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तीन साल पहले पुल टूटा, अब तक नहीं जोड़ा

Mon, 15 Feb 2016 10:28 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट
ब्यूरो/अमर उजाला, लोहाघाट Updated Mon, 15 Feb 2016 10:28 PM IST
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Suspension Bridge

सरयू नदी के सिनतड़ा तोक में बने झूलापुल के तीन वर्ष पूर्व टूटने से यहां की लाइफ लाइन प्रभावित हो गई है। वर्ष 2011 में क्षेत्रीय लोगों की आवश्यकताओं को देखते हुए लोनिवि के प्रांतीय खंड पिथौरागढ़ ने यहां 60 मीटर लंबे पुल का निर्माण 2011 में किया गया था, जिससे ग्रामीणों को काफी राहत मिली थी, लेकिन अगस्त 2013 में हुई भारी वर्षा के कारण यह पुल बह गया। तब से किसी ने यहां की सुध नहीं ली है।

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स्थिति यह है कि सरयू पार सिमली, लिसनी आदि गांवों के बच्चे नेत्र सलान जूनियर हाईस्कूल में पढ़ने के लिए आते थे। यहां के लोग गंगपार बड़खेत में गेहूं पिसाने के लिए जाया करते थे। इस पुल से आर-पार के लोगों को काफी सहूलियतें मिलती थी। पुल के टूटने के बाद अब यहां के लोगों को अपने रिश्तेदार से मिलने या उनके सुख-दुख में भागीदारी करने के लिए 20 किमी दूर घाट होते हुए आना-जाना पड़ता है। अब यह पुल एडीबी पिथौरागढ़ को हस्तांतरित हो गया है। एडीबी के एसई चंद्रशेखर भट्ट का कहना है कि पुल के लिए 720 लाख रुपये स्वीकृत हो चुके हैं, जिसका टेंडर भी लगाया जा चुका है। शेष प्रक्रिया में अभी कुछ समय लगेगा।
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सीएम ने किया है पुल निर्माण का वादा
प्रमुख सामाजिक कार्यकर्ता राजेंद्र मेहता कहना है कि उन्होंने लगातार इस पुल को बनाने के लिए राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित किया है। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी पुल की स्वीकृति देने का वादा किया है।
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कई गांवों का आवागमन हुआ प्रभावित
बीडीसी सदस्य सुरेंद्र सामंत का कहना है कि पुल के टूटने से इस क्षेत्र के नेत्र सलमान, सिनतड़ा, शील बरूड़ी, गायकाज्याला, गंगाली, अमरवासेरा, जाख, बेटटा, चमोला, टालाखर्क, जमरेड़ी, जमाड़, सुतेड़ा, चमगाड़ के लोगों की जिंदगी ठहर सी गई है।

कई बार शासन को लिखा है
सामाजिक कार्यकर्ता दीवान सिंह बिष्ट का कहना है कि इस घाटी क्षेत्र के लोग बेहद सरल स्वभाव के हैं। पुल टूटने से उनके जीवन में जो आफत आई है, उसे वे अपनी नियति मानकर बैठे हुए हैं। उनके स्तर से बार-बार शासन को लिखा जा चुका है।


लोगों को उठानी पड़ रही हैं दिक्कतें
सामाजिक कार्यकर्ता उमेद सिंह का कहना है कि उन्हें तीन-चार बार वहां जाने का मौका मिला, इसी में उनके पसीने छूट गए। जो लोग नदी के आर-पार रहते हैं, उनको पुल टूटने से कितनी दिक्कतें हो रही होंगी, इसका अंदाजा स्वयं लगाया जा सकता है।

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