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वन विभाग की कार्यशैली पर फिर सवाल

Sat, 24 Jun 2017 11:13 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो टनकपुर (चंपावत)।
अमर उजाला ब्यूरो टनकपुर (चंपावत)। Updated Sat, 24 Jun 2017 11:13 PM IST
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The question of the functioning of the forest department
डीएफओ का घेराव करते ग्रामीण - फोटो : अमर उजाला

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बाघ के महिला को मारने की तीसरी घटना ने वन विभाग की कार्यशैली पर फिर सवालिया निशान लगाया है। ग्रामीणों द्वारा बार-बार वन्यजीवों से सुरक्षा की गुहार लगाने के बाद भी विभाग ने अब तक कोई सुरक्षात्मक कदम नहीं उठाए हैं। बाघ को पकड़ने के प्रयास भी हवाई साबित हुए हैं। दो महिलाओं की जान लेने और एक बार बस्तिया गांव में बाघ के घुसने की घटना के बाद भी वन विभाग लापरवाह बना रहा और शनिवार को बाघ ने फिर एक और महिला को निवाला बना डाला।

हल्द्वानी वन प्रभाग के शारदा रेंज और चंपावत वन प्रभाग के बूम रेंज में वन्यजीवों का खतरा बढ़ गया है। बाघ, तेंदुए और हाथियों के हमले की कई घटनाओं के बाद जंगल से लगे गांवों के लोगों में वन्यजीवों का ऐसा खौफ पैदा हो गया है कि शाम होते ही लोग घर से बाहर निकलने में डर रहे हैं। बस्तिया के अलावा उचौलीगोठ, थ्वालखेड़ा, गैंड़ाखाली, चिलियाघोल, नायकगोठ, आमबाग, विचई गांवों में कभी तेंदुए तो कभी बाघ के दिखाई देने से लोग दहशत में हैं। वहीं, हाथियों के झुंडों द्वारा गांवों में फसल रौंदकर किसानों की मेहनत पर पानी फेरने की घटना आम हो गई है। बाघ द्वारा महिलाओं की जान लेने की इस तीसरी घटना से जहां दहशत और बढ़ गई है, वहीं वन विभाग की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए हैं।
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बता दें कि इससे पहले बाघ ने 26 फरवरी को शारदा रेंज के द्वान बीट के जंगल में बोरागोठ निवासी केशर राम की पत्नी सोना देवी (55) और 25 अप्रैल को आमबाग निवासी वन कर्मी धन सिंह की पत्नी राधा (46) को भी बाघ ने शारदा रेंज के द्वान बीट में ही निवाला बनाया था। इसके अलावा आठ अप्रैल को एक बाघिन बस्तिया गांव में घुस आई थी, जो करीब 48 घंटे तक गांव के बाग में डेरा जमाए रही, लेकिन वन विभाग उसे पकड़ने का नाकाम रहा। ऐसा नहीं है कि वन विभाग ने इन घटनाओं के बाद हमलावर बाघ को पकड़ने कोशिश नहीं की, लेकिन विभाग की हर कोशिश नाकाम साबित हुई। बाघ का मूवमेंट पता लगाने को जंगल में सीसी कैमरे तो लगाए, लेकिन उसकी फुटेज देखने के लिए विभाग के पास यहां कोई व्यवस्था नहीं है। बाघ को पकड़ने के लिए दो पिंजरे भी लगाए, लेकिन बाघ को पकड़ने में विभाग की कोशिश सफल नहीं हो पाई है। शारदा रेंज के रेंजर ख्याली राम का कहना हैै कि बाघ को पकड़ने के लिए लगाए गए पिंजरे अब भी लगे हैं।  
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ट्रैंकुलाइजर गन होती तो पकड़ा जा सकता था हमलावर बाघ
टनकपुर। वन विभाग के पास मौके पर ट्रैंकुलाइजर गन होती तो शनिवार को हमलावर बाघ को पकड़ा जा सकता था। क्षेत्र में वन्यजीवों के हमले की कई घटनाएं हो चुकी हैं, मगर यहां विभाग के पास ट्रैंकुलाइजर गन जैसे उपकरण ही नहीं हैं। शनिवार को बूम रेंज के कंपार्टमेंट 15 के जंगल में बाघ द्वारा बस्तिया की महिला जानकी को मारने सूचना पर पहुंची पुलिस और वन विभाग की टीम ने घटना स्थल के आसपास कांबिंग की तो हमलावर बाघ घटना स्थल से दो सौ मीटर दूर ऊपर पहाड़ी पर बैठा था। टीम कुछ देर तक बाघ को देखती रही और फिर उसे भगाने के लिए हवाई फायर करना पड़ा। टीम के पास उस वक्त ट्रैंकुलाइजर गन होती तो हवाई फायर कर भगाने के बजाय बाघ से बेहोश कर पकड़ा जा सकता था।

       
डीएफओ के लिखित आश्वासन पर माने ग्रामीण       
टनकपुर। बाघ द्वारा महिला को मौत के घाट उतारने की घटना से गुस्साए ग्रामीणों ने न सिर्फ सुरक्षात्मक कदम उठाने की मांग की बल्कि मृतका के पति को विभाग में नौकरी देने, परिवार को 20 लाख रुपये मुआवजा और बाघ को आदमखोर घोषित कर मारने की मांग भी रखी है। ग्राम प्रधान नवीन सिंह, पूर्व प्रधान सरोज देवी, जिला पंचायत सदस्य उर्मिला चंद, मिलाप सिंह, पूर्व प्रधान देबराम, ब्लॉक में सांसद प्रतिनिधि नरेश सकारी, माधवी देवी, मुन्नी देवी, गौरी देवी आदि ने डीएफओ एके गुप्ता से मांगों को लेकर लिखित आश्वासन देने की शर्त रखी। डीएफओ ने मांगों पर नियमानुसार उचित कार्रवाई करने का लिखित आश्वासन दिया। इसके बाद ही जाम खुल सका।

 
जाम से परेशान रहे यात्री
टनकपुर। बाघ द्वारा महिला को मारने की घटना के बाद ग्रामीणों के गुस्से से यात्रियों को खासी परेशानी झेलनी पड़ी। टनकपुर-चंपावत मार्ग पर जाम स्थल के दोनों ओर करीब एक किमी तक वाहनों की लंबी लाइन लग गई थी। यात्रियों को गर्मी में छह घंटे मार्ग पर खड़े रहना पड़ा। श्री सुखमणि साहिब लुधियाना से रीठा साहिब जा रहे सिख श्रद्धालुुओं की टोली भी जाम में छह घंटे फंसी रही। उन्होंने मार्ग किनारे बैठकर गुरु का पाठ पढ़कर जाम खुलने का इंतजार करना पड़ा।


गुस्साए ग्रामीणों ने डीएफओ के आने के बाद उठाने दिया शव
टनकपुर। चंपावत वन प्रभाग के डीएफओ एके गुप्ता के मौके पर पहुंचने के बाद ही गुस्साए ग्रामीणों ने घटना स्थल से महिला का शव उठाने दिया। वन विभाग एवं पुलिस ने शव कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। बता दें कि घटना से गुस्साए ग्रामीण डीएफओ के मौके पर आने की जिद पर अड़े थे। वे इतने गुस्से में थे कि डीएफओ से पहले घटना स्थल पर पहुंचे बूम रेंज के रेंजर बीके महरा को खूब खरी-खोटी सुनाई।
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