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Champawat News: एसएसबी के प्रशिक्षण प्राप्त गुरिल्लाओं का सत्यापन शुरू

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 28 Dec 2022 04:30 AM IST
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Verification of SSB Gurilla in Champawat
चंपावत पुलिस कार्यालय में सत्यापन के लिए पहुंचे एसएसबी के प्रशिक्षण प्राप्त गुरिल्ले। - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के प्रशिक्षण प्राप्त गुरिल्लों का स्थायी रोजगार और उम्रदराज लोगों को पेंशन सुविधा के लिए किया जा रहा संघर्ष अब असर दिखाने लगा है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर गुरिल्लाओं का सत्यापन शुरू हो गया है।
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चंपावत गुरिल्ला संगठन के जिलाध्यक्ष ललित मोहन बगौली ने बताया कि वर्ष 2015 में एसएसबी संगठन ने गुरिल्लों का सत्यापन किया था। अब केंद्रीय गृह मंत्रालय की ओर से पुलिस के माध्यम से अंतिम रूप से सत्यापन कराया जा रहा है। इसकी रिपोर्ट 15 जनवरी तक केंद्र सरकार को भेजनी है। इस कार्य में स्थानीय अभिसूचना इकाई के कर्मचारियों समेत ग्राम प्रधान भी सहयोग कर रहे हैं। जिले में चंपावत, लोहाघाट और टनकपुर में सत्यापन किया जा रहा है। चंपावत जिले में करीब 750 गुरिल्ले थे। इनमें से करीब 50 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।
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गुरिल्लाओं की तीन सूत्री मांगें
- 45 वर्ष की आयु तक के गुरिल्लों को सरकारी नौकरी
- इससे ऊपर की आयु पार कर चुके गुरिल्लों को पेंशन
- मृतक के परिवार को एकमुश्त आर्थिक सहायता
राज्य में 20 हजार से अधिक हैं गुरिल्ले
सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) को पहले विशेष सेवा ब्यूरो कहा जाता था। 20 हजार से अधिक गुरिल्लों एसएसबी से प्रशिक्षण लिया था। सरकार ने उनसे निश्चित मानदेय पर स्वयंसेवक के रूप में काम किया। गृह मंत्रालय के अधीन आने के बाद 2003 में उन्हें एसएसबी से संबद्ध कर दिया गया लेकिन इसके बाद उनसे कोई काम नहीं लिया गया। तभी से गुरिल्ले संघर्षरत हैं। पिथौरागढ़ जिले के गंगोलीहाट में गुरिल्लों ने 2004 में संगठन बनाकर आंदोलन किया था। अल्मोड़ा में गुरिल्ले 12 साल से अधिक समय से धरना दे रहे हैं।
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उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भी दी थी राहत
हल्द्वानी। उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चार अगस्त के अपने आदेश में उत्तराखंड में एसएसबी के गुरिल्लों और उनकी विधवाओं को मणिपुर की तरह नौकरी और सेवानिवृत्ति के लाभ तीन महीने के भीतर देने के आदेश दिए थे।

मणिपुर हाईकोर्ट ने भी हक में सुनाया था फैसला
मणिपुर हाईकोर्ट ने गुरिल्लों को नौकरी पर रखने और सेवानिवृत्ति की आयु वालों को पेंशन और सेवानिवृत्ति का लाभ देने के निर्देश दिए थे। सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे सही ठहराया था। इसके बाद मणिपुर सरकार ने वहां के गुरिल्लों को सेवा में रखा।
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