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तुम काहे डुलाओ मुझे ना बताओ, वीर सिया प्राण प्यारी...
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टनकपुर के गांधी मैदान में दशहरा मेले में रावण, मेघनाथ व कुंभकरण का पुतला दहन देखने उमड़ी भीड़। सं?
- फोटो : TANAKPUR
चंपावत। जिले के विभिन्न स्थानों पर रामलीला हो रही है। स्वांला, कोट अमोड़ी, बिरगुल, बिसज्यूला आदि स्थानों में रामलीला मंचन देखने के लिए भीड़ उमड़ रही है। बृहस्पतिवार को स्वांला रामलीला में रावण-मारीच संवाद, बाली वध हुआ। इस दौरान सीता हरण के बाद राम वियोग में तुम काहे डुलाओ मुझे ना बताओ, वीर सिया प्राण प्यारी कहते नजर आए। रामलीला कमेटी अध्यक्ष जगदीश चंद्र भट्ट, उमेश भट्ट, नीरज भट्ट, अमित, ईश्वरी दत्त, बलदेव भट्ट, प्रकाश जोशी, शंकर भट्ट आदि सहयोग कर रहे हैं।
कोट अमोड़ी में भी रावण-मारीच संवाद, मारीच का कपटी मृग बनना, सीता हरण, बाली वध हुआ। वहां रामलीला कमेटी अध्यक्ष लालमणी भट्ट, ईश्वरी दत्त, सुरेश भट्ट, व्यवस्थापक खीमानंद भट्ट, बीडीसी सदस्य रमेश भट्ट आदि रहे। दूसरी ओर बेलखेत और सैंदर्क में रामलीला मंचन का शुभारंभ हुआ।
सिया को दे दो सिया को दे दो, जुबां क्यों बंदर चला रहा है...
लोहाघाट (चंपावत)। ठंड के बावजूद नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में रामलीला की धूम मची है। लोहाघाट में 121वें वर्ष की रामलीला में अंगद-रावण के पात्रों ने जीवंत अभिनय किया। रामलीला के नवें दिन मंदोदरी रावण संवाद, विभीषण को लंका से निकालने, विभीषण के राम दल में शामिल हुआ। अंगद का दूत बनकर रावण दरबार में पहुंचा। अंगद-रावण संवाद हुआ। इसमें रावण कहता है सिया को दे दो सिया को दे दो जुबां क्यों बंदर चला रहा है। अंगद कहता है मैं जानू बल तोर रावण, सीता लाये चोर, अंगद नाम मेरो बाली कर बेटा की प्रस्तुति बेहद सराही गई। लीला में मेघनाद-लक्ष्मण संवाद, लक्ष्मण शक्ति लगना, राम विलाप, हनुमान के संजीवनी बूटी लाने तक की लीला का मंचन किया गया।
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कमेटी के अध्यक्ष जीवन मेहता के निर्देशन में शिक्षक नरेश राय ने संचालन किया। इधर कर्णकरायत में भी रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कैलाश फर्त्याल के निर्देशन में हुई रामलीला का शुभारंभ विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने किया। लीला के पहले दिन रावण कुंभकर्ण, विभीषण का भगवान शिव की तपस्या, राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता जन्म हुआ। शिव का अभिनय सागर ढेक, रावण का विशाल फर्त्याल, कुंभकर्ण का राजेंद्र सिंह बोहरा, दशरथ का प्रकाश मुरारी, जनक की भूमिका त्रिलोचन मुरारी ने निभाई।
चंदनी भजनपुर की रामलीला में कुंभकरण वध
बनबसा (चंपावत)। चंदनी भजनपुर की रामलीला में बृहस्पतिवार को अंगद-रावण संवाद से कुंभकरण वध तक की लीला का मंचन किया गया। इसका शुभारंभ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बंशीधर उपाध्याय ने किया। वहां मौजूद पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोविंद सामंत और कनिष्ठ उपप्रमुख मोहन चंद ने भी कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
रावण के दरबार में अंगद-रावण संवाद हुआ। युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति लगी तो सुषैन वैद्य के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी का पहाड़ ही उठा लाते हैं। लक्ष्मण के ठीक होने के बाद मेघनाद, कुंभकरण वध हुआ। पीतांबर भट्ट ने कुंभकरण और उनके पुत्र आशीष भट्ट ने रावण की भूमिका निभाई। अमित राम, गौरव पांडेय लक्ष्मण, शंकर चंद मेघनाद, उमेश भट्ट सुषैन वैद्य बने। मंचन में राजेंद्र घोटा, जंग बहादुर थापा, गोपाल चंद, पुष्कर चंद, राजू खत्री, दीपक भंडारी, कलावती चंद ने सहयोग दिया।
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कोट अमोड़ी में भी रावण-मारीच संवाद, मारीच का कपटी मृग बनना, सीता हरण, बाली वध हुआ। वहां रामलीला कमेटी अध्यक्ष लालमणी भट्ट, ईश्वरी दत्त, सुरेश भट्ट, व्यवस्थापक खीमानंद भट्ट, बीडीसी सदस्य रमेश भट्ट आदि रहे। दूसरी ओर बेलखेत और सैंदर्क में रामलीला मंचन का शुभारंभ हुआ।
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सिया को दे दो सिया को दे दो, जुबां क्यों बंदर चला रहा है...
