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पूर्णागिरि धाम क्षेत्र के विकास के लिए ड्रोन से होगा सर्वे
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मां पूर्णागिरि धाम में प्रस्तावित पार्किंग स्थल देखते मंदिर समिति और ग्रामीण निर्माण विभाग के अ
- फोटो : CHAMPAWAT
चंपावत। मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र के वृहद विकास की मंजूरी के बाद संयुक्त रूप से मौका मुआयना किया गया। ग्रामीण निर्माण विभाग (आरडब्ल्यूडी) और पूर्णागिरि मंदिर समिति के पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से धाम क्षेत्र का निरीक्षण कर सर्वे से पहले के हालात का जायजा लिया।
आरडब्ल्यूडी के एई प्रमोद कुमार वर्मा ने बताया कि क्षेत्र के भौगोलिक हालात के मद्देनजर सर्वे के लिए ड्रोन और अन्य तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा। टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि पूर्णागिरि धाम के समग्र विकास के लिए सर्वे के आधार पर आरडब्ल्यूडी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (डीपीआर) बनाएगी। इसे शासन को भेज अनुमोदन लिया जाएगा। टीम ने मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पंडित नीरज पांडेय, सचिव पंडित सुरेश तिवारी, वास्तुविद अंशुल जोशी के साथ पार्किंग स्थल, अस्पताल आदि कार्यों के लिए स्थलीय निरीक्षण किया गया।
मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी का कहना है कि मां पूर्णागिरि धाम के वृहद विकास के काम के पूरा होने पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और पूर्णागिरि क्षेत्र के गांव भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे।
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मुख्य रूप से इन कार्यों के लिए डीपीआर बनेगी
लादीगाड़ पंपिंग योजना।
मोबाइल नेटवर्क बेहतर करना।
हाईटेक शौचालय और स्नानागार।
पूर्णागिरि क्षेत्र में अस्पताल खोलना।
काली मंदिर से मुख्य मंदिर तक परिक्रमा पथ।
पूर्णागिरि के बेस कैंप ठुलीगाड़ में 500 बड़े वाहनों का पार्किंग स्थल।
भैरव मंदिर क्षेत्र में एक हजार छोटे वाहन (कार, जीप) का पार्किंग स्थल।
ठुलीगाड़-भैरव मंदिर सड़क का चौड़ीकरण, पूर्णागिरि, रणकोची, चरण मंदिर को जोड़ना।
पौराणिक मार्ग को ठीक करने के अलावा भैरव मंदिर-खर्राटाक-चूका तक सड़क निर्माण।
धाम से लगे गांवों में भी होगा सुविधा विस्तार
चंपावत। धार्मिक और आर्थिक नजरिये से महत्वपूर्ण पूर्णागिरि धाम में होली बाद से तीन माह के सरकारी मेले के अलावा शेष अवधि में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। हर साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालु यहां आते हैं। पूर्णागिरि धाम के नजदीक सेलागाड़, कोटकेंद्री, खर्राटाक आदि गांव हैं लेकिन सुविधाओं की कमी से खर्राटाक आबादी शून्य हो गया है जबकि कोटकेंद्री गांव में तेजी से पलायन हुआ है। इन सबके मद्देनजर विधानसभा में चंपावत का प्रतिनिधित्व कर रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र के समग्र विकास की घोषणा की थी। ये स्थलीय निरीक्षण सीएम की घोषणा को साकार करने का प्रयास है।
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आरडब्ल्यूडी के एई प्रमोद कुमार वर्मा ने बताया कि क्षेत्र के भौगोलिक हालात के मद्देनजर सर्वे के लिए ड्रोन और अन्य तकनीक का भी सहारा लिया जाएगा। टनकपुर के एसडीएम हिमांशु कफल्टिया ने बताया कि पूर्णागिरि धाम के समग्र विकास के लिए सर्वे के आधार पर आरडब्ल्यूडी विस्तृत प्रगति रिपोर्ट (डीपीआर) बनाएगी। इसे शासन को भेज अनुमोदन लिया जाएगा। टीम ने मंदिर समिति के उपाध्यक्ष पंडित नीरज पांडेय, सचिव पंडित सुरेश तिवारी, वास्तुविद अंशुल जोशी के साथ पार्किंग स्थल, अस्पताल आदि कार्यों के लिए स्थलीय निरीक्षण किया गया।
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मंदिर समिति के अध्यक्ष पंडित किशन तिवारी का कहना है कि मां पूर्णागिरि धाम के वृहद विकास के काम के पूरा होने पर श्रद्धालुओं के लिए सुविधाएं बढ़ेंगी और पूर्णागिरि क्षेत्र के गांव भी विकास की मुख्य धारा से जुड़ सकेंगे।
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मुख्य रूप से इन कार्यों के लिए डीपीआर बनेगी
लादीगाड़ पंपिंग योजना।
मोबाइल नेटवर्क बेहतर करना।
हाईटेक शौचालय और स्नानागार।
पूर्णागिरि क्षेत्र में अस्पताल खोलना।
काली मंदिर से मुख्य मंदिर तक परिक्रमा पथ।
पूर्णागिरि के बेस कैंप ठुलीगाड़ में 500 बड़े वाहनों का पार्किंग स्थल।
भैरव मंदिर क्षेत्र में एक हजार छोटे वाहन (कार, जीप) का पार्किंग स्थल।
ठुलीगाड़-भैरव मंदिर सड़क का चौड़ीकरण, पूर्णागिरि, रणकोची, चरण मंदिर को जोड़ना।
पौराणिक मार्ग को ठीक करने के अलावा भैरव मंदिर-खर्राटाक-चूका तक सड़क निर्माण।
धाम से लगे गांवों में भी होगा सुविधा विस्तार
चंपावत। धार्मिक और आर्थिक नजरिये से महत्वपूर्ण पूर्णागिरि धाम में होली बाद से तीन माह के सरकारी मेले के अलावा शेष अवधि में भी श्रद्धालुओं की आवाजाही रहती है। हर साल 50 लाख से अधिक श्रद्धालु यहां आते हैं। पूर्णागिरि धाम के नजदीक सेलागाड़, कोटकेंद्री, खर्राटाक आदि गांव हैं लेकिन सुविधाओं की कमी से खर्राटाक आबादी शून्य हो गया है जबकि कोटकेंद्री गांव में तेजी से पलायन हुआ है। इन सबके मद्देनजर विधानसभा में चंपावत का प्रतिनिधित्व कर रहे मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मां पूर्णागिरि धाम क्षेत्र के समग्र विकास की घोषणा की थी। ये स्थलीय निरीक्षण सीएम की घोषणा को साकार करने का प्रयास है।