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घुमंतू और अनाथ बच्चों का होगा पुनर्वास
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Servay for Child Welfare in Champawat
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चंपावत। सर्वोच्च न्यायालय ने घुमंतू बच्चों (स्ट्रीट चिल्ड्रन) के साथ ही कोविड-19 के कारण अनाथ बच्चों के पुनर्वास के लिए सर्वे अभियान चलाने के आदेश दिए हैं। इसके अनुपालन के लिए जिला प्रशासन ने सर्वे शुरू कर दिया है। प्रशासन की ओर से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, किशोर न्याय यूनिट, जिला बाल कल्याण समिति के साथ ही रीड्स संस्था के जरिये ऐसे बच्चों के चिह्नीकरण के लिए सर्वे किया जा रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय ने कोविड-19 के कारण अनाथ बच्चों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। इसमें बिना परिवार के अकेले खुले में रह रहे बच्चों, दिन में गलियों में घूमकर रात में घर जाने वाले बच्चों के साथ ही दिन में सड़कों या गलियों में परिजनों के साथ रहने वाले बच्चे शामिल हैं। डीएम विनीत तोमर के अनुसार ऐसे चिह्नित बच्चों की सूचना राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, किशोर न्याय बोर्ड के साथ ही स्वैच्छिक संस्थाओं से चिह्नित बच्चों की सूचना जिला प्रोबेशन अधिकारी को देने के निर्देश दिए हैं, जिससे समुचित देखरेख और संरक्षण के लिए बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
205 अनाथ बच्चे चिह्नित
चंपावत। जिले में कोविड-19 के कारण माता और पिता दोनों को खोने वाले बच्चों की संख्या 205 पहुंच गई है। जिला विधि सह परिवीक्षा अधिकारी द्वारिका शर्मा के अनुसार कोविड के कारण माता अथवा पिता या दोनों को खोने वाले बच्चों का समुचित संरक्षण और देखरेख की जा रही है।
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वात्सल्य योजना में दिए जा रहे प्रतिमाह तीन हजार रुपये
चंपावत। कोविड-19 के कारण अनाथ बच्चों को समाज कल्याण विभाग की ओर से वात्सल्य योजना के तहत प्रतिमाह तीन हजार रुपये की राशि दी जा रही है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत ने बताया कि 205 बच्चों को वात्सल्य योजना का लाभ दिया जा रहा है, जबकि पीएम चिल्ड्रन केयर फंड के तहत एक भी बच्चा चिह्नित नहीं हो सका है।
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सर्वोच्च न्यायालय ने कोविड-19 के कारण अनाथ बच्चों को तीन श्रेणियों में वर्गीकृत किया है। इसमें बिना परिवार के अकेले खुले में रह रहे बच्चों, दिन में गलियों में घूमकर रात में घर जाने वाले बच्चों के साथ ही दिन में सड़कों या गलियों में परिजनों के साथ रहने वाले बच्चे शामिल हैं। डीएम विनीत तोमर के अनुसार ऐसे चिह्नित बच्चों की सूचना राष्ट्रीय बाल संरक्षण आयोग के बाल स्वराज पोर्टल पर अपलोड की जाएगी। उन्होंने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, किशोर न्याय बोर्ड के साथ ही स्वैच्छिक संस्थाओं से चिह्नित बच्चों की सूचना जिला प्रोबेशन अधिकारी को देने के निर्देश दिए हैं, जिससे समुचित देखरेख और संरक्षण के लिए बच्चों को जिला बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके।
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205 अनाथ बच्चे चिह्नित
चंपावत। जिले में कोविड-19 के कारण माता और पिता दोनों को खोने वाले बच्चों की संख्या 205 पहुंच गई है। जिला विधि सह परिवीक्षा अधिकारी द्वारिका शर्मा के अनुसार कोविड के कारण माता अथवा पिता या दोनों को खोने वाले बच्चों का समुचित संरक्षण और देखरेख की जा रही है।
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वात्सल्य योजना में दिए जा रहे प्रतिमाह तीन हजार रुपये
चंपावत। कोविड-19 के कारण अनाथ बच्चों को समाज कल्याण विभाग की ओर से वात्सल्य योजना के तहत प्रतिमाह तीन हजार रुपये की राशि दी जा रही है। जिला समाज कल्याण अधिकारी आरएस सामंत ने बताया कि 205 बच्चों को वात्सल्य योजना का लाभ दिया जा रहा है, जबकि पीएम चिल्ड्रन केयर फंड के तहत एक भी बच्चा चिह्नित नहीं हो सका है।