फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Champawat News ›   So now electricity will never be produced from Gaudi Power House

तो अब गौड़ी पावर हाउस से कभी नहीं होगा बिजली उत्पादन?

Haldwani Bureau हल्द्वानी ब्यूरो
Updated Sat, 28 Nov 2020 10:48 PM IST
विज्ञापन
So now electricity will never be produced from Gaudi Power House
चंपावत। जिला मुख्यालय से करीब आठ किलोमीटर की दूर स्थित गौड़ी पावर हाउस को पुनर्जीवित करने की कवायद परवान नहीं चढ़ पा रही है। उत्तराखंड वैकल्पिक उर्जा संस्थान (उरेडा) के माध्यम से गौड़ी पावर हाउस को पीपीपी मोड में चलाए जाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थी, लेकिन उरेडा को गौड़ी पावर हाउस को चलाने के लिए आवेदक कंपनियां नहीं मिल पा रही हैं। इससे बंद पड़े गौड़ी पावर हाउस के फिर से शुरू होने की उम्मीदें क्षीण होती जा रही हैं।
विज्ञापन

बताते चलें कि जिला मुख्यालय के गौड़ी में गंडक नदी के पानी से संचालित होने वाले गौड़ी पावर हाउस की नींव 1960 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री चंद्रभानु गुप्ता ने रखी थी। दो किलोवाट का यह बिजली घर उस दौर में चंपावत और लोहाघाट नगर के अलावा एबटमाउंट और मायावती आश्रम को विद्युत आपूर्ति करता था। ग्रिड लाइन के विकास के बाद पावर हाउस की उपयोगिता कम होने के कारण तीन दशक पूर्व 1990 में यह बंद हो गया। वर्ष 1995 में गौड़ी पावर हाउस को लघु जल विद्युत निगम के माध्यम से संचालित करने की कवायद शुरू की गई थी। लेकिन लघु जल विद्युत निगम की ओर से हाथ खड़े कर दिए जाने से यह मामला खटाई में पड़ गया। वर्ष 2000 में उत्तराखंड राज्य गठन के बाद छोटी जल विद्युत परियोजनाओं को उरेडा के माध्यम से संचालित करने की पहल के तहत पावर हाउस को उरेडा को हस्तांतरित किया गया। उरेडा के परियोजना अधिकारी मनोज बजेठा के अनुसार गौड़ी पावर हाउस को पीपीपी मोड में चलाने के लिए आवेदक नहीं मिल पा रहे हैं। संवाद
विज्ञापन

दो साल पूर्व रुड़की के विशेषज्ञों ने किया था सर्वे
चंपावत। उरेडा की ओर से स्वयं के प्रयासों से गौड़ी पावर हाउस को पुनर्जीवित करने की योजना के तहत दो साल पूर्व आईआईटी रुड़की के विशेषज्ञों से पावर हाउस का सर्वे कराया गया था। विशेषज्ञों की सर्वे रिपोर्ट में योजना से फिर से बिजली उत्पादन शुरू करने में पावर हाउस की लागत से अधिक का खर्चा आने का अनुमान जताया गया था। जिसके बाद उरेडा की ओर से पावर हाउस को पीपीपी मोड में चलाने का निर्णय लिया गया। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

क्षतिग्रस्त और पूरी तरह से बंद है पावर हाउस की नहर
चंपावत। गौड़ी पावर हाउस के संचालन के लिए बनाई गई करीब तीन किमी लंबी नहर वर्तमान में पूरी तरह क्षतिग्रस्त होने के साथ मलबा भरने से बंद हो गई है। पावर हाउस के भीतर लगी मशीनें और कर्मचारियों के लिए बनाए गए आवासीय भवन भी पूरी तरह से खंडहर में तब्दील हो गए हैं। संवाद
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed