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मजबूत होगी स्वरोजगार के प्रशिक्षण की बुनियाद
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चंपावत। कोरोना महामारी के बीच रिवर्स पलायन की संभावनाओं को टटोलने के लिए कौशल विकास जरूरी है। लेकिन स्वरोजगार का हुनर देने वाले संस्थान भारतीय स्टेट बैंक का आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) के पास खुद आधारभूत ढांचा नहीं था। लेकिन जल्द ही इस कमी को दूर कर लिया जाएगा। आरसेटी के अपने भवन के लिए का सपना पूरा हो रहा है। बीएडीपी से 91.45 लाख और राष्ट्रीय ग्रामीण विकास संस्थान से 50 लाख रुपये मिल गए हैं। इसी के साथ अगले महीने से प्रशिक्षण के लिए आरसेटी का आवासीय भवन का निर्माण शुरू हो जाएगा। फिलहाल किराये में संचालित होने से युवाओं को आवासीय सुविधा मिलने में दिक्कत आती है।
आरसेटी निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि जूप में 10 नाली जमीन पर 3.42 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आरसेटी के भवन के लिए 141.45 लाख रुपये मिल चुके हैं। प्रस्तावित इमारत में प्रशासनिक व प्रशिक्षण भवन के अलावा 48 बैड का बालक व 24 बैड का बालिकाओं का आवास बनेगा। भवन के निर्माण के लिए 1.82 करोड़ बीएडीपी से, राष्ट्रीय ग्राम विकास संस्थान से एक करोड़ और बकाया 60 लाख रुपये खुद एसबीआई खर्च करेगा। इसी के साथ आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा वाले जिलों में पौड़ी, बागेश्वर, अल्मोड़ा के बाद चंपावत सूबे का चौथा जिला हो जाएगा।
स्वरोजगार पाते हैं 70 प्रतिशत प्रशिक्षणार्थी
ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता व कौशल विकास के लिए स्थापित आरसेटी कौशल विकास से संबंधित तमाम गतिविधियों के संचालन के लिए नोडल एजेंसी है। आरसेटी के निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि छह दिन से 45 दिन तक के रोजगारपरक प्रशिक्षण के जरिये युवाओं को हुनरमंद बनाने वाली यह संस्था 70 फीसदी प्रशिक्षित लोगों को स्वरोजगार देती है। 2011 से शुरू हुए चंपावत जिले के इस संस्थान में अब तक कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, सिलाई टेलरिंग, कृषि फार्मिंग, डेरी, खाद्य प्रसस्करण, मौन पालन आदि के 119 प्रशिक्षण शिविर के जरिए 3165 युवाओं को प्रशिक्षण दे चुका है। इन प्रशिक्षित लोगों में से 2103 को स्वरोजगार दिया जा चुका है।
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आरसेटी निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि जूप में 10 नाली जमीन पर 3.42 करोड़ रुपये की लागत से बनने वाले आरसेटी के भवन के लिए 141.45 लाख रुपये मिल चुके हैं। प्रस्तावित इमारत में प्रशासनिक व प्रशिक्षण भवन के अलावा 48 बैड का बालक व 24 बैड का बालिकाओं का आवास बनेगा। भवन के निर्माण के लिए 1.82 करोड़ बीएडीपी से, राष्ट्रीय ग्राम विकास संस्थान से एक करोड़ और बकाया 60 लाख रुपये खुद एसबीआई खर्च करेगा। इसी के साथ आवासीय प्रशिक्षण की सुविधा वाले जिलों में पौड़ी, बागेश्वर, अल्मोड़ा के बाद चंपावत सूबे का चौथा जिला हो जाएगा।
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स्वरोजगार पाते हैं 70 प्रतिशत प्रशिक्षणार्थी
ग्रामीण क्षेत्रों में उद्यमिता व कौशल विकास के लिए स्थापित आरसेटी कौशल विकास से संबंधित तमाम गतिविधियों के संचालन के लिए नोडल एजेंसी है। आरसेटी के निदेशक आरपी टम्टा ने बताया कि छह दिन से 45 दिन तक के रोजगारपरक प्रशिक्षण के जरिये युवाओं को हुनरमंद बनाने वाली यह संस्था 70 फीसदी प्रशिक्षित लोगों को स्वरोजगार देती है। 2011 से शुरू हुए चंपावत जिले के इस संस्थान में अब तक कंप्यूटर, मोबाइल रिपेयरिंग, सिलाई टेलरिंग, कृषि फार्मिंग, डेरी, खाद्य प्रसस्करण, मौन पालन आदि के 119 प्रशिक्षण शिविर के जरिए 3165 युवाओं को प्रशिक्षण दे चुका है। इन प्रशिक्षित लोगों में से 2103 को स्वरोजगार दिया जा चुका है।
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