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दो महीनों में सिर्फ 17 मरीजों का इलाज
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत
Updated Sun, 30 Jul 2017 10:31 PM IST
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भिंगराड़ा का अस्पताल।
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। इस साल मई माह के 31 दिनों में 8 मरीज और जून माह के 30 दिनों में 9 मरीज। दो महीनों में इन 17 मरीजों के इलाज पर 1.04 लाख रुपये खर्च हुआ है। यानि प्राथमिक उपचार कराने आए एक मरीज पर औसतन 6117 रुपये से अधिक का खर्च हुआ। ये तस्वीर भिंगराड़ा के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की है।
इस अस्पताल में दो महीनों के 61 दिनों में से 17 दिनों को छोड़कर शेष 44 दिनों में एक भी मरीज उपचार के लिए नहीं पहुंचा। जबकि इस दौरान के तमाम कार्य दिवसों में डॉक्टर की कागजों में उपस्थिति भी दर्शाई गई है। ग्रामीणों के अक्सर अस्पताल बंद होने के आरोप के बीच ये सवाल उठना लाजमी है कि अस्पताल की मांग करने वाले लोग आखिर अस्पताल से कन्नी क्यों काट रहे हैं? क्या उन्हें इलाज की जरूरत नहीं है या इस दौर में लोगों को अस्पताल जाने की नौबत ही नहीं आई।
ग्रामीणों के लंबे संघर्ष बाद पिछले साल भिंगराड़ा में स्वास्थ्य केंद्र खोला गया। अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती की गई, लेकिन फार्मेसिस्ट नहीं रखा गया। इस साल जनवरी से यहां डॉक्टर नहीं था। पहली मई को एक अन्य संविदा डॉक्टर यहां रखा गया। इस अस्पताल पर भिंगराड़ा, मड्योली, चल्थिया, गड्यूरा, बैजगांव, खरहीं, बिरगुल, टाक खंदक सहित कई गांवों की सात हजार से अधिक की आबादी आश्रित हैं। बावजूद इसके इस अस्पताल में मरीजों की आमद बेहद कम हो रही है। जबकि इस अस्पताल से अधिक मरीज वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहे टांण राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय (एसएडी) में आए।
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पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.आभाष सिंह ने बताया कि भिंगराड़ा में इस साल मई में 8 और जून में 9 मरीज आए। जबकि अस्पताल में संविदा के एक डॉक्टर को तैनात किया गया है। जिनके वेतन पर ही एक माह में 52 हजार रुपये खर्च होते हैं।
10 जुलाई से बंद है अस्पताल
भिंगराड़ा का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों ताला लटका लटका हुआ है। 10 जुलाई से ये अस्पताल पूरी तरह बंद है। इसकी वजह डॉक्टर का अवकाश में होना है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के मुताबिक संविदा के डॉक्टर 10 जुलाई से अवकाश में है।
मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि भिंगराड़ा अस्पताल इस साल खुला ही नहीं। पैरा लीगल वालंटियर उमेश चंद्र भट्ट, रमेश भट्ट सहित यहां के तमाम ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर की तैनाती के बावजूद भिंगराड़ा का अस्पताल संचालित नहीं हो सका है। अस्पताल से 30 मीटर की दूरी पर रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी अस्पताल को खुला नहीं देखा। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल का बंद रहना मरीजों के साथ गंभीर छलावा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मसले को मानवाधिकार आयोग के सम्मुख उठाया जाएगा।
लधिया के अस्पतालों में देखे गए मरीज मई व जून
मई जून
भिंगराड़ा 8 9
टांण 83 43
रीठा साहिब 401 336
कोट..............
