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Champawat News: ऑलवेदर सड़क के कारण आरएस के निर्माण पर लगा ब्रेक
Sun, 29 Sep 2024 11:05 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Sun, 29 Sep 2024 11:05 PM IST
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चंपावत। ऑल वेदर सड़क के चलते छीड़ापानी में बन रहे देश के पहले स्टेट ऑफ द आर्ट रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) के निर्माण की राह रोक दी है। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत बन रहे करोड़ों के निर्माण को भारी वाहनों के नहीं आने के कारण 18 दिन से ब्रेक लगा हुआ है।
शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय और प्रायोगिक मत्स्य प्रक्षेत्र छीड़ापानी में देश के पहले स्टेट ऑफ द आर्ट रेनबो ट्राउट मछली रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) का निर्माण छह माह पूर्व शुरू हो गया था। आरएएस की मदद से एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इस सिस्टम के बनने से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की बचत होगी और मत्स्य पालन की लागत कम होने से पालकों को काफी मुनाफा होगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3.64 करोड़ की लागत से आरएएस का निर्माण किया जा रहा है।
आरएएस का निर्माण होने के बाद एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इससे प्रतिदिन करीब सात लाख लीटर पानी की बचत से जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। आरएएस से रेनबो ट्राउट के सफल उत्पादन के बाद देश के अन्य हिस्सों में भी रेनबो ट्राउट मछली के उत्पादन की अलग-अलग आरएएस इकाई स्थापित की जाएंगी। प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. किशोर कुणाल ने बताया कि भारी वाहनों के नहीं आने के कारण निर्माण कार्य 40 फीसदी से आगे नहीं बढ़ पाया है। पहले बारिश के कारण कार्य रूका था। अब यातायात बाधित होने के कारण निर्माण सामग्री नहीं पहुंचने के कारण कार्य नहीं हो पा रहा है।
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शीतजल मात्स्यिकी अनुसंधान निदेशालय और प्रायोगिक मत्स्य प्रक्षेत्र छीड़ापानी में देश के पहले स्टेट ऑफ द आर्ट रेनबो ट्राउट मछली रिसर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (आरएएस) का निर्माण छह माह पूर्व शुरू हो गया था। आरएएस की मदद से एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इस सिस्टम के बनने से प्रतिदिन लाखों लीटर पानी की बचत होगी और मत्स्य पालन की लागत कम होने से पालकों को काफी मुनाफा होगा। प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 3.64 करोड़ की लागत से आरएएस का निर्माण किया जा रहा है।
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आरएएस का निर्माण होने के बाद एक ही पानी को री-साइकिल कर रेनबो ट्राउट का उत्पादन किया जाएगा। इससे प्रतिदिन करीब सात लाख लीटर पानी की बचत से जल संवर्धन को भी बढ़ावा मिलेगा। आरएएस से रेनबो ट्राउट के सफल उत्पादन के बाद देश के अन्य हिस्सों में भी रेनबो ट्राउट मछली के उत्पादन की अलग-अलग आरएएस इकाई स्थापित की जाएंगी। प्रभारी वैज्ञानिक डॉ. किशोर कुणाल ने बताया कि भारी वाहनों के नहीं आने के कारण निर्माण कार्य 40 फीसदी से आगे नहीं बढ़ पाया है। पहले बारिश के कारण कार्य रूका था। अब यातायात बाधित होने के कारण निर्माण सामग्री नहीं पहुंचने के कारण कार्य नहीं हो पा रहा है।
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