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ध्ाड़ल्ले से बन रहे भ्ावन, पेयजल कनेक्श्ान पर रोक

Wed, 20 Apr 2016 10:45 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत
ब्यूरो/अमर उजाला, चंपावत Updated Wed, 20 Apr 2016 10:45 PM IST
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पानी भ्‍ारते। - फोटो : अमर उजाला

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पानी का संकट क्षेत्र के कई इलाकों में लोगों की दिनचर्या को प्रभावित कर रहा है। एक दिन छोड़कर पानी मिल रहा है, लेकिन वह भी नाकाफी। बावजूद इसके यहां पानी की बर्बादी रोकने के लिए विभागीय तौर पर कोई विशेष कदम नहीं उठाए गए हैं। यहां तक कि सरकारी अथवा निजी निर्माण कार्यों पर भी रोक नहीं है।

अलबत्ता जल संस्थान के चंपावत डिवीजन के अधिशासी अभियंता पीसी करगेती का कहना है कि इस वक्त नए पेयजल कनेक्शनों पर रोक लगाई गई है। ये प्रतिबंध जून तक जारी रहेंगे। इसके अलावा पानी की बर्बादी रोकने को लीकेज ठीक किए गए हैं।
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वहीं, जीआईसी मोहल्ले, गोरलदेव वार्ड सहित शहर के कई हिस्सों में पानी का संकट है। यहां जल संस्थान टैंकरों से पानी की आपूर्ति कर रहा है। जूनियर इंजीनियर एसएस थापा का कहना है कि जल स्रोतों में कमी की वजह से अधिकांश जगहों में एक दिन छोड़कर पानी आपूर्ति की जा रही है।
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बनगांव पेयजल योजना सूखी, भटक रहे लोग
मौसम में तपन बढ़ने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में भी पेयजल संकट भयावह रूप ले रहा है। संपन्न लोग वाहनों के जरिए दूरस्थ स्थानों से पानी ढो रहे हैं, वहीं गरीब लोग पानी के लिए दर-दर भटक रहे हैं। रायनगर चौड़ी की जल स्रोत सूखने से बनगांव पेयजल योजना ठप पड़ गई है, जबकि बलांई पेयजल योजना से जलापूर्ति हो रही है। लोग सुबह तीन बजे से ही नौलों में लाइन लगा रहे हैं। नौलों में अत्यधिक दबाव के चलते वह भी जवाब देने लग गए है।
रौंतला माहरा पेयजल योजना ठप पड़ गई है, जबकि फोर्ती एवं खूना मलक की पेयजल योजनाओं का 95 फीसदी जल स्तर कम हो गया है। कलीगांव, टूणा, पाटन-पाटनी, सुंई, बनगांव, पुलहिंडोला आदि गांवों में भी पानी के लिए हाहाकार मचा है।
उधर, पाटी में लोगों को तीसरे दिन पानी मिल पा रहा है। अवर अभियंता चंद्रशेखर पंत के अनुसार सभी योजनाओं के जलस्रोतों में 70 फीसदी कमी आ गई है। पाटी, जौलाड़ी, पूनाकोट, छतरी दयार, लखनपुर, न्यू कालौनी, रौलामेल, तोली आदि गांवों के लोग गाड़-गधेरों का पानी पीने को मजबूर हैं। कई जगह लोग प्राइवेट वाहनों से चार किमी दूर से पानी ढोने को मजबूर हैं।


लोहाघाट में मिल रहा बस 25 प्रतिशत पानी
लोहाघाट नगर में भी पेयजल को हाहाकार मचा है। तीन टैंकरों से प्रतिदिन मेन टैंक में पानी डाला जा रहा है। अभियंता पवन बिष्ट के अनुसार नगर के लिए प्रतिदिन 1650 किलोलीटर पानी की जरूरत है। इसके सापेक्ष 420 केएल पानी ही मिल पा रहा है। क्षेत्र की निर्भरता चौड़ी लिफ्ट पेयजल योजना पर टिकी हुई है, लेकिन यहां भी मात्र 380 केएल पानी ही मिल रहा है, जबकि ऋषेश्वर स्थित नलकूप से 25 केएल एवं फोर्ती योजना से 15 केएल पानी मिल पा रहा है।
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