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टनकपुर-बनबसा में रसोई गैस का संकट, उपभोक्ता परेशान
अमर उजाला ब्यूरो, टनकपुर (चंपावत)।
Updated Sat, 12 Aug 2017 11:08 PM IST
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रसाेइ गैस के सिलेंडर
- फोटो : अमर उजाला
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टनकपुर (चंपावत)। क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडरों की आपूर्ति प्रभावित होने से इन दिनों गैस के लिए उपभोक्ता खासी परेशानी झेल रहे हैं। इस माह अब तक 3672 गैस सिलेंडरों की मांग के सापेक्ष 1422 सिलेंडरों की ही आपूर्ति हो पाई है। एजेंसी में 1789 सिलेंडरों का बैकलॉग है। एक सप्ताह तक हालात ऐसे ही रहे तो रसोई गैस का भारी संकट पैदा हो सकता है।
स्थानीय गैस एजेंसी पर टनकपुर-बनबसा के 14 हजार से अधिक उपभोक्ता निर्भर हैं। हर माह करीब 26 से ज्यादा ट्रक यानि साढ़े सात हजार से अधिक सिलेंडरों की खपत होती है, लेकिन इस बार अब तक सिलेंडरों की आपूर्ति बहुत कम हो पाई है। होम डिलीवरी सुविधा भी प्रभावित होने से लोग एजेंसी में ही गैस सिलेंडर लेने पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि सिलेंडर लेने को सुबह से ही एजेंसी में लंबी लाइन लग रही है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। ऑनलाइन बुकिंग के एक सप्ताह बाद भी उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल पा रही है। शनिवार को गैस की एक गाड़ी आने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली, लेकिन अधिकांश लोगों को खाली सिलेंडर लेकर वापस लौटना पड़ा। एजेंसी प्रबंधक कमला तिवारी का कहना है कि गुजरात में बाढ़ से हल्दूचौड़ (हल्द्वानी) प्लांट में गैस सिलेंडरों के ट्रक नहीं पहुंच पाने से यह स्थिति पैदा हुई है।
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स्थानीय गैस एजेंसी पर टनकपुर-बनबसा के 14 हजार से अधिक उपभोक्ता निर्भर हैं। हर माह करीब 26 से ज्यादा ट्रक यानि साढ़े सात हजार से अधिक सिलेंडरों की खपत होती है, लेकिन इस बार अब तक सिलेंडरों की आपूर्ति बहुत कम हो पाई है। होम डिलीवरी सुविधा भी प्रभावित होने से लोग एजेंसी में ही गैस सिलेंडर लेने पहुंच रहे हैं। स्थिति यह है कि सिलेंडर लेने को सुबह से ही एजेंसी में लंबी लाइन लग रही है। घंटों लाइन में खड़े रहने के बाद भी कई उपभोक्ताओं को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। ऑनलाइन बुकिंग के एक सप्ताह बाद भी उपभोक्ताओं को गैस नहीं मिल पा रही है। शनिवार को गैस की एक गाड़ी आने से उपभोक्ताओं को कुछ राहत मिली, लेकिन अधिकांश लोगों को खाली सिलेंडर लेकर वापस लौटना पड़ा। एजेंसी प्रबंधक कमला तिवारी का कहना है कि गुजरात में बाढ़ से हल्दूचौड़ (हल्द्वानी) प्लांट में गैस सिलेंडरों के ट्रक नहीं पहुंच पाने से यह स्थिति पैदा हुई है।
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