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शारदा रेंज में मगरमच्छ, घड़ियाल और ऊदबिलाव की गणना शुरू
ब्यूरो/अमर उजाला, टनकपुर (चंपावत)
Updated Sat, 25 Feb 2017 09:06 PM IST
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शारदा रेंज में मगरमच्छ, घड़ियाल और ऊदबिलाव की गणना शुरू
- फोटो : अमर उजाला
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हल्द्वानी वन प्रभाग के शारदा रेंज ने शारदा किनारे एवं जंगल के जलाशयों में मगरमच्छ, ऊदबिलाव और घड़ियालों की गणना शुरू कर दी है। गणना तीन दिनों तक चलेगी। इसके लिए विभाग ने दो टीमें गठित की है। प्रत्यक्ष रूप से दिखाई पड़ने या फिर अप्रत्यक्ष रूप से चिह्न मिलने पर उसका गणना में उल्लेख किया जाएगा।
प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सनवाल के निर्देश पर शुरू की गई गणना के लिए एक प्रगणक, दो सहायक नियुक्त किए गए हैं। वन दरोगा मुनेश सिंह राणा दोनों ही टीमें के प्रगणक बनाए गए हैं। पहली टीम में वन वीट अधिकारी हरीश चंद्र जोशी, गिरीश चंद्र पांडेय व वाचर विक्रम लाल व दूसरी टीम में वीट अधिकारी नंदा बल्लभ कांडपाल, सुरेद्र महरा शामिल हैं। वन क्षेत्राधिकारी ख्याली राम आर्य ने बताया कि एक टीम बाटनागाड़ से टनकपुर बैराज तक और दूसरी टीम टनकपुर बैराज से बनबसा बैराज तक गणना का कार्य करेगी।
उन्होंने बताया कि राफ्टरों के सहारे नदी व नदी में बने टापूओं में जाकर गणना की जा रही है। गणना में पर्यटकों, ग्रामीणों, जीव प्रतिपालकों व नेचर गाइडों की भी मदद ली जा रही है। वायनाकूलर का उपयोग कर मगरमच्छ, घड़ियाल और ऊदबिलावों को तलाशा जा रहा है। टीम को जीवों से 50 मीटर दूरी बनाकर गणना करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जीव अपनी हलचल से विचलित न हों। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि 2.5 मीटर से अधिक लंबे मगरमच्छ और घड़ियाल वयस्क, 1.50 से 2.70 मी. लंबे अवस्यक व 1.5 मी. लंबे मगरमच्छ व घड़ियाल बच्चों की श्रेणी में रखा गया है।
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उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में दो प्रकार के ऊदबिलाव पाए जाते हैं। यूरेशियन व स्मूथ कोटेड होता है। यूरेशियन ऊदबिलाव का रंग ग्रे (सीमेंट कलर) खाल खुरदरी होती है, जबकि स्मूथ कोटेड ऊदबिलाव का रंग चोकलेटी ब्राउन और खाल मुलायम, चिकनी होती है। प्रगणक वन दरोगा ने बताया कि पहले दिन चले गणना कार्य में प्रत्यक्ष दृश्यावलोकन में गणना शून्य रही है, अलबत्ता एक माह पूर्व बैराज के समीप दो मगरमच्छों के दिखाई देने और बाटनागाड़ में तीन दिन पहले दो ऊदबिलाव दो बच्चों के साथ दिखाई देने की बात पता चली है।
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प्रभागीय वनाधिकारी डॉ. चंद्रशेखर सनवाल के निर्देश पर शुरू की गई गणना के लिए एक प्रगणक, दो सहायक नियुक्त किए गए हैं। वन दरोगा मुनेश सिंह राणा दोनों ही टीमें के प्रगणक बनाए गए हैं। पहली टीम में वन वीट अधिकारी हरीश चंद्र जोशी, गिरीश चंद्र पांडेय व वाचर विक्रम लाल व दूसरी टीम में वीट अधिकारी नंदा बल्लभ कांडपाल, सुरेद्र महरा शामिल हैं। वन क्षेत्राधिकारी ख्याली राम आर्य ने बताया कि एक टीम बाटनागाड़ से टनकपुर बैराज तक और दूसरी टीम टनकपुर बैराज से बनबसा बैराज तक गणना का कार्य करेगी।
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उन्होंने बताया कि राफ्टरों के सहारे नदी व नदी में बने टापूओं में जाकर गणना की जा रही है। गणना में पर्यटकों, ग्रामीणों, जीव प्रतिपालकों व नेचर गाइडों की भी मदद ली जा रही है। वायनाकूलर का उपयोग कर मगरमच्छ, घड़ियाल और ऊदबिलावों को तलाशा जा रहा है। टीम को जीवों से 50 मीटर दूरी बनाकर गणना करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि जीव अपनी हलचल से विचलित न हों। वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि 2.5 मीटर से अधिक लंबे मगरमच्छ और घड़ियाल वयस्क, 1.50 से 2.70 मी. लंबे अवस्यक व 1.5 मी. लंबे मगरमच्छ व घड़ियाल बच्चों की श्रेणी में रखा गया है।
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उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र में दो प्रकार के ऊदबिलाव पाए जाते हैं। यूरेशियन व स्मूथ कोटेड होता है। यूरेशियन ऊदबिलाव का रंग ग्रे (सीमेंट कलर) खाल खुरदरी होती है, जबकि स्मूथ कोटेड ऊदबिलाव का रंग चोकलेटी ब्राउन और खाल मुलायम, चिकनी होती है। प्रगणक वन दरोगा ने बताया कि पहले दिन चले गणना कार्य में प्रत्यक्ष दृश्यावलोकन में गणना शून्य रही है, अलबत्ता एक माह पूर्व बैराज के समीप दो मगरमच्छों के दिखाई देने और बाटनागाड़ में तीन दिन पहले दो ऊदबिलाव दो बच्चों के साथ दिखाई देने की बात पता चली है।