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Champawat News: विश्व बैंक परियोजना में शामिल कर बाटनागाड़ पर बनाया जाएगा पुल
Thu, 13 Jul 2023 10:40 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
संवाद न्यूज एजेंसी, चम्पावत
Updated Thu, 13 Jul 2023 10:40 PM IST
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पूर्णागिरि धाम मार्ग में किरोड़ा नाले के उफान पर आने से फंसे यात्री। संवाद
चंपावत। पूर्णागिरि धाम को जाने वाले मार्ग पर अक्सर मुसीबत बनने वाले बाटनागाड़ का इलाज अब विश्व बैंक करेगा। धार्मिक और सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण इस जगह प्रस्तावित पुल का निर्माण विश्व बैंक परियोजना से कराया जाएगा। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश के बाद जिला प्रशासन जल्द ही प्रस्ताव तैयार कर शासन को भेजेगा।
बाटनागाड़ का नाला पूर्णागिरि धाम के साथ नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण है। नेपाल सीमा से लगी टनकपुर-जौलजीबी सड़क और टनकपुर ककरालीगेट-भैरव मंदिर सड़क पर आवाजाही के लिए यहीं से होकर गुजरना पड़ता है। 610 मीटर लंबे बाटनागाड़ का अधिकांश हिस्सा बरसात के अधिकांश समय रोखड़ में तब्दील हो जाता है। श्यामलाताल के पास बिसौरिया से होने वाले भूस्खलन से यहां पहुंचने वाले मलबे से सड़क को भारी नुकसान होता है।
इसे देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस साल नौ मार्च को बाटनागाड़ पर पुल के निर्माण का एलान किया था। सीएम के एलान के बाद मई में लोनिवि ने शुरुआती सर्वे के लिए 91.56 लाख रुपये के बजट के लिए शासन पत्र भेजा था। बजट नहीं मिलने से अभी तक सर्वे शुरू नहीं हो सका है। अब इस पुल में वित्तीय मदद के मद्देनजर विश्व बैंक की परियोजना में इसे शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 12 जुलाई को डीएम को इस संबंध में प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं।
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कोट
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश के बाद बाटनागाड़ नाले पर पुल निर्माण की योजना को विश्व बैंक परियोजना में शामिल करने के लिए प्रस्ताव एक सप्ताह में तैयार कर लिया जाएगा। जिला प्रशासन के माध्यम से प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। - बीसी पंत, ईई, लोनिवि, चंपावत।
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किरोड़ा नाले ने फिर रोकी राह, एक घंटा ठप रहा यातायात
टनकपुर (चंपावत)। पर्वतीय क्षेत्र में बारिश से बृहस्पतिवार की दोपहर मां पूर्णागिरि धाम मार्ग पर किरोड़ा नाला फिर उफान पर आया। इससे पैदल और दोपहिया वाहनों की आवाजाही करीब एक घंटे तक ठप रही। हालांकि चार पहिया वाहन चालक जोखिम उठाकर आवाजाही करते रहे। बूम चौकी इंचार्ज सोनू बोहरा ने बताया कि नाले का जलस्तर बढ़ने की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया था। एक घंटे बाद जलस्तर घटने पर आवाजाही सुचारु कराई गई। बता दें कि पहाड़ी क्षेत्र में बारिश होते ही किरोड़ा नाला उफान पर आ जाता है जिससे पूर्णागिरि धाम मार्ग पर आवागम ठप होने के साथ ही गांवों का सड़क संपर्क कट जाता है। संवाद
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बाटनागाड़ का नाला पूर्णागिरि धाम के साथ नेपाल सीमा से लगे क्षेत्रों के मद्देनजर बेहद महत्वपूर्ण है। नेपाल सीमा से लगी टनकपुर-जौलजीबी सड़क और टनकपुर ककरालीगेट-भैरव मंदिर सड़क पर आवाजाही के लिए यहीं से होकर गुजरना पड़ता है। 610 मीटर लंबे बाटनागाड़ का अधिकांश हिस्सा बरसात के अधिकांश समय रोखड़ में तब्दील हो जाता है। श्यामलाताल के पास बिसौरिया से होने वाले भूस्खलन से यहां पहुंचने वाले मलबे से सड़क को भारी नुकसान होता है।
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इसे देखते हुए मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस साल नौ मार्च को बाटनागाड़ पर पुल के निर्माण का एलान किया था। सीएम के एलान के बाद मई में लोनिवि ने शुरुआती सर्वे के लिए 91.56 लाख रुपये के बजट के लिए शासन पत्र भेजा था। बजट नहीं मिलने से अभी तक सर्वे शुरू नहीं हो सका है। अब इस पुल में वित्तीय मदद के मद्देनजर विश्व बैंक की परियोजना में इसे शामिल किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने 12 जुलाई को डीएम को इस संबंध में प्रस्ताव बनाने के निर्देश दिए हैं।
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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के आदेश के बाद बाटनागाड़ नाले पर पुल निर्माण की योजना को विश्व बैंक परियोजना में शामिल करने के लिए प्रस्ताव एक सप्ताह में तैयार कर लिया जाएगा। जिला प्रशासन के माध्यम से प्रस्ताव को शासन को भेजा जाएगा। - बीसी पंत, ईई, लोनिवि, चंपावत।
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किरोड़ा नाले ने फिर रोकी राह, एक घंटा ठप रहा यातायात
टनकपुर (चंपावत)। पर्वतीय क्षेत्र में बारिश से बृहस्पतिवार की दोपहर मां पूर्णागिरि धाम मार्ग पर किरोड़ा नाला फिर उफान पर आया। इससे पैदल और दोपहिया वाहनों की आवाजाही करीब एक घंटे तक ठप रही। हालांकि चार पहिया वाहन चालक जोखिम उठाकर आवाजाही करते रहे। बूम चौकी इंचार्ज सोनू बोहरा ने बताया कि नाले का जलस्तर बढ़ने की सूचना मिलते ही मौके पर पुलिस कर्मियों को तैनात कर दिया गया था। एक घंटे बाद जलस्तर घटने पर आवाजाही सुचारु कराई गई। बता दें कि पहाड़ी क्षेत्र में बारिश होते ही किरोड़ा नाला उफान पर आ जाता है जिससे पूर्णागिरि धाम मार्ग पर आवागम ठप होने के साथ ही गांवों का सड़क संपर्क कट जाता है। संवाद