फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   Tanakpur-Jauljibi Road

टनकपुर-जौलजीबी रोड को रुपालीगाड़ तक मिली हरी झंडी

Thu, 28 Jul 2016 10:35 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Thu, 28 Jul 2016 10:35 PM IST
विज्ञापन
Tanakpur-Jauljibi Road
बंदरलीमा के पास मलबा हटाती जेसीबी - फोटो : अमर उजाला

चंपावत। सामरिक महत्व के टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर लंबे समय से आ रही अड़चन दूर हो गई है। फिलहाल इस मार्ग को ठुलीगाड़ से रुपालीगाड़ तक 43 किमी बनाया जाएगा। लोनिवि के अधीक्षण अभियंता डीएस ह्यांकी ने बताया कि 28 जुलाई को दिल्ली में हुई केंद्रीय गृह मंत्रालय की उच्चस्तरीय कमेटी की बैठक में इसे हरी झंडी मिल गई है। इसके लिए 252.81 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं।

विज्ञापन


टनकपुर-जौलजीबी रोड के नोडल अधिकारी लोनिवि के अधिशासी अभियंता डीडी भट्ट का कहना है कि वन अनापत्ति की पत्रावली को ऑनलाइन किया जा चुका है। अब तकनीकी और वित्तीय मंजूरी मिलने के बाद बड़ी बाधा दूर कर ली गई है। अलबत्ता रुपालीगाड़ से जौलीजीबी की तरफ के हिस्से का काम पंचेश्वर बांध की तस्वीर को अंतिम रूप दिए जाने के बाद हो सकेगा।
विज्ञापन


टनकपुर-जौलजीबी मार्ग पर वन अनापत्ति सहित कई अड़चनें फरवरी 2014 में पूरी कर ली गई थी। मूल डीपीआर में 134.57 किमी लंबी यह रोड 733 करोड़ रुपये में बननी थी। प्रस्तावित रोड टनकपुर से ठुलीगाड़, चूका, तामली, पंचेश्वर, झूलाघाट, अस्कोट होते हुए जौलजीबी तक पहुंचनी थी, लेकिन मई 2014 में भाजपा के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर प्रस्तावित पंचेश्वर बांध को अपनी शीर्ष प्राथमिकता में शामिल किया।
विज्ञापन
विज्ञापन


बांध की ऊंचाई बढ़ने की संभावना की वजह से इस रोड का काफी हिस्सा डूब क्षेत्र में आने का खतरा है। इसके चलते रोड के एलाइमेंट (समरेखन) पर तलवार लटकी रही। नए एलाइमेंट की वजह से काम पर ब्रेक लग गया। टनकपुर-जौलजीबी रोड के शुरुआती हिस्से ककरालीगेट-ठुलीगाड़ का काम चल रहा है। 12 किलोमीटर के इस शुरुआती हिस्से को डबल लेन किया जा रहा है। मार्ग की साढ़े सात मीटर की चौड़ाई को 12 मीटर एवं 5.5 मीटर डामर को बढ़ाकर 7.50 मीटर किया जाना है। इस वक्त करीब सात किमी दूर बूम तक का काम किया जा रहा है।

काली नदी के किनारे बनने वाली इस रोड के आड़े आ रहे वन क्षेत्र के बदले फरवरी 2014 में पिथौरागढ़ जिले के रांथी, सोसा, रमतोली, पांगला और गलाती में 213 हेक्टेयर एरिया में क्षतिपूरक पौधरोपण को फाइनल किया गया था, लेकिन रोड के एलाइमेंट में बदलाव की संभावना के बाद इस क्षतिपूरक पौधरोपण में भी संशोधन किया गया है।


ये मोटर मार्ग सिर्फ सीमांत के गांवों के विकास को ही पंख नहीं लगाएगा, बल्कि सीमा की सुरक्षा को भी बेहतर करेगा। सीमा से गुजरने के चलते यह रोड सुरक्षा के लिए खासी महत्वपूर्ण है और सीमा पर चौकसी को बेहतर आधारभूत ढांचा तैयार करने में सहायक होगी। सीमा सुरक्षा के लिए इस मार्ग पर एसएसबी के 34 बार्डर आउटपोस्टों में से 31 तक पहुंचने को रोड नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed