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कैलाश और उसके परिवार के लिए कब्रगाह बन गया सपनों का संसार

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Thu, 21 Oct 2021 11:27 PM IST
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The world of dreams became a graveyard for Kailash and his family
सुल्ला में मकान ढहने के बाद मलबे में खोजबीन करते राहत दल के कार्मिक। फोटो: संवाद न्यूज एजेंसी - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। गुमदेश क्षेत्र के सुल्ला गांव के 32 साल के कैलाश और उसके पूरे परिवार ने प्रधानमंत्री आवास योजना के नये मकान में कई सपने संजोए थे। पक्का मकान पूरा होने से सुरक्षा की आस में वे गदगद थे। और इसी भरोसे के चलते भारी बारिश के बीच 19 अक्तूबर की रात कैलाश ने अपना आशियाना पुराने और कमजोर मकान से नए मकान में शिफ्ट किया। लेकिन इस परिवार को क्या पता था, जिस आसमानी खतरे से बचने के लिए उन्होंने ये कदम उठाया है, वही उनके पूरे परिवार के लिए जानलेवा होगा। और वे सपनों के इस आशियाने में पहला सूरज भी नहीं देख सकेंगे।
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कमजोर माली हालत वाले सुल्ला का कैलाश सिंह (32) पुत्र कुंवर सिंह पिछले साल तक दिल्ली में मजदूरी करता था। कोरोना के बाद लॉकडाउन के चलते वे अपने गांव आ गए। रौसाल क्षेत्र के प्रगतिशील किसान डीडी भट्ट के पौधालय में भी उन्होंने कुछ समय तक काम किया। कमजोर माली हालत के बावजूद कैलाश अपनी पत्नी चंचला देवी, 12 साल के बेटे रोहित सिंह और नौ साल के भुवन सिंह के साथ मेहनत-मजदूरी कर हंसीखुशी जिंदगी जी रहा था। बड़ा बेटा रोहित ढुंगराबोहरा गांव में नानिहाल में पढ़ता था, लेकिन पिछले कुछ समय से वह भी सुल्ला गांव आया था।
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कैलाश पुराने मकान में रहता था। लेकिन 17 अक्तूबर की शाम से हुई लगातार और तेज बारिश के बीच इस पुराने मकान में दरार के चलते खतरे की आहट हुई, तो उसने 19 अक्तूबर को दिन में ही पीएम आवास योजना के नए मकान में शिफ्ट करने की जिद ठान ली। आसपास के लोग बताते हैं कि पत्नी ने बारिश के बीच नए मकान में जाने के लिए मना भी किया, लेकिन नए मकान को सुरक्षित मान कैलाश ने परिवार को शिफ्टिंग के लिए मना लिया। और तीन घंटे में सारा सामान नए मकान में रख दिया गया। रात को पुराने मकान में खाना खाया और सोने के लिए नए मकान गए ही था, कि 25 मिनट के भीतर अचानक आए तेज गति के मलबे ने मकान की दीवार और छत को तोड़ते हुए इस नए मकान को कब्रगाह बना दिया। जबकि दूसरा मकान सुरक्षित है। दूसरे मकान में रहने वाला गमगीन भाई दान सिंह कहते हैं कि छोटे भाई कैलाश की जिद ने पूरे परिवार के सपनों को चकनाचूर कर दिया।
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बेटी का जन्मदिन छोड़ मौके को रवाना हुए थे एसडीएम
चंपावत। लोहाघाट तहसील के सुल्ला गांव में 19 अक्तूबर की रात को हुई वारदात की जैसे ही तहसील प्रशासन को जानकारी लगी, एसडीएम केएन गोस्वामी बेटी के जन्मदिन के कार्यक्रम को छोड़ अपने मातहतों के साथ सीधे दुर्घटनाग्रस्त गांव के लिए रवाना हो गए। सड़क बंद होने की वजह से रात को ही जेसीबी के जरिये सड़क खुलवाई और फिर आगे बढ़ते रहे। लोहाघाट से 30 किलोमीटर रौसाल तक सड़क से जाने के बाद नौ किमी पैदल चल 20 अक्तूबर की सुबह पांच बजे सुल्ला गांव पहुंचे। संवाद
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