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Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Vivekananda Vidya Mandir takes up the talent with feathers

विवेकानंद विद्या मंदिर में लगते हैं प्रतिभा को पंख

Tue, 30 May 2017 10:24 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत Updated Tue, 30 May 2017 10:24 PM IST
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जिले में 104 सरकारी हाइस्कूल और इंटरमीडिएट कॉलेज हैं, लेकिन अधिकांश मौकों पर प्रदेश की मेरिट में जगह विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज ही बनाता रहा है। इस साल का परीक्षा परिणाम हो, या बीते तीन वर्षों के, हर बार मेरिट में विवेकानंद विद्या मंदिर भी शामिल रहा। 2017 में भी हाइस्कूल में यहां के हिमांशु गहतोड़ी प्रदेश की मेरिट में आए। सीमित संसाधनों के बावजूद बेहतर पढ़ाई कराने के जज्बे से ये मुमकिन हो पाया है।

विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज के प्रधानाचार्य डा.मदन पाल बताते हैं कि बेहतर नतीजों के लिए हाइस्कूल एवं इंटरमीडिएट के छात्रों को पहले दिन से ही बोर्ड परीक्षा के डर से निजात दिलाई जाती है। छमाही के परिणाम के बाद अधिक नंबर लाने वाले और कम अंक लाने वालों की श्रेणी बनाई जाती है। कमजोर और मेधावी बच्चों को श्रेणीबद्ध कर उनकी जरूरत के हिसाब से पढ़ाया जाता है। छमाही के परीक्षा परिणाम के बाद आचार्य रिजल्ट लेकर छात्र-छात्राओं के घर जाते हैं और अभिभावकों को भी कमियों को दूर करने के लिए सुझाव देते हैं। अवकाश में अतिरिक्त कक्षाओं के जरिए भी उनकी कमियों को दूर किया जाता है।
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गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने में लोहाघाट विद्या मंदिर सफल
लोहाघाट (चंपावत)। उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में सफलता के शिखर पर झंडा गाड़ने वाले विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कॉलेज छात्र-छात्राओं को गुणवत्तायुक्त शिक्षा देने में सफल रहा है। प्रधानाचार्य जगदीश पांडेय बताते हैं कि छात्रों पर नजर रखने के साथ उनकी कमियों को दूर करने के तरीके से यहां के छात्र आगे रहते हैं। 2007 में हाइस्कूल बोर्ड परीक्षा में छह छात्रों ने टॉप-20 में जगह बनाई। दीपक पालीवाल ने प्रदेश में चौथा, अक्षय कुमार भट्ट ने सातवां,  विवेक पांडेय ने 13वां, परवीन फातिमा एवं योगेश कुमार सिंह ने 16वां और अभिषेक कुमार सिंह ने 18वां स्थान हासिल किया। 2011 में वैभव कांडपाल ने प्रदेश में आठवां स्थान प्राप्त किया। 2013 में नितिन जोशी ने 11वां, प्रकाश मेहता ने 14वां, नीरज जुकरिया ने 15वां, साक्षी गड़कोटी ने 24वां स्थान हासिल किया। 2015 में वाग्मी शर्मा ने प्रदेश में पांचवां स्थान प्राप्त किया था।
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2009 में इंटरमीडिएट बोर्ड परीक्षा में दीपक पालीवाल ने प्रदेश में तीसरा स्थान हासिल किया। 2010 में धीरज बिनवाल ने प्रदेश में 15वां, दिग्विजय जोशी ने 19वां, 2013 में वैभव कांडपाल ने प्रदेश में दूसरा, 2015 में दीपक अधिकारी ने 19वां, 2016 में अनुभा ओली ने प्रदेश में 18वां और विनीत कांडपाल ने 20वां स्थान प्राप्त किया था। विद्यालय का परीक्षाफल हर वर्ष 90 प्रतिशत से अधिक रहता है। यहां के कई मेधावी छात्र डॉक्टर, सैन्य अधिकारी व इंजीनियर बन चुके हैं। वहीं दीपक पालीवाल का चयन भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान केंद्र (इसरो) में वैज्ञानिक के पद पर हुआ है। इसके अलावा कई छात्र-छात्राएं डॉक्टर, सैन्य अधिकारी, इंजीनियर बनकर देश सेवा में जुटे हुए हैं।


हिमानी ने छमाही के बाद पुनरावृत्ति पर जोर दिया
चंपावत। भिंगराड़ा राजकीय इंटर कॉलेज की हिमानी भट्ट ने पिछले वर्ष हाइस्कूल की बोर्ड परीक्षा में 93 प्रतिशत नंबरों के साथ जिले में प्रथम स्थान हासिल किया। दूरस्थ स्कूल भिंगराड़ा की छात्रा के अव्वल आने की वजह स्कूल के शैक्षिक माहौल के बजाय अपनी मेहनत थी। इस वक्त ग्यारहवीं में पढ़ रही हिमानी बताती है कि उसने बोर्ड परीक्षा में बेहतरीन परिणाम के लिए रणनीति अपनाई। मां मुन्नी देवी और पिता सतीश चंद्र भट्ट खुद बहुत पढ़े-लिखे नहीं होने से पढ़ाने में सीधी मदद नहीं कर पाते थे, लेकिन उसे पढ़ने के लिए प्रेरित खूब करते थे। उसे उठाने से लेकर समय-समय पर चाय पिलाते थे। तड़के तीन बजे उठकर करीब चार घंटे पढ़ने को आदत में शुमार किया। पढ़ने-लिखने-दोहराने (थ्री आर) पर खास ध्यान देती थीं। हिमानी का कहना है कि छमाही के बाद उसने पुनरावृत्ति पर खास जोर दिया। परीक्षा में आने वाले प्रश्नपत्रों का उसी तरीके से अभ्यास करती थी। हिमानी ने न ट्यूशन लिया।


इंटर के जिला टॉपर राजेंद्र सिंह महर
चंपावत। उत्तराखंड बोर्ड 2016 में इंटरमीडिएट में जिले के टॉपर राजेंद्र सिंह महर ग्रामीण पृष्ठभूमि के छात्र थे। पढ़ने के लिए वे खेतीखान से चंपावत विवेकानंद विद्यामंदिर इंटर कॉलेज आए। मां गोविंदी देवी के खेतीखान में होने और पिता खीम सिंह महर के पुलिस की नौकरी में होने से पढ़ाई को लेकर सीधे तौर पर मार्गदर्शन कम ही मिल पाता था, लेकिन घर वाले राजेंद्र को अच्छे नंबर लाने के लिए मेहनत करने को फोन के जरिए नियमित रूप से नसीहत देते थे। राजेंद्र बताते हैं कि उसने घर में देर रात जागकर खूब पढ़ाई की। दो विषयों का ट्यूशन भी लिया, लेकिन सबसे अधिक मदद उसे अपने स्कूल से मिली। प्रधानाचार्य डा.मदन पाल और कठिन विषयों को पढ़ाने वाले आचार्यों ने कक्षा के अलावा भी जब चाही उसे मदद दी। जाड़ों के अवकाश में अतिरिक्त कक्षाओं से उसका आत्मविश्वास बढ़ा।

 
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