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खास खबर: चंपावत के खेतों में लहलहाएगी दारमा घाटी की दुर्लभ काली राजमा, वैज्ञानिकों ने किया सफल प्रयोग

Tue, 23 Sep 2025 03:51 PM IST
हीरा मेहरा अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत
अमर उजाला नेटवर्क, चंपावत Published by: हीरा मेहरा Updated Tue, 23 Sep 2025 03:51 PM IST
सार

वैज्ञानिकों ने गोविंद बल्लभ पंत संस्थान और कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट के साथ मिलकर राजमा को पॉलीहाउस में उगाने में सफलता प्राप्त की है, जो दुर्लभ हिमालयी उत्पादों को नई पहचान देगा।

 

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The rare black kidney beans of Darma Valley will flourish in the fields of Champawat
सांकेतिक तस्वीर। (काली राजमा)

विस्तार

दारमा घाटी की दुर्गम ऊंचाइयों पर पैदा होने वाली काली राजमा अब चंपावत के खेतों में भी अपनी जड़ें जमाने को तैयार है। पोषक तत्वों से भरपूर इस खास किस्म की राजमा को वैज्ञानिक ऊंचे हिमालय से पाॅली हाउस में उतार लाए हैं। गोविंद बल्लभ पंत राष्ट्रीय हिमालयी पर्यावरण संस्थान अल्मोड़ा और कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट ने मिलकर एक खास प्रोजेक्ट शुरू किया है। यह दुर्लभ हिमालयी उत्पादों को नई पहचान देगा।

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कृषि वैज्ञानिक डॉ. शैलजा पुनेठा और डॉ. दीपाली तिवारी के नेतृत्व में यह महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट आगे बढ़ रहा है। इसके तहत कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट में पॉली हाउस और खुले खेतों दोनों जगह काली राजमा, कलौज, समयो, बीन और जंबू जैसे उत्पादों की पैदावार की शुरुआत की गई है।

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इन दिनों यहां के मौसम और मिट्टी में इन फसलों के बढ़ने की क्षमता पर गहन अध्ययन किया जा रहा है। विशेषज्ञ इनके स्वाद, पोषण और उत्पादन की गुणवत्ता की तुलना दारमा घाटी में होने वाली खेती से करने में जुटे हैं। अगले चरण में चंपावत के किसानों को इन बहुमूल्य फसलों की खेती के लिए प्रेरित किया जाएगा। इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी, बल्कि बाजार में दुर्लभ और पौष्टिक उत्पादों की उपलब्धता भी सुनिश्चित होगी।

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दारमा घाटी से चंपावत तक
पिथौरागढ़ जिले की दारमा वैली, समुद्र तल से लगभग 3,470 मीटर की ऊंचाई पर बसी है। यहां के गांव दर, नागलिंग, बालिंग, दुग्तू, दांतू और तिदांग जैविक और पोषक तत्वों से भरपूर काली राजमा, फाफर, हल्दी, जंबू और अन्य स्थानीय उत्पादों की खेती के लिए प्रसिद्ध हैं। इनकी खासियत है कि ये पूरी तरह प्राकृतिक तरीके से उगते हैं। अब इन्हीं उत्पादों को समुद्र तल से 1,615 से 1,670 मीटर की ऊंचाई पर बसे चंपावत में प्रायोगिक तौर पर उगाने की कोशिश हो रही है।

 

कृषि विशेषज्ञों ने धारचूला से लाए उत्पादों के बीजों को पाॅली हाउस के साथ खुले में भी लगाया है। तैयार होने के बाद इन उत्पादों के अंतर को देखा जाएगा। दारमा में मिलने वाले उत्पादों और यहां पॉली हाउस तथा खुले में लगाए गए उत्पादों की गुणवत्ता परखी जाएगी। जल्द इसे स्थानीय किसानों के लिए उपलब्ध कराने का प्रयास है। - डॉ. दीपाली तिवारी, प्रभारी, कृषि विज्ञान केंद्र लोहाघाट, चंपावत

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