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चाय बागान से चंपावत के पर्यटन को लगेंगे चार चांद, मंजूर हुए 1.05 करोड़ रुपये

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Wed, 10 Feb 2021 10:50 PM IST
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Tea Farming In champawat
चंपावत के सिलिंगटाक चाय बागान का निरीक्षण करते प्रदेश के मंत्री सुबोध उनियाल और विधायक कैलाश गह? - फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। महक और स्वाद के लिए चंपावत की चाय प्रदेशभर में मशहूर है। यहां की जैविक चाय की देश से बाहर भी खूब मांग है। पिछले साल यूएसए के यंग माउंटेन टी संस्था ने यहां से चाय मंगवाई थी। अब यह चाय सिर्फ स्वाद नहीं बल्कि पर्यटन को भी बढ़ाएगी। चंपावत के सिलिंगटाक चाय बागान को ईको टूरिज्म से जोड़ने के लिए वित्तीय मंजूरी मिल गई है। सोमवार को शासन ने धन मंजूर कर दिया है। इसके तहत टी बुटीक और टी पार्लर सहित कई काम कराए जाएंगे।
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मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने पिछले साल सिलिंगटाक चाय बागान क्षेत्र को टी टूरिज्म के रूप में विकसित करने का एलान किया था। अब इस घोषणा को मूर्त रूप दिया जा रहा है। डीएम सुरेंद्र नारायण पांडेय ने बताया कि इसके लिए सोमवार को एक करोड़ पांच लाख रुपये मंजूर हुए हैं। चाय विकास बोर्ड के चंपावत के प्रभारी डेसमंड बर्कबेक ने बताया कि सिलिंगटाक के 21 हेक्टेयर क्षेत्र में से चार हेक्टेयर को टी टूरिज्म के रूप में विकसित किया जाएगा। यहां के चाय बागान के दीदार करने वाले सैलानियों को जैविक टी कैफे और टी बुटीक के जरिये स्थानीय चाय पिलाई जाएगी। चाय बागान और पहाड़ की वादियों को निहारने वाले सैलानियों से शुल्क वसूला जाएगा। भविष्य के लिए इसी जगह संग्रहालय और योग ध्यान केंद्र भी बनाने का प्रस्ताव है।
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ये काम होंगे
चाय बागान में सुरक्षा के मद्देनजर तारबाड़ किया जाएगा।
पर्यटकों के चलने के लिए लिए रास्ता भी बनाया जाएगा।
पुराने हटों का जीर्णोद्धार होगा।
जैविक टी कैफे और टी बुटीक का निर्माण।
व्यू प्वाइंट बनेंगे, जिससे चंपावत घाटी का नजारा देखा जा सकेगा।
इस साल 47 हजार किलो चाय का उत्पादन हुआ
चंपावत। जिले में डेढ़ दशक में चाय बागानों का तेजी से विस्तार हुआ है। चाय के रकबे को बढ़ाकर दोगुना कर दिया गया है। अभी सिलिंगटाक, छीड़ापानी, मंच, दुबड़ जैनल, नरसिंहडांडा, चौकी, सिमल्टा, फुलारागांव, लमाई आदि स्थानों पर 232.20 हेक्टेयर में चाय के बागान हैं। इनमें 47 क्विंटल चाय का उत्पादन हुआ। इन बागानों से 454 मजदूरों को काम मिल रहा है। इनमें से 95 प्रतिशत महिलाएं कार्यरत हैं।
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