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मीठे रीठे के लिए मशहूर गांव के लोगों के कड़वे अनुभव
अमरनाथ/अमर उजाला, श्रीरीठा साहिब (चंपावत)
Updated Fri, 13 Jan 2017 10:46 PM IST
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रीठा साहिब की बदहाल रोड
- फोटो : अमर उजाला
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चंपावत। कहा जाता है कि गुरु नानक देव के तप से करीब 400 साल पहले यहां का कड़वा रीठा मीठा हो गया था और तब उन्होंने यहां के लोगों की उदासी भरी जिंदगी में खुशहाली लाने की कोशिश की थी। अब लधिया घाटी क्षेत्र के हजारों लोग सड़क, संचार, स्वास्थ्य और शिक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। न जनप्रतिनिधि और न ही प्रशासन उनकी सुध ले रहा है।
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करीब 45 हजार आबादी वाले लधिया घाटी क्षेत्र में स्वास्थ्य सुविधा की यह स्थिति है कि एकमात्र अति प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, चौड़ा मेहता, रीठा साहिब में शुक्रवार को दिन के पौने दस बजे तक कोई स्टाफ नहीं आया था। अमर उजाला की पड़ताल में पता चला कि कुछ दिन पहले संविदा डॉक्टर विदुषी शर्मा की तैनाती हुई है, लेकिन न तो वह मिलीं, न ही फार्मेसिस्ट और न वार्ड ब्यॉय, जबकि स्वास्थ्य केंद्र खुला हुआ था।
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हाल यह है कि एएनएम सेंटर में दारू की बोतल पड़ी थी। लोगों की मांग के बावजूद अब तक एएनएम की तैनाती भी नहीं हुई है। नतीजतन गर्भवती महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा नहीं होने से कुलयाल गांव की एक गर्भवती महिला ने दम तोड़ दिया था। इसी तरह सड़क दुर्घटनाओं में वक्त पर इलाज नहीं मिलने से कई लोगों की मौत हो चुकी है। चौड़ा मेहता के प्रधानपति जयदत्त जोशी ने बताया कि एएनएम की तैनाती के साथ-साथ बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं के बारे में कई अधिकारियों और नेताओं को बताया गया, लेकिन कोई नहीं सुनता।
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दूसरी तरफ सरकार के दावे के उलट इस क्षेत्र में शिक्षा की स्थिति यह है कि मछियाड़ स्थित बने राजकीय इंटर कॉलेज में प्रधानाचार्य, प्रवक्ता और चपरासी तक नहीं है। मात्र तीन शिक्षक 145 बच्चों को पढ़ा रहे हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षा में परीक्षार्थियों के अच्छे रिजल्ट की उम्मीद कैसे की जा सकती है। इस स्कूल में बरसात के समय रास्ता तक बंद हो जाता है, लेकिन कोई भी जनप्रतिनिधि इस ओर अब तक ध्यान नहीं दे सका है। इसी तरह टांड के स्कूल में बिजली, पानी और रास्ते की सुविधा नहीं है।
यहां तक कि भवन की हालत जर्जर है। बिनवाल गांव का स्कूल में भी शिक्षक की कमी है। चौड़ा मेहता इंटर कॉलेज में बोर्ड परीक्षा केंद्र होने के बावजूद मेन गेट नहीं है और आने-जाने का रास्ता दुरुस्त नहीं है। रमक इंटर कॉलेज की भी ऐसी ही समस्या है। स्कूल अभिभावक संघ के अध्यक्ष दीवान सिंह बडेला, पनी राम, खीमानंद गड़कोटी, खीमानंद बिनवाल, कुंदन सिंह बिष्ट, जिला पंचायत सदस्य भोला सिंह बोरा ने बताया कि कई बार मंत्री और अधिकारियों से शिक्षकों को बढ़ाने के साथ-साथ शिक्षा व्यवस्था सुधारने की मांग की गई, लेकिन अब तक किसी ने भी इस ओर ध्यान नहीं दिया है।
संचार क्षेत्र में डिजिटल इंडिया का सपना इलाके के लोगों के स्वप्न सरीखा है। बीएसएनएल की लचर सेवा से यहां के लोगों का मोह भंग हो रहा है। कुलियाल गांव में बना बीएसएनएल, रिलायंस और वोडाफोन का टावर पिछले कई सालों से शोपीस बना है। क्षेत्र में नेटवर्क कमजोर होने से ज्यादातर लोगों को मोबाइल और इंटरनेट तक की सुविधा नहीं मिल पा रही है। श्रीरीठा साहिब गुरुद्वारा चंपावत में पर्यटन का प्रमुख केंद्र होने के बावजूद सरकारी तंत्र संचार व्यवस्था दुरुस्त करने के प्रति सजग नहीं है। कुलियाल गांव से लगे अमजड़, मीडार, अधोड़ा आदि गांवों में शायद ही नेटवर्क मिलता है। मोबाइल फोन पर लोग हेलो-हेलो करते रह जाते हैं।
उधर, मछियाड़ स्थित 350 साल पुराना मां वरदायिनी मां शीला देवी मंदिर पर्यटन मैप पर अब तक पर नहीं आ पाया है, जबकि यहां हर दिन देश-विदेश से अच्छी खासी संख्या में श्रद्धालु आते हैं, फिर यहां तक पहुंचने के लिए अभी पक्की सड़क नहीं बन पाई है। इसी तरह नैनीताल जिले के दूरस्थ गांव मीडार, पद्मपुर और चंपावत जिले के कुलियाल, चौड़ा मेहता, चौड़ा पिता परेवा, बिनवाल, बारसी, चल्थियां, भोकड़ा, मंगललेख, रमक आदि गांवों में कच्ची सड़कों की हालत जर्जर है। मोहन चंद टिटगांई, दीपक बिनवाल, पुष्पा बोहरा, दिनेश बिनवाल आदि ने बताया कि विकास की मुख्य धारा से चंपावत का लधिया घाटी क्षेत्र कटा हुआ है। यह स्थिति तब है जब यहां करीब 21 हजार वोटर हैं।