भिंगराड़ा के अस्पताल में डॉक्टर के नहीं आने की ग्रामीणों की शिकायत की जांच कराई जा रही है। पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया है। उनकी जांच के आने के बाद कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल जून महीने का वेतन रोका गया है।
डॉ.एमएस बोहरा मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।
इस अस्पताल में दो महीनों के 61 दिनों में से 17 दिनों को छोड़कर शेष 44 दिनों में एक भी मरीज उपचार के लिए नहीं पहुंचा। जबकि इस दौरान के तमाम कार्य दिवसों में डॉक्टर की कागजों में उपस्थिति भी दर्शाई गई है। ग्रामीणों के अक्सर अस्पताल बंद होने के आरोप के बीच ये सवाल उठना लाजमी है कि अस्पताल की मांग करने वाले लोग आखिर अस्पताल से कन्नी क्यों काट रहे हैं? क्या उन्हें इलाज की जरूरत नहीं है या इस दौर में लोगों को अस्पताल जाने की नौबत ही नहीं आई।
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ग्रामीणों के लंबे संघर्ष बाद पिछले साल भिंगराड़ा में स्वास्थ्य केंद्र खोला गया। अस्पताल में डॉक्टर की तैनाती की गई, लेकिन फार्मेसिस्ट नहीं रखा गया। इस साल जनवरी से यहां डॉक्टर नहीं था। पहली मई को एक अन्य संविदा डॉक्टर यहां रखा गया। इस अस्पताल पर भिंगराड़ा, मड्योली, चल्थिया, गड्यूरा, बैजगांव, खरहीं, बिरगुल, टाक खंदक सहित कई गांवों की सात हजार से अधिक की आबादी आश्रित हैं। बावजूद इसके इस अस्पताल में मरीजों की आमद बेहद कम हो रही है। जबकि इस अस्पताल से अधिक मरीज वार्ड ब्वाय के सहारे चल रहे टांण राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय (एसएडी) में आए।
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पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी डॉ.आभाष सिंह ने बताया कि भिंगराड़ा में इस साल मई में 8 और जून में 9 मरीज आए। जबकि अस्पताल में संविदा के एक डॉक्टर को तैनात किया गया है। जिनके वेतन पर ही एक माह में 52 हजार रुपये खर्च होते हैं।
10 जुलाई से बंद है अस्पताल
भिंगराड़ा का अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में इन दिनों ताला लटका लटका हुआ है। 10 जुलाई से ये अस्पताल पूरी तरह बंद है। इसकी वजह डॉक्टर का अवकाश में होना है। मुख्य चिकित्साधिकारी कार्यालय के मुताबिक संविदा के डॉक्टर 10 जुलाई से अवकाश में है।
मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाएंगे ग्रामीण
ग्रामीणों का आरोप है कि भिंगराड़ा अस्पताल इस साल खुला ही नहीं। पैरा लीगल वालंटियर उमेश चंद्र भट्ट, रमेश भट्ट सहित यहां के तमाम ग्रामीणों का कहना है कि डॉक्टर की तैनाती के बावजूद भिंगराड़ा का अस्पताल संचालित नहीं हो सका है। अस्पताल से 30 मीटर की दूरी पर रहने वाले ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कभी अस्पताल को खुला नहीं देखा। ग्रामीणों का आरोप है कि अस्पताल का बंद रहना मरीजों के साथ गंभीर छलावा है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मसले को मानवाधिकार आयोग के सम्मुख उठाया जाएगा।
लधिया के अस्पतालों में देखे गए मरीज मई व जून
मई जून
भिंगराड़ा 8 9
टांण 83 43
रीठा साहिब 401 336
कोट..............
भिंगराड़ा के अस्पताल में डॉक्टर के नहीं आने की ग्रामीणों की शिकायत की जांच कराई जा रही है। पाटी के प्रभारी चिकित्साधिकारी को जांच अधिकारी बनाया गया है। उनकी जांच के आने के बाद कार्यवाही की जाएगी। फिलहाल जून महीने का वेतन रोका गया है।
डॉ.एमएस बोहरा मुख्य चिकित्साधिकारी, चंपावत।