लोहाघाट (चंपावत)। ठंड के बावजूद नगर और ग्रामीण क्षेत्रों में रामलीला की धूम मची है। लोहाघाट में 121वें वर्ष की रामलीला में अंगद-रावण के पात्रों ने जीवंत अभिनय किया। रामलीला के नवें दिन मंदोदरी रावण संवाद, विभीषण को लंका से निकालने, विभीषण के राम दल में शामिल हुआ। अंगद का दूत बनकर रावण दरबार में पहुंचा। अंगद-रावण संवाद हुआ। इसमें रावण कहता है सिया को दे दो सिया को दे दो जुबां क्यों बंदर चला रहा है। अंगद कहता है मैं जानू बल तोर रावण, सीता लाये चोर, अंगद नाम मेरो बाली कर बेटा की प्रस्तुति बेहद सराही गई। लीला में मेघनाद-लक्ष्मण संवाद, लक्ष्मण शक्ति लगना, राम विलाप, हनुमान के संजीवनी बूटी लाने तक की लीला का मंचन किया गया।
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कमेटी के अध्यक्ष जीवन मेहता के निर्देशन में शिक्षक नरेश राय ने संचालन किया। इधर कर्णकरायत में भी रामलीला का मंचन शुरू हो गया है। रामलीला कमेटी के अध्यक्ष कैलाश फर्त्याल के निर्देशन में हुई रामलीला का शुभारंभ विधायक पूरन सिंह फर्त्याल ने किया। लीला के पहले दिन रावण कुंभकर्ण, विभीषण का भगवान शिव की तपस्या, राम, लक्ष्मण, भरत, शत्रुघ्न, सीता जन्म हुआ। शिव का अभिनय सागर ढेक, रावण का विशाल फर्त्याल, कुंभकर्ण का राजेंद्र सिंह बोहरा, दशरथ का प्रकाश मुरारी, जनक की भूमिका त्रिलोचन मुरारी ने निभाई।
चंदनी भजनपुर की रामलीला में कुंभकरण वध
बनबसा (चंपावत)। चंदनी भजनपुर की रामलीला में बृहस्पतिवार को अंगद-रावण संवाद से कुंभकरण वध तक की लीला का मंचन किया गया। इसका शुभारंभ राष्ट्रपति पुरस्कार से सम्मानित सेवानिवृत्त प्रधानाचार्य बंशीधर उपाध्याय ने किया। वहां मौजूद पूर्व जिला पंचायत सदस्य गोविंद सामंत और कनिष्ठ उपप्रमुख मोहन चंद ने भी कलाकारों का उत्साह बढ़ाया।
रावण के दरबार में अंगद-रावण संवाद हुआ। युद्ध में लक्ष्मण को शक्ति लगी तो सुषैन वैद्य के कहने पर हनुमान संजीवनी बूटी का पहाड़ ही उठा लाते हैं। लक्ष्मण के ठीक होने के बाद मेघनाद, कुंभकरण वध हुआ। पीतांबर भट्ट ने कुंभकरण और उनके पुत्र आशीष भट्ट ने रावण की भूमिका निभाई। अमित राम, गौरव पांडेय लक्ष्मण, शंकर चंद मेघनाद, उमेश भट्ट सुषैन वैद्य बने। मंचन में राजेंद्र घोटा, जंग बहादुर थापा, गोपाल चंद, पुष्कर चंद, राजू खत्री, दीपक भंडारी, कलावती चंद ने सहयोग दिया।