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सूर्योदय स्वरोजगार योजना ने बदल दी किस्मत
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चंपावत में सूर्योदय स्वरोजगार योजना के तहत लगे सौलर संयंत्र।
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। चंपावत के उद्यमी कैलाश पांडेय तीन साल पहले बिजली के बेतहाशा बिल से परेशान थे। दो महीने में दो हजार रुपये से ज्यादा का बिल आ रहा था। इसी बीच सूर्योदय स्वरोजगार योजना के बारे में उन्होंने पढ़ा और उसे अपनाया भी। इससे जहां उन्हें बिजली के बिल से निजात मिली, वहीं बिजली बेचकर उनकी कमाई भी होने लगी। कैलाश पांडेय की तरह जिले में 100 से अधिक लोगों ने इस योजना को अपनाया है।
सूर्योदय स्वरोजगार योजना के तहत भवनों की छत या प्रांगणों पर 2017 में चंपावत जिले में पांच किलोवाट क्षमता के 107 सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। इस संयंत्र के लिए 1000 वर्ग मीटर जगह पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया गया। लोगों को इसके लिए महज 10 प्रतिशत (35 हजार) रकम खर्च करनी पड़ी। इस बिजली को ऊर्जा निगम को 25 वर्षों तक बेचा जाना है। चंपावत जिले में अभी साढ़े तीन साल में उपभोक्ताओं ने बिजली के होने वाले खर्चों पर कटौती के अलावा पांच हजार से 37 हजार रुपये तक की आय कर ली है। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज बजेठा का कहना है कि चंपावत जिले में ये योजना बेहद शानदार तरीके से चल रही है। ऊर्जा संयंत्र में कुछ जगह छिटपुट दिक्कतें आईं, जिसे तकनीकी टीम ने ठीक कर लिया।
साढ़े तीन साल में निकल गई लागत
सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में सिर्फ 35 हजार रुपये खर्च करके डबल फायदा हुआ। एक ओर जहां बिजली के बिल से निजात मिल गई, वहीं बिजली की बिक्री से उन्हें 33 हजार रुपये से अधिक की आय हुई। - सुरेश महर, टनकपुर। (09 सीपीटी 19पी)
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लंबे-चौड़े बिल से मिल गई निजात
बिजली के बिल के रूप में हर दो महीने में दो हजार रुपये जमा करने पड़ते थे। संयंत्र लगाने से ये खर्च खत्म हो गया और पिछले साल से खपत के बाद बची बिजली की बिक्री से 700 रुपये महीने की आमदनी भी हो रही है। - कैलाश पांडेय, चंपावत।
63 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर की अनिवार्यता न बन जाए मुसीबत
चंपावत। कोरोना काल में मुख्यमंत्री ने सौर स्वरोजगार योजना शुरू की है। पहाड़ी इलाकों में धूप की पर्याप्तता के चलते चंपावत जिले में इसके लिए अनुकूल स्थितियां हैं। योजना के कारगर क्रियान्वयन से क्षेत्र की ऊर्जा की जरूरत के साथ स्वरोजगार की भी संभावना बढ़ी है। पर कम अनुदान और 300 मीटर दूरी में 63 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर की अनिवार्यता योजना को अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही है।
उरेडा के पीओ मनोज बजेठा का कहना है कि योजना के अंतर्गत जिले की श्रेणी के हिसाब से 15 से 25 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। ये अनुदान दस लाख रुपये की लागत के संयंत्र लगाए जाने के बाद मिलेगा। बैंक से 15 साल तक के लिए 8 प्रतिशत ब्याज पर सात लाख रुपये तक के कर्ज की सुविधा है। संयंत्र के लिए 50 हजार रुपये आवेदक को लगाने होंगे। पीओ का कहना है कि जिले में अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पोर्टल के जरिये ऑनलाइन आवेदन करेगा। बजेठा का कहना है कि आवेदक के संयंत्र स्थल से 300 मीटर दूर 63 केवी क्षमता का ट्रांसफार्मर होना जरूरी है। ताकि बिजली की आपूर्ति की जा सके।
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सूर्योदय स्वरोजगार योजना के तहत भवनों की छत या प्रांगणों पर 2017 में चंपावत जिले में पांच किलोवाट क्षमता के 107 सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए गए। इस संयंत्र के लिए 1000 वर्ग मीटर जगह पर 90 प्रतिशत अनुदान दिया गया। लोगों को इसके लिए महज 10 प्रतिशत (35 हजार) रकम खर्च करनी पड़ी। इस बिजली को ऊर्जा निगम को 25 वर्षों तक बेचा जाना है। चंपावत जिले में अभी साढ़े तीन साल में उपभोक्ताओं ने बिजली के होने वाले खर्चों पर कटौती के अलावा पांच हजार से 37 हजार रुपये तक की आय कर ली है। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज बजेठा का कहना है कि चंपावत जिले में ये योजना बेहद शानदार तरीके से चल रही है। ऊर्जा संयंत्र में कुछ जगह छिटपुट दिक्कतें आईं, जिसे तकनीकी टीम ने ठीक कर लिया।
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साढ़े तीन साल में निकल गई लागत
सौर ऊर्जा संयंत्र लगाने में सिर्फ 35 हजार रुपये खर्च करके डबल फायदा हुआ। एक ओर जहां बिजली के बिल से निजात मिल गई, वहीं बिजली की बिक्री से उन्हें 33 हजार रुपये से अधिक की आय हुई। - सुरेश महर, टनकपुर। (09 सीपीटी 19पी)
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लंबे-चौड़े बिल से मिल गई निजात
बिजली के बिल के रूप में हर दो महीने में दो हजार रुपये जमा करने पड़ते थे। संयंत्र लगाने से ये खर्च खत्म हो गया और पिछले साल से खपत के बाद बची बिजली की बिक्री से 700 रुपये महीने की आमदनी भी हो रही है। - कैलाश पांडेय, चंपावत।
63 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर की अनिवार्यता न बन जाए मुसीबत
चंपावत। कोरोना काल में मुख्यमंत्री ने सौर स्वरोजगार योजना शुरू की है। पहाड़ी इलाकों में धूप की पर्याप्तता के चलते चंपावत जिले में इसके लिए अनुकूल स्थितियां हैं। योजना के कारगर क्रियान्वयन से क्षेत्र की ऊर्जा की जरूरत के साथ स्वरोजगार की भी संभावना बढ़ी है। पर कम अनुदान और 300 मीटर दूरी में 63 केवी क्षमता के ट्रांसफार्मर की अनिवार्यता योजना को अधिक चुनौतीपूर्ण बना रही है।
उरेडा के पीओ मनोज बजेठा का कहना है कि योजना के अंतर्गत जिले की श्रेणी के हिसाब से 15 से 25 प्रतिशत तक अनुदान मिलेगा। ये अनुदान दस लाख रुपये की लागत के संयंत्र लगाए जाने के बाद मिलेगा। बैंक से 15 साल तक के लिए 8 प्रतिशत ब्याज पर सात लाख रुपये तक के कर्ज की सुविधा है। संयंत्र के लिए 50 हजार रुपये आवेदक को लगाने होंगे। पीओ का कहना है कि जिले में अधिक से अधिक लोगों को योजना से जोड़ने के लिए प्रेरित किया जाएगा। पोर्टल के जरिये ऑनलाइन आवेदन करेगा। बजेठा का कहना है कि आवेदक के संयंत्र स्थल से 300 मीटर दूर 63 केवी क्षमता का ट्रांसफार्मर होना जरूरी है। ताकि बिजली की आपूर्ति की जा सके।