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स्कूल जाने को प्रेरित कर रही कन्याधन योजना
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
Updated Mon, 18 Jan 2016 10:57 PM IST
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समाज कल्याण विभाग की ओर से संचालित गौरा देवी कन्याधन योजना ने बालिकाओं को स्कूल जाने के लिए प्रेरित किया है। वर्ष 2006 में सरकार ने बालिका शिक्षा को बढ़ावा देेने के लिए कन्याधन योजना शुरू की, जिसमें इंटरमीडिएट उत्तीर्ण करने पर उन्हें 25 हजार रुपये सरकार की ओर से बतौर एफडी दी जाने लगी। वर्ष 2014 से यह राशि दोगुनी कर 50 हजार कर दी गई।
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यह धनराशि बालिकाओं के विवाह में काम आने लगी। शुरुआती तौर पर यह योजना केवल बीपीएल परिवारों के लिए थी, बाद में जनप्रतिनिधियों की ओर से इसे वार्षिक आय पर आधारित योजना बना दिया गया, जिसमें ग्रामीण क्षेत्रों के लिए 15976 एवं शहरी क्षेत्रों के लिए 21206 रुपये की आय सीमा निर्धारित की। नतीजतन अनुसूचित जाति और सामान्य वर्ग की छात्राओं का स्कूल जाने के प्रति जहां उनका स्वयं रुझान बढ़ा, वहीं अभिभावकों का भी इस योजना ने दृष्टिकोण परिवर्तन कर दिया।
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योजना के शुरुआत में अनुसूचित जाति के 29, सामान्य जाति की 166, वर्ष 2007-08 में एससी की 45 सामान्य की 224, वर्ष 2008-09 में एससी की 34, सामान्य वर्ग की 188, वर्ष 2009-10 में एससी वर्ग की 59, सामान्य की 178, वर्ष 2010-11 में एससी की 78, सामान्य की 638, वर्ष 2011-12 में एससी की 82, सामान्य की 563, इसी प्रकार वर्ष 2012-13 में एससी की 104, सामान्य वर्ग की 902, वर्ष 2013-14 में एससी वर्ग की 175, सामान्य की 902, वर्ष 2014-15 में एससी की 193 एवं सामान्य वर्ग की 902, वर्ष 2015-16 में एससी की 152, सामान्य की 826 छात्राओं ने कन्याधन योजना का लाभ उठाया।
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वर्ष 2013-14 की छात्राओं को नहीं मिला धन
वर्ष 2013-14 में सर्वाधिक एससी वर्ग की 175, सामान्य वर्ग की 902 छात्राओं ने कन्याधन योजना के आवेदन किए गए थे। विभाग ने सभी आवेदन स्वीकार भी कर लिए, लेकिन उन्हें अब तक कन्याधन योजना की धनराशि का भुगतान नहीं किया गया है, जबकि बाद के वर्षों के आवेदकों को भुगतान कर दिया गया। जिला समाज कल्याण अधिकारी पीसी जोशी का कहना है कि विभाग की ओर से 69.25 लाख रुपये की सरकार को डिमांड भेजी गई है।