Coronavirus in uttarakhand: क्वारंटीन अवधि पूरी होने के चंद घंटों बाद किशोरी की मौत, मचा हड़कंप
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चंपावत में क्वारंटीन में रह चुकी पाटी ब्लॉक की एक किशोरी की मंगलवार रात एकाएक मौत हो गई। 16 साल की यह किशोरी 13 मई को काशीपुर से अपने मामा-मामी के साथ अपने गांव बालातड़ी पहुंची थी और मंगलवार शाम पांच बजे ही उन्होंने क्वारंटीन अवधि पूरी की थी।
सीएमओ डॉ. आरपी खंडूरी ने मौत की वजह मिर्गी का दौरा पड़ना बताया है। साथ ही एहतियातन चंपावत से स्वास्थ्य विभाग की टीम को भेज कोरोना का सैंपल भी लिया गया है। बुधवार शाम को शव को पोस्टमार्टम के लिए लोहाघाट लाया गया। अलबत्ता कोरोना महामारी के बीच किशोरी की मौत से हड़कंप मचा है। बालातड़ी गांव की किशोरी काशीपुर में अपने ननिहाल में रहकर इंटर की पढ़ाई करती थी। 13 मई को वह अपने मामा-मामी और दो अन्य लोगों के साथ गांव पहुंची थी।
राजस्व उप निरीक्षक प्रदीप जुकरिया ने बताया कि सभी पांच लोगों को 13 मई से सात दिन के लिए जीआईसी में सात अन्य लोगों के साथ क्वारंटीन किया गया था। 19 मई को स्वास्थ्य परीक्षण के बाद उन्हें होम क्वारंटीन किया गया। यह अवधि मंगलवार शाम पांच बजे पूरी हो गई। इस बीच, रात को एकाएक दौरा पड़ने से किशोरी की तबीयत बिगड़ गई। अस्पताल पहुंचने से पहले ही उसने दम तोड़ दिया।
इधर, सीएमओ का कहना है कि किशोरी में खून की कमी थी और उसे मिर्गी का दौरा पड़ा था। मुंह से झाग बाहर नहीं निकल पाने से उसकी मौत हुई है। अलबत्ता चंपावत से डॉ. मनीष बिष्ट, डॉ. जीएस चौहान, लैब तकनीशियन उमेद सिंह बसेड़ा और बबीता गोस्वामी की टीम ने मौके पर जाकर एहतियातन कोरोना सैंपल भी लिया। बता दें कि इससे पूर्व बरेली से 23 मई को चंपावत के एक गांव में होम क्वारंटीन की गई महिला की भी मौत हो चुकी है। वह बुजुर्ग महिला काफी समय से बीमार थी और इलाज कर लौटी थी। मौत के बाद लिया गया महिला का कोरोना सैंपल निगेटिव आया था।
किशोरी की मौत का कोरोना से लेना-देना नहीं : डीएम
डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय का कहना है कि किशोरी की मौत का कोरोना वायरस से कोई लेना-देना नहीं है। किशोरी में खून की कमी थी और मंगलवार रात उसे एकाएक मिर्गी का दौरा पड़ा, जिसके बाद उसकी तुरंत मौत हो गई। अलबत्ता एहतियातन किशोरी का कोरोना का सैंपल लिया गया है।
जिले में बने हैं 741 क्वारंटीन सेंटर
कोरोना संक्रमण से बचाव को लेकर चंपावत जिले में 741 क्वारंटीन सेंटर बनाए गए हैं। जिला अर्थ एवं संख्याधिकारी ने बताया कि इन सेंटरों में कुल 10765 प्रवासी लोग रह रहे हैं। 4 मई के बाद दूसरे राज्यों से आने वाले प्रवासियों की संख्या में खासा इजाफा हुआ है। इन केंद्रों की जिम्मेदारी मुख्य रूप से ग्राम प्रधान, आंगनबाड़ी, आशा वर्कर्स व शिक्षक को सौंपी गई है।