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7 मिनट चला देवीधुरा में ‘पत्थर युद्ध’
ब्यूरो/अमर उजाला, देवीधुरा (चंपावत)।
Updated Thu, 18 Aug 2016 10:29 PM IST
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देवीधूरा का बग्वाल मेला
- फोटो : अमर उजाला
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देवीधुरा (चंपावत)। देवीधुरा के खोलीखांड दूबाचौड़ा मैदान में बृहस्पतिवार को बारिश के बीच ऐतिहासिक बग्वाल हुई। अपरान्ह 2.17 बजे मंदिर के पंडित कीर्ति बल्लभ शास्त्री और भुवन जोशी की शंखध्वनि के साथ बग्वाल का श्रीगणेश हुआ। बग्वाल महज 7 मिनट चली। यह बग्वाल के न्यूनतम समय का रिकॉर्ड है।
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इससे पहले 2008 में बग्वाल करीब 8 मिनट तक खेली गई थी। इस रोमांचित करने वाले खूनी युद्ध में 59 बग्वाली वीर सहित कुल 70 लोग चोटिल हुए। पहली बार अलग-अलग रंग के साफे के साथ सजे-धजे बग्वाली वीरों का रंग-रूप देखते ही बनता था। करीब एक लाख लोग बग्वाल के विहंगम नजारे के साक्षी बने।
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मैदान में प्रवेश करने से पहले सभी चारों खामों के योद्धाओं ने मां वज्र बाराही का जयकारा किया। सबसे पहले वालिग खाम के बग्वाली वीरों ने मुखिया बद्री सिंह (60) के नेतृत्व में रणक्षेत्र में दस्तक दी। उसके बाद गंगा सिंह (71) के नेतृत्व में चम्याल खाम, फिर लमगड़िया खाम के वीरेंद्र लमगड़िया (36) और अंत में त्रिलोक सिंह बिष्ट (87) के नेतृत्व में गहड़वाल खाम के वीरों ने प्रवेश किया। मां व्रज बाराही के मंदिर की परिक्रमा करने के बाद चारों खामों के वीरों ने अपना-अपना मोर्चा संभाला।
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वालिक खाम ने फल-फूल बरसा कर बग्वाल का आगाज किया। वालिग खाम के साथ मैदान की दक्षिण दिशा में लमगड़िया खाम मौजूद था, जबकि दूसरी दिशा में चम्याल और गहड़वाल खाम मोर्चा ले रहा था। बमुश्किल 2 मिनट बाद सभी चारों खामों ने पत्थर बरसाना शुरू किया।
मंदिर के पीत वस्त्रधारी पुजारी धर्मानंद ने 2.24 बजे रणक्षेत्र में पहुंचकर चंवर झूलाकर बग्वाल समाप्त होने का संकेत किया। चारों खामों के योद्धाओं ने आपस में गले मिल कुशलक्षेम पूछी। सकुशल वापसी के लिए मां के दरबार में मत्था टेका। इस बार बग्वाल पिछले साल से तीन मिनट कम हुई। 59 बग्वाली योद्धाओं सहित कुल 70 लोग घायल हुए, जिनका चिकित्सा शिविर में इलाज किया गया।
लमगड़िया खाम के साथ मंदिर कमेटी के मुख्य संरक्षक लक्ष्मण सिंह लमगड़िया, अध्यक्ष खीम सिंह लमगड़िया, उपाध्यक्ष आन सिंह लमगड़िया, तारा सिंह, उमेद सिंह, किशन सिंह, लाल सिंह, दीवान सिंह, वालिग खाम की ओर से राम सिंह कैड़ा, मदन सिंह, शेर सिंह, गोपाल सिंह, राजू बिष्ट, चेतन भैय्या, चम्याल खाम में लाल सिंह चम्याल, बिशन सिंह, विनोद चम्याल, जगदीश सिंग्वाल, गौरव सिंग्वाल और गहड़वाल खाम की ओर से जोध सिंह बिष्ट, डुंगर सिंह बिष्ट, मोहन बिष्ट, दिनेश चम्याल, बद्री सिंह बिष्ट, खुशाल सिंह, माधो सिंह, गोपाल बिष्ट, लाल सिंह, पान सिंह आदि प्रमुख योद्धा थे। वैसे करीब 200 लोगों ने बग्वाल में शिरकत की।
बारिश के बावजूद काफी लोग मां बाराही मंदिर की गुंबद में चढ़कर भी बग्वाल का नजारा देखते रहे। खोलीखांड दूबाचौड़ के आसपास के मकानों की छतें बारिश के बावजूद दर्शकों से खचाखच भरी थी। बग्वाल शुरू होने से पूर्व पंडित कीर्ति शास्त्री और गोकुल जोशी ने मां बाराही देवी की पूजा-अर्चना की। पूजा में चारों खामों के प्रतिनिधि (लमगड़िया खाम के वीरेंद्र सिंह, लच्छू सिंह लमगड़िया, वालिग के बद्री सिंह, दीवान सिंह, गहड़वाल के रमेश सिंह, पंकज सिंह और चम्याल खाम के लाल सिंह, गंगा सिंह एवं खुशाल सिंह) शामिल हुए। बग्वाल से पूर्व योद्धाओं ने मंदिर की परिक्रमा की।
बग्वाल देखने को नैनीताल के पूर्व सांसद केसी सिंह बाबा, महेंद्र पाल, दर्जा मंत्री दिनेश कुंजवाल, जिला पंचायत अध्यक्ष खुशाल सिंह अधिकारी, चंपावत दुग्ध संघ अध्यक्ष अमर सिंह कोटियाल, भीमताल के ब्लॉक प्रमुख हरीश बिष्ट, नैनीताल के पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष कुंवर सिंह बिष्ट, कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष भगीरथ भट्ट, लक्ष्मीकांत पांडेय के अलावा डीएम डा.अहमद इकबाल, एसपी दिलीप सिंह कुंवर, एडीएम जेएस राठौर आदि प्रमुख लोग शामिल थे।
- 1 लाख से अधिक लोग खोलीखांड दूबचौड़ा मैदान में खूनी युद्ध के साक्षी बने।
- 1 मानव के रक्त के बराबर खून बहने का एहसास होने पर बग्वाल पर लगता है विराम।