करोड़ रुपये की क्वैराला पेयजल योजना में सिविल कार्य से संबंधित अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है।
टैंक, पाइप लाइन, पावर हाउस, ट्रीटमेंट प्लांट का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। पेयजल निगम के ईई वीके जोशी का कहना है कि अभी दो करोड़ रुपये मिलना बाकी है।
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बिजली से संबंधित काम चल रहा है। उम्मीद है कि योजना को जून 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। वैसे इस योजना को 2019 में पूरा होना था लेकिन कई बार काम पूरा होने की तिथि अलग-अलग वजहों से आगे खिसकानी पड़ी।
गर्मियों में एक-चौथाई पानी मिलना भी हो रहा मुश्किल
चंपावत। कांग्रेस की सरकार के दौरान शुरू क्वैराला पंपिंग योजना क्षेत्र के लिए कितनी जरूरी है, इसकी बानगी बस ये आंकड़े देते हैं। चंपावत में गर्मी में ही नहीं, जाड़ों में भी लोगों को जरूरत का दो-तिहाई पानी मुश्किल से मिल पाता है। जबकि गर्मी में तो हाल बेहद गंभीर हो जाते हैं। इस अवधि में तो बमुश्किल एक-चौथाई पानी मिल पा रहा है।
चंपावत में इस वक्त मुश्किल से 5.50 लाख लीटर पानी रोजाना मिल पा रहा है। जबकि जरूरत 23.60 लाख लीटर की है। इसके चलते लोग प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप, नौलों पर आश्रित हैं।
जरूर गर्मियों में जल संस्थान टैंकर और पिकअप के जरिए पेयजल आपूर्ति कर छिटपुट मदद करता है। नागरिकों का कहना है कि ये योजना वक्त पर बनती तो लोगों को पानी के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता।
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योजना समय पर पूरा होना तो दूर, बल्कि काम पूरा होने का वक्त लगातार आगे बढ़ता जा रहा है। अब योजना को इस साल जून तक यानी 51 दिन बाद पूरा करने की बात कही जा रही है।
चंपावत क्षेत्र को 30 वर्ष तक पेयजल देने के लिए 2015 में मंजूर 30.88 करोड़ रुपये की क्वैराला पेयजल योजना में सिविल कार्य से संबंधित अधिकांश कार्य पूरा कर लिया गया है।
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टैंक, पाइप लाइन, पावर हाउस, ट्रीटमेंट प्लांट का काम पहले ही पूरा किया जा चुका है। पेयजल निगम के ईई वीके जोशी का कहना है कि अभी दो करोड़ रुपये मिलना बाकी है।
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बिजली से संबंधित काम चल रहा है। उम्मीद है कि योजना को जून 2021 तक पूरा कर लिया जाएगा। वैसे इस योजना को 2019 में पूरा होना था लेकिन कई बार काम पूरा होने की तिथि अलग-अलग वजहों से आगे खिसकानी पड़ी।
गर्मियों में एक-चौथाई पानी मिलना भी हो रहा मुश्किल
चंपावत। कांग्रेस की सरकार के दौरान शुरू क्वैराला पंपिंग योजना क्षेत्र के लिए कितनी जरूरी है, इसकी बानगी बस ये आंकड़े देते हैं। चंपावत में गर्मी में ही नहीं, जाड़ों में भी लोगों को जरूरत का दो-तिहाई पानी मुश्किल से मिल पाता है। जबकि गर्मी में तो हाल बेहद गंभीर हो जाते हैं। इस अवधि में तो बमुश्किल एक-चौथाई पानी मिल पा रहा है।
चंपावत में इस वक्त मुश्किल से 5.50 लाख लीटर पानी रोजाना मिल पा रहा है। जबकि जरूरत 23.60 लाख लीटर की है। इसके चलते लोग प्यास बुझाने के लिए हैंडपंप, नौलों पर आश्रित हैं।
जरूर गर्मियों में जल संस्थान टैंकर और पिकअप के जरिए पेयजल आपूर्ति कर छिटपुट मदद करता है। नागरिकों का कहना है कि ये योजना वक्त पर बनती तो लोगों को पानी के लिए इधर-उधर नहीं भटकना पड़ता।