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देवीधूरा में मां बज्र बाराही की शोभा यात्रा निकली
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देवीधूरा में माँ वज्र बाराही की शोभा यात्रा निकालते श्रद्घालु।
- फोटो : LOHAGHAT
पाटी (चंपावत)। मां बाराही धाम देवीधुरा में बगवाल के दूसरे दिन मां बज्र बाराही की शोभायात्रा निकाली गई। इस दौरान शासन प्रशासन के दिशा निर्देशों का पालन करते हुए सुरक्षित दूरी के साथ श्रद्धालुओं ने मां का आशीर्वाद लिया।
मंगलवार को परंपरा के अनुसार पीठाचार्य आचार्य कीर्ति बल्लल जोशी, पुरोहित गिरिजा प्रसाद जोशी ने मां बाराही देवी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इसके बाद जमन सिंह बागड़, पूरन सिंह बागड़ ने पूजा-अर्चना के बाद आंखों में काली पट्टी बांधकर ताम्र पेटिका में रखीं मां बज्र बाराही, मां सरस्वती और मां काली की मूर्ति को स्नान कराया गया। चारों खामों के मुखिया की मौजूदगी में कोट बैरख निवासी हर सिंह माहरा को मूर्तियां सौंपा गईं। मंदिर से मां बाराही के गर्भगृह से बज्र्र बाराही की शोभायात्रा मुचकंद ऋषि के आश्रम तक निकली गई। मुचकंद ऋषि आश्रम से शोभायात्रा के लौटने के बाद खोलीखंाड़ दुबाचोड़ मैदान में शिलिंग चोबाड़ी से यह मूर्ति भूपाल सिंह बिष्ट को सौंप गई। मूर्ति को नंदग्रह वापस लाए।
मान्यता है कि देवता और असुरों के संग्राम के दौरान काल यवन असुर का वध करने में मुचकंद ऋषि ने देवताओं का सहयोग किया था। इससे प्रशन्न होकर मां बज्र बाराही ने मुचकंद ऋषि को दर्शन देने का वचन दिया था। इसी वचन को निभाने के लिए हर वर्ष बगवाल के दूसरे दिन मुचकंद ऋषि के आश्रम तक शोभा यात्रा निकाली जाती है।
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इस मौके पर मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, गहरवाल खाम के मुखिया त्रिलोक सिंह बिष्ट, वालिक खाम के बद्री सिंह बिष्ट, लमगड़िया खाम के वीरेंद्र लमगड़िया, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, ब्लाक प्रमुख सुमनलता, दिनेश चम्याल, दीपक बिष्ट, मदन बोहरा, नारायण सिंह, हयात सिंह बिष्ट, जीत सिंहज चम्याल, रमेश राणा, बिशन चम्याल, मोहन बिष्ट, दीपक चम्याल, सुनील जोशी आदि रहे।
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मंगलवार को परंपरा के अनुसार पीठाचार्य आचार्य कीर्ति बल्लल जोशी, पुरोहित गिरिजा प्रसाद जोशी ने मां बाराही देवी की विशेष पूजा-अर्चना संपन्न कराई। इसके बाद जमन सिंह बागड़, पूरन सिंह बागड़ ने पूजा-अर्चना के बाद आंखों में काली पट्टी बांधकर ताम्र पेटिका में रखीं मां बज्र बाराही, मां सरस्वती और मां काली की मूर्ति को स्नान कराया गया। चारों खामों के मुखिया की मौजूदगी में कोट बैरख निवासी हर सिंह माहरा को मूर्तियां सौंपा गईं। मंदिर से मां बाराही के गर्भगृह से बज्र्र बाराही की शोभायात्रा मुचकंद ऋषि के आश्रम तक निकली गई। मुचकंद ऋषि आश्रम से शोभायात्रा के लौटने के बाद खोलीखंाड़ दुबाचोड़ मैदान में शिलिंग चोबाड़ी से यह मूर्ति भूपाल सिंह बिष्ट को सौंप गई। मूर्ति को नंदग्रह वापस लाए।
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मान्यता है कि देवता और असुरों के संग्राम के दौरान काल यवन असुर का वध करने में मुचकंद ऋषि ने देवताओं का सहयोग किया था। इससे प्रशन्न होकर मां बज्र बाराही ने मुचकंद ऋषि को दर्शन देने का वचन दिया था। इसी वचन को निभाने के लिए हर वर्ष बगवाल के दूसरे दिन मुचकंद ऋषि के आश्रम तक शोभा यात्रा निकाली जाती है।
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इस मौके पर मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, मंदिर कमेटी के अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, गहरवाल खाम के मुखिया त्रिलोक सिंह बिष्ट, वालिक खाम के बद्री सिंह बिष्ट, लमगड़िया खाम के वीरेंद्र लमगड़िया, चम्याल खाम के गंगा सिंह चम्याल, ब्लाक प्रमुख सुमनलता, दिनेश चम्याल, दीपक बिष्ट, मदन बोहरा, नारायण सिंह, हयात सिंह बिष्ट, जीत सिंहज चम्याल, रमेश राणा, बिशन चम्याल, मोहन बिष्ट, दीपक चम्याल, सुनील जोशी आदि रहे।