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परेवा-बोराबगड़ झूलापुल से खतरनाक है आवाजाही
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परेवा-बोराबगड़ झूला पुल का जर्जर फर्श और टूटा टिन। संवाद
- फोटो : CHAMPAWAT
रीठा साहिब/चंपावत। गुजरात के मोरबी में मच्छु नदी पर बने झूलापुल के टूटने की घटना ने कई सवाल खड़े किए हैं। चंपावत जिले में भी झूलापुल पर खतरे कम नहीं हैं। लधिया घाटी से नैनीताल जिले के ग्रामीण क्षेत्रों को जोड़ने वाला चंपावत का परेवा-बोराबगड़ झूलापुल बेहद खतरनाक हाल में है।
रतिया नदी पर लधिया घाटी के परेवा से बोराबगड़ (मंगललेख) का झूलापुल चंपावत जिले से नैनीताल जिले के कई ग्रामीण हिस्सों को जोड़ता है। वर्ष 1980 के दौर में बना 45 मीटर लंबा और छह फीट चौड़ा पुल नैनीताल के कुकना, ढेना, कैड़ागांव, मल्ली रौ, तल्ली रौ, कांडा, ढोलीगांव और चंपावत जिले के सिरना, कठौल, वारसी, पोखरी, धरसो, गोलडांडा, बिनवालगांव, मंगललेख, परेवा आदि गांवों को जोड़ता है लेकिन यह पुल इस वक्त बेहद बुरे हाल में है। पुल के फर्श का डामर बुरी तरह से टूट चुका है। यहां तक कि पुल के फर्श पर लगे टिन भी जर्जर हाल में है।
पुल के किनारे के तारों में काफी फासला होने से आवाजाही भी बेहद सावधानी से करनी होती है। पूर्व बीडीसी कुंदन सिंह बिष्ट सहित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं है। बावजूद इसके स्कूली बच्चों से लेकर आम लोग यहां से आवाजाही करने को मजबूर हैं। संवाद
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42 साल पहले बने झूलापुल की खराब स्थिति के मद्देनजर आपदा मद से आगणन बनाया गया है। बजट मिलने पर मरम्मत का काम कराया जाएगा। -सीएम पांडेय, एई, लोनिवि, चंपावत।
बेलखेत के झूलापुल की होगी मरम्मत
चंपावत। बेलखेत के बदहाल झूलापुल की लोक निर्माण विभाग मरम्मत कराएगा। अमर उजाला में 28 अक्तूबर को (पैदल पुल से राह आसान नहीं, गड्ढे बढ़ा रहे धड़कन) खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए विभाग ने इसका तत्काल मौका मुआयना किया। लोनिवि के ईई विभोर गुप्ता ने बताया कि बेलखेत के झूलापुल में चार जगह प्लेट टूटी है। पुल की खामी को दो सप्ताह के भीतर ठीक करा लिया जाएगा। इसके अलावा पुल में कहीं खतरा नहीं है। पुल आवाजाही के लिए सुरक्षित है। वर्ष 1993 में बने 100 मीटर लंबे बेलखेत के झूलापुल से नौलापानी, बेलखेत, बिलूना, दुधोरी, बाली आदि गांवों के तीन हजार से अधिक लोगों की आवाजाही होती है। संवाद
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रतिया नदी पर लधिया घाटी के परेवा से बोराबगड़ (मंगललेख) का झूलापुल चंपावत जिले से नैनीताल जिले के कई ग्रामीण हिस्सों को जोड़ता है। वर्ष 1980 के दौर में बना 45 मीटर लंबा और छह फीट चौड़ा पुल नैनीताल के कुकना, ढेना, कैड़ागांव, मल्ली रौ, तल्ली रौ, कांडा, ढोलीगांव और चंपावत जिले के सिरना, कठौल, वारसी, पोखरी, धरसो, गोलडांडा, बिनवालगांव, मंगललेख, परेवा आदि गांवों को जोड़ता है लेकिन यह पुल इस वक्त बेहद बुरे हाल में है। पुल के फर्श का डामर बुरी तरह से टूट चुका है। यहां तक कि पुल के फर्श पर लगे टिन भी जर्जर हाल में है।
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पुल के किनारे के तारों में काफी फासला होने से आवाजाही भी बेहद सावधानी से करनी होती है। पूर्व बीडीसी कुंदन सिंह बिष्ट सहित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि इस पुल से गुजरना खतरे से खाली नहीं है। बावजूद इसके स्कूली बच्चों से लेकर आम लोग यहां से आवाजाही करने को मजबूर हैं। संवाद
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42 साल पहले बने झूलापुल की खराब स्थिति के मद्देनजर आपदा मद से आगणन बनाया गया है। बजट मिलने पर मरम्मत का काम कराया जाएगा। -सीएम पांडेय, एई, लोनिवि, चंपावत।
बेलखेत के झूलापुल की होगी मरम्मत
चंपावत। बेलखेत के बदहाल झूलापुल की लोक निर्माण विभाग मरम्मत कराएगा। अमर उजाला में 28 अक्तूबर को (पैदल पुल से राह आसान नहीं, गड्ढे बढ़ा रहे धड़कन) खबर प्रमुखता से प्रकाशित होने के बाद हरकत में आए विभाग ने इसका तत्काल मौका मुआयना किया। लोनिवि के ईई विभोर गुप्ता ने बताया कि बेलखेत के झूलापुल में चार जगह प्लेट टूटी है। पुल की खामी को दो सप्ताह के भीतर ठीक करा लिया जाएगा। इसके अलावा पुल में कहीं खतरा नहीं है। पुल आवाजाही के लिए सुरक्षित है। वर्ष 1993 में बने 100 मीटर लंबे बेलखेत के झूलापुल से नौलापानी, बेलखेत, बिलूना, दुधोरी, बाली आदि गांवों के तीन हजार से अधिक लोगों की आवाजाही होती है। संवाद