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खाई में गिरा टिप्पर, छात्र-छात्रा समेत तीन की मौत
Mon, 03 Jun 2019 10:31 PM IST
बृजमोहन बृजमोहन
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
अमर उजाला ब्यूरो चंपावत।
Published by: बृजमोहन बृजमोहन
Updated Mon, 03 Jun 2019 10:31 PM IST
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स्वांला टिप्पर हादसे में राहत और बचाव कार्य करती फायर सर्विस की टीम।
- फोटो : अमर उजाला
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टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर सोमवार को जिला मुख्यालय से करीब 22 किलोमीटर दूर स्वांला मंदिर के पास एक टिप्पर 150 मीटर गहरी खाई में गिर गया। हादसे में हाईस्कूल के छात्र, छात्रा और चालक की मौत हो गई। हादसे में एक महिला भी घायल हुई है, जिसका जिला अस्पताल इलाज चल रहा है। एसपी धीरेंद्र गुंज्याल के मुताबिक हादसे वाली जगह संकरी थी। चट्टान की तरफ से छिटपुट मलबा भी आ रहा था जिसे साफ करने को कहा गया है।
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पुलिस अधीक्षक ने बताया कि लोहाघाट से चल्थी जा रहा टिप्पर (यूके 03 सीए/1777) सोमवार अपराह्न करीब एक बजे स्वांला में मनी होटल के पास 150 मीटर गहरी खाई में गिर गया। टिप्पर के परखचे उड़ गए। हादसे में हाईस्कूल में पढ़ने वाली अनीता भट्ट (15) पुत्री स्वर्गीय श्री शंकर दत्त भट्ट, निवासी कोट अमोड़ी चंपावत, हाईस्कूल के ही छात्र चंचल कापड़ी (17) पुत्र डिगर देव, निवासी जैगांव चंपावत और चालक दिनेश सिंह (28) पुत्र डुंगर सिंह निवासी धूनाघाट (पाटी) की मौत हो गई। टिप्पर में सवार रेखा देवी (21) पत्नी शंकर दत्त भट्ट निवासी जैगांव (चंपावत) छिटकने से बच गई।
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पुलिस ने स्थानीय लोेगों के साथ मिलकर चलाया बचाव कार्य
चंपावत। स्वांला के पास टनकपुर-पिथौरागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग (एनएच) पर हुई दुर्घटना की जानकारी मिलते ही कोतवाल धीरेंद्र कुमार के नेतृत्व में पुलिस बल और लोहाघाट से अग्निशमन अधिकारी चंदन राम के नेतृत्व में टीम ने स्थानीय लोगों के साथ मिलकर बचाव और राहत कार्य किया। बुरी तरह से घायल रेखा को 108 से जिला अस्पताल लाया गया। मुख्य चिकित्साधीक्षक डॉ.आरके जोशी ने बताया कि महिला के सिर, पीठ और पांव में चोटें आईं हैं। अस्थि रोग विशेषज्ञ डॉ.एचएस ऐरी और सर्जन डॉ.हिमांशु पांडेय ने महिला का इलाज किया। पंचनामा भरने के बाद चालक दिनेश सिंह का पोस्टमार्टम कर शव परिजनों को सौंप दिया गया है।पोस्टमार्टम डॉ.इंद्रजीत पांडेय और डॉ.प्रदीप बिष्ट ने किया।
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राहत और बचाव कार्य में इन लोगों ने मदद की
स्थानीय लोग : दीपक बोरा, कृष्णानंद, ईश्वरी दत्त, हरीश भट्ट, इंद्रदेव, पूर्णानंद, मोहन चंद्र, हेतराम, गणेश दत्त।
अग्रिशमन की टीम : बालमुकुंद, राजेश खर्कवाल, भैरव सिंह मौनी, उपेंद्र सिंह, सुनील कुमार, गोविंद पनेरू, भरत सिंह, प्रमोद कुमार।
स्वांला में 17 माह में 6 हादसे, 22 की जान गई
चंपावत। स्वांला क्षेत्र जिले का सबसे बड़ा ब्लैक स्पॉट बन गया है। 2018 से इस जगह में अब तक छह सड़क हादसे हो चुके हैं। जिसमें 22 यात्रियों की जान जा चुकी है। पिछले साल 7 फरवरी को सबसे खौंफनाक जीप हादसा हुआ था। इस जीप दुर्घटना में सभी 10 लोगों की मौत हुई।
स्वांला हादसे के बाद बना पीएसी जवानों का स्मारक
चंपावत। स्वांला क्षेत्र सड़क दुर्घटना के लिए चर्चित रहा है। स्वांला मंदिर के पास हादसों की शुरुआत 25 फरवरी 1952 से हुई थी। देश की आजादी के बाद लोकसभा के पहले चुनाव को निपटा कर लौट रहे पीएसी बरेली की आठवीं बटालियन के वाहन के गहरी खाई में गिरने से सभी आठों जवानों की मौत हो गई थी। बाद में इस जगह पर मंदिर और स्मारक बनाया गया।
आजादी के बाद 25 अक्तूबर 1951 से 21 फरवरी 1952 तक पहले लोकसभा चुनाव हुए। इस पहाड़ी क्षेत्र में मतदान सबसे आखिर में था। चुनाव निपटने के बाद 25 फरवरी 1952 को सुरक्षा बल वापस जा रहे थे। तभी पीएसी की बरेली स्थित 8वीं बटालियन के वाहन का हादसा हो गया। चंपावत से 22 किमी दूर स्वांला के पास यह वाहन 200 मीटर खाई में गिर गया। स्वंाला मंदिर के पास पीएसी के भूपाल सिंह, जगत सिंह, मान सिंह, नैन सिंह, वीर सिंह, रुद्र सिंह, पुरुषोत्तम सिंह और बतवा सिंह की मौत हो गई थी।
बाद में इस स्थान पर उनकी याद में एक स्मारक भी बनाया गया। जिसमें सभी आठ मृत जवानों का नाम अंकित किया गया है। यहां के बुजुर्ग बताते हैं कि संचार सुविधा नहीं होने से हादसे की जानकारी भी कई घंटों बाद मिली। तब न तो आसपास में कहीं पुलिस थाना था और नहीं कोई अस्पताल। चंपावत से 22 किलोमीटर दूर स्वांला के पास दुर्घटनाग्रस्त स्थान पर रोड के किनारे एक मंदिर बनाया गया। हादसे के बाद वर्षो तक लोगों में दहशत थी। बाद में मां दुर्गा मंदिर बनाया गया।