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लोहाघाट में तीन दिन बाद नलों में आ रहा पानी

Thu, 12 May 2016 11:29 PM IST
ब्यूराे/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)।
ब्यूराे/अमर उजाला, लोहाघाट (चंपावत)। Updated Thu, 12 May 2016 11:29 PM IST
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Three days later, the water coming in the taps in Lohaghat
लोहाघाट में तीन दिन बाद नलों में आ रहा पानी - फोटो : अमर उजाला

लोहाघाट (चंपावत)। क्षेत्र में पेयजल संकट थमने का नाम नहीं ले रहा हैं। नगर में चौथे दिन, तो गांव में तीसरे दिन पानी मिल पा रहा है। बारिश के बावजूद लोग पानी को तरस रहे हैं। हालांकि जल संस्थान द्वारा पेयजल आपूर्ति के लिए तीन टैंकर एवं तीन पिकअप से जलापूर्ति की जा रही है।

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नगर के मुख्य टैंक में लगातार तीन टैंकरों से पेयजल आपूर्ति की जा रही है, जिससे 60 से 75 हजार लीटर पानी डाला जा रहा हैं। नगर के लिए 1620 किलोलीटर के स्थान पर मात्र 450 केएल ही पानी मिल पा रहा है। लोगों की निर्भरता हैंडपंपों, नौलों, नर्सरी गधेरे और अक्कल धारे में आ टिकी है। सुबह से ही लोग पानी के लिए लाइन में लग जाते हैं।
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वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल संकट बरकरार है। पुलहिंडोला, खूना, चौड़ी, फोर्ती, सुंई, रौंतली माहरा, पाटन-पाटनी, राईकोट आदि में भी पानी की कमी बनी है। लोग राईकोट गधेरे में बने नौले से पानी ला रहे हैं।
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जलकल अभियंता पवन बिष्ट के अनुसार वर्षा से जल स्रोतों के स्तर में कोई वृद्धि नहीं हुई हैं। उनका कहना है कि एक पिकअप से बाराकोट, एक से चौड़ी, फोर्ती व नगर में सप्लाई की जा रही हैं, जबकि खूना मलक में तीन दिन में दो टैंकर पानी भेजा जा रहा है।

चंपावत। पिछले कुछ दिनों हुई बारिश से भले ही पेयजल संकट पर लगाम न लगी हो, लेकिन इसकी विकरालता पर रोक जरूर लग गई थी पर अब तेज धूप के बाद फिर से पेयजल किल्लत उफान पर है। पानी की मांग और आपूर्ति में जबर्दस्त अंतर के चलते पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है।


अब भी एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है और वह भी 16 लाख लीटर की जरूरत का एक-तिहाई से भी कम। जल संस्थान के जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि जल स्रोतों में फिलहाल पानी का स्तर नहीं बढ़ा है। मांदली, जीआईसी मुहल्ला, कनलगांव सहित कई संवेदनशील इलाकों में अब भी टैंकर और पिकअप मददगार के रूप में है।

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