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तनाव बढ़ा, बाबा और मंदिर समिति के बीच टकराव का अंदेशा, पुलिस बल बढ़ाया

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sun, 08 Aug 2021 11:15 PM IST
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Tension increased, fear of confrontation between Baba and temple committee, increased police force
लोहाघाट में धर्मशाले में कब्जे का आरोप लगाते हुए आमरण अनशन में बैठे स्वामी ऋषेश्वरानंद। - फोटो : LOHAGHAT
लोहाघाट (चंपावत)। ऋषेश्वर मंदिर के धर्मशाला विवाद में तनाव बढ़ गया है। नव निर्मित धर्मशाला पर मंदिर समिति की ओर से कब्जा करने का आरोप लगाते हुए मंदिर के महंत स्वामी मोहनानंद के शिष्य ऋषेश्वारनंद बृहस्पतिवार से आमरण अनशन पर हैं। अनशकारी संत धर्मशाला के उद्घाटन कार्यक्रम में रोक नहीं लगाए जाने पर प्राण त्यागने की चेतावनी दे चुके हैं। जबकि दूसरी तरफ मंदिर समिति धर्मशाला उद्घाटन पर प्रशासनिक अनुमति नहीं मिलने के बाद अब सोमवार को धर्मशाला के शुद्धीकरण करने की बात कह रहा है। किसी तरह के टकराव के हालात बनने से रोकने के लिए भारी संख्या में पुलिस बल तैनात किया गया है। लोहाघाट के अलावा आसपास के थानों से भी पुलिस बल मंगाया गया है।
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मंदिर प्रबंधन समिति ने नौ अगस्त को ऋषेश्वर मंदिर में नव निर्मित धर्मशाला के उद्घाटन का एलान किया था। जिस पर शनिवार को एसडीएम अनिल गर्ब्याल ने ऋषेश्वर प्रबंधन समिति को उद्घाटन की अनुमति देने से इंकार कर दिया था। उन्होंने थानाध्यक्ष की चालानी रिपोर्ट के आधार पर ये निर्णय लिया था। साथ ही शांति भंग की आशंका को देखते हुए उप जिला मजिस्ट्रेट की अदालत पहले ही दोनों पक्षों के चार लोगों से निजी बंध पत्र भरवा चुकी है। आमरण अनशन कर रहे स्वामी ऋषेश्वरानंद नेे कहा कि अगर मंदिर समिति धर्मशाला का उद्घाटन करेगी, तो वे प्राण त्यागने को बाध्य होंगे। और इसी सारी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी। इधर डॉ. ऋषभ जोशी ने बताया कि अनशन कर रहे ऋषेश्वरानंद की सेहत ठीक है। वहीं महंत स्वामी मोहनानंद और उनके वकील यतीश जोशी ने रविवार को एसपी को ज्ञापन दे धर्मशाला का उद्घाटन न करने देने और सुरक्षा का आग्रह किया।
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नव निर्मित धर्मशाला का शुद्धीकरण कराएगी मंदिर समिति
लोहाघाट (चंपावत)। ऋषेश्वर मंदिर प्रबंधन समिति सोमवार को नव निर्मित धर्मशाला का शुद्धीकरण कराएगी। मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह मेहता का कहना है कि समिति कोविड नियमों का पालन करते हुए धर्मशाला शुद्धीकरण का कार्यक्रम कराएगी। सुबह देव डांगरों का स्नान, हवन और धर्मशाला के शुद्धीकरण के बाद प्रसाद बांटा जाएगा।
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कोट
ऋषेश्वर मंदिर की नव निर्मित धर्मशाला के उद्घाटन की अनुमति नहीं है। उद्घाटन नहीं करने दिया जाएगा। अलबत्ता कोविड नियमों का पालन करते हुए मंदिर में पूजा-अर्चना की जा सकती है।

लोकेश्वर सिंह,
एसपी, चंपावत।
ये है विवाद की वजह
लोहाघाट (चंपावत)। लोहावती नदी के किनारे स्थित ऋषेश्वर मंदिर आस्था का प्रतीक है। मंदिर परिसर में गीताभवन नाम से धर्मशाला होती थी। स्वामी मोहनानंद और 12 गांवों के लोगों की सहमति से करीब एक साल पहले गीता भवन धर्मशाला के जीर्णोद्धार का निर्णय लिया गया था। धर्मशाला निर्माण के लिए सभी 12 गांव और नगर में समितियों का गठन कर लोगों से सहयोग जुटाया गया। और धन की जरूरत होने पर विधायक और नगर पंचायत ने भी आर्थिक सहयोग कर कार्य पूरा कराया गया। धर्मशाला की छत पडने के बाद मंदिर समिति को रजिस्टर्ड करने और धर्मशाला के स्वामित्व को लेकर स्वामी और मंदिर समिति के बीच मनमुटाव हो गया। और अभी ये मामला अदालत में विचाराधीन है। बाबा मोहनानंद ने मंदिर स्थित आश्रम में लगा बिजली का मीटर उखाड़ने, जंजीर डालकर कार को मंदिर परिसर में आने से रोकने, गीता भवन का नाम बदल कर कब्जा करने का आरोप लगाया। जबकि मंदिर समिति के अध्यक्ष प्रहलाद सिंह मेहता इन सभी आरोपों केा बेबुनियाद बताते हैं। उनका कहना है कि यह आश्रम 12 गांवों और क्षेत्र के लोगों का है।

लोहाघाट ऋषेश्वर मंदिर में नव निर्मित धर्मशाला।

लोहाघाट ऋषेश्वर मंदिर में नव निर्मित धर्मशाला।- फोटो : LOHAGHAT